शारदाकेयर हेल्थसिटी के डॉक्टरों ने एक 36 साल की महिला की जान बचाई

 


शारदाकेयर हेल्थसिटी में गर्भावस्था का एक चमत्कारिक मामला: दुर्लभ यूनिकॉर्नुएट यूटेरस और प्लेसेंटा एक्रीटा वाली महिला का हुआ सफल इलाज़ 

गर्भावस्था में एक दुर्लभ जटिलता के बाद 36 साल की एक महिला की जीवनरक्षक इमरजेंसी सर्जरी की गई

डॉ. रुचि श्रीवास्तव ने प्लेसेंटा एक्रीटा स्पेक्ट्रम और यूनिकॉर्नुएट यूट्रस के एक बहुत ही दुर्लभ संयोजन की पहचान की।

समय पर इलाज से माँ की जान बच पाई और जन्मे बच्चे के लिए भी अच्छा नतीजा मिला।


 ग्रेटर नोएडा (अमन इंडिया) । शारदाकेयर हेल्थसिटी के डॉक्टरों ने एक 36 साल की महिला की जान बचाई। महिला को गर्भावस्था में एक बहुत ही दुर्लभ और जानलेवा कॉम्प्लिकेशन हो गई थी। उसकी चारों गर्भावस्था में प्लेसेंटा रिटेन हो गया था। इस कारण से उसका केस बहुत जटिल और गंभीर हो गया था। इमरजेंसी सर्जरी ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी की डायरेक्टर डॉ. रुचि श्रीवास्तव ने की। उन्होंने बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग को नियंत्रित किया और मरीज़ की जान बचाई।

श्रीमती अंजलि (बदला हुआ नाम) का गर्भावस्था के 6.5 से 7.5 महीने के बीच तीन समयपूर्व प्रसव पहले भी हो चुका था। उन सभी प्रसवों में प्लेसेंटा स्वाभाविक रूप से बाहर नहीं आ पाई थी। इसे मैन्युअल रूप से निकालना पड़ा था। इस वजह से उनकी वर्तमान गर्भावस्था बहुत ज्यादा ख़तरनाक हो गई थी।

महिला ने दूसरे हॉस्पिटल में 1.7 kg वज़न के प्रीमैच्योर बच्चे को जन्म दिया था। लेकिन डिलीवरी के बाद प्लेसेंटा अपने आप बाहर नहीं आई। इसे निकालने की कई कोशिशें नाकाम रहीं, और करीब 10 घंटे बाद उसे सुबह-सुबह शारदाकेयर हेल्थसिटी रेफर किया गया।

डॉ. रुचि श्रीवास्तव की देखरेख में महिला को तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि प्लेसेंटा यूट्रस की दीवार में गहराई तक चला गया था। इस दुर्लभ और खतरनाक स्थिति को प्लेसेंटा एक्रीटा स्पेक्ट्रम (PAS) कहते हैं और अगर जल्दी इलाज न किया जाए तो इससे गंभीर और जानलेवा ब्लीडिंग हो सकती है।

सर्जरी के दौरान डॉ. रुचि ने यह भी पाया कि मरीज़ का यूटेरस यूनिकॉर्नुएट था। यह एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी होती है। इसमें यूटेरस का सिर्फ़ एक हिस्सा सामान्य तरीके से विकसित होता है। यूनिकॉर्नुएट यूटेरस और प्लेसेंटा एक्रीटा स्पेक्ट्रम (PAS) दोनों का होना बहुत दुर्लभ घटना है, दुनिया भर में इसके कुछ ही मामले रिपोर्ट किए गए हैं।प्लेसेंटा निकालते समय बच्चे के जन्म के बाद महिला में बहुत ज़्यादा खून बहा। ब्लीडिंग रोकने और उसकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने तुरंत इमरजेंसी हिस्टेरेक्टॉमी (यूटेरस निकालना) की। सर्जरी सफल रही। माँ और उसका नवजात बच्चा दोनों ठीक हो गए।


शारदाकेयर हेल्थसिटी की ऑब्सट्रिक्स & गायनेकोलॉजी डॉयरेक्टर डॉ रुचि श्रीवास्तव ने कहा, “यह गर्भावस्था से जुड़ी सबसे कठिन मेडिकल इमरजेंसी में से एक थी। मरीज़ को पहले भी कई बार रिटेन्ड प्लेसेंटा की समस्या हो चुकी थी और उसके गर्भाशय में एक दुर्लभ जन्मजात असामान्यता भी थी। समय पर सही पहचान, तुरंत सर्जरी का फैसला और पूरी टीम के बेहतर तालमेल की वजह से हम माँ की जान बचा सके और बच्चे के लिए भी अच्छे नतीजे सुनिश्चित कर पाए। ऐसे हाई-रिस्क गर्भावस्था मामलों का इलाज हमेशा उन अस्पतालों में होना चाहिए, जहां एडवांस्ड सर्जरी और क्रिटिकल केयर की सुविधाएं उपलब्ध हों।

शारदाकेयर हेल्थसिटी & शारदा हॉस्पिटल के ग्रुप CEO डॉ कौसर शाह ने कहा इतने दुर्लभ और गंभीर मामले का सफल इलाज हमारी डॉक्टर डॉ. रुचि श्रीवास्तव की विशेषज्ञता और हॉस्पिटल की एडवांस्ड चिकित्सा सुविधाओं को दर्शाता है। इस मामले ने हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी वाली महिलाओं को बेहतर और स्पेशलाइज्ड इलाज देने तथा सबसे कठिन मेडिकल इमरजेंसी का सफलतापूर्वक सामना करने की हमारी प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।