केयर हेल्थ इंश्योरेंस के मुख्य परिचालन अधिकारी मनीष डोडेजा ने कैंसर को लेकर लोगो को किया जागरूक

 भारत में कैंसर के इलाज की बढ़ती लागत और लंबे इलाज की ज़रूरत से वित्तीय जोखिम बढ़ा: केयर हेल्थ इंश्योरेंस

• शुरुआती चरण के इलाज में ₹5–7 लाख का खर्च आता हैजटिल कैंसर के इलाज में ₹30 लाख तक का खर्च हो सकता है

• दावों के रुझान के पता चलता है कि ₹15-25 लाख के स्वास्थ्य बीमा कवर की ज़रूरत है

नई दिल्ली (अमन इंडिया) । केयर हेल्थ इंश्योरेंस ने विश्व कैंसर जागरूकता दिवस पर, देश भर में कैंसर के इलाज के मामले में वित्तीय बोझमें हो रही बढ़ोतरी को रेखांकित किया है। कंपनी के दावों के आंकड़े से पता चलता है कि कैंसर का इलाज लंबे समय तक चलता है और इसमें काफी खर्च होता हैजिससे मरीज़ों तथा उनके परिवारों पर भारी बोझ पड़ता है।

दावों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि कैंसर के इलाज की लागत तेज़ी से बढ़ रही हैशुरुआती चरण के इलाज में आमतौर पर ₹5–7 लाख प्रति मामलेका खर्च आता हैजबकि अधिक जटिल मामलों और कैंसर के उन्नत चरण में बीमारी बढ़ने की स्थिति में देखभाल की ज़रूरतउपचार प्रोटोकॉल और उपचार की अवधि के आधार पर खर्च ₹20–30 लाख प्रति उपचार तक होसकता है। यह विशेष रूप से केंद्रीय बजट 2026 के संदर्भ में प्रासंगिक हैजिसमें किफायती कैंसर देखभाल और मरीज़ों पर वित्तीय बोझ को कम करने पर नए सिरे से गौर किया गया है

केयर हेल्थ इंश्योरेंस के मुख्य परिचालन अधिकारी मनीष डोडेजा ने उभरते रुझानों पर अपनी टिप्पणी में कहा “कैंसर का इलाज न केवल चिकित्सकीय रूप से जटिल है ।बल्कि इसमें लंबे और कई चरण कीदेखभाल के तरीके भी शामिल हैंजो अक्सर कई महीनों तक चलते हैं।

निष्कर्षों से पता चलता है कि कैंसर का इलाज लंबे समय तक विभिन्न चरणोंमें होता हैजो अक्सर कई महीनों तक चलता है। मरीज़ आमतौर पर देखभाल के विभिन्न चरणों में कई दावे पेश करते हैं। गौरतलब है कि कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी को बड़े पैमाने पर डे-केयर प्रक्रियाओं के रूप में कवर किया जाता हैअस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता उपचार की जटिलता के आधार पर अलग-अलग होती हैंजिसमें रहने की अवधि तीन दिनों से लेकर 20 दिन तक होती है।विश्लेषण से यह भी ज़ाहिर होता है कि विभिन्न प्रकार के कैंसर के लिए वित्तीय जोखिम अलग-अलग हो सकता है। स्तन कैंसरमुंह के कैंसरसर्वाइकल कैंसरप्रोस्टेट कैंसर और रक्त कैंसर से संबंधित दावेसाथ ही अग्नाशय (पैन्क्रियास) कैंसर तथा यकृत कैंसर के उन्नत चरण और अन्य में लगातार अलग-अलग मूल्य के दावे दर्ज किए जाते हैं बीमा राशि कम होनेकी स्थिति में कवरेज सीमा के उल्लंघन की घटनाएं सामने आती हैं इसवजह से जेब से होने वाला खर्च बढ़ जाता है।

दावे के अब तक के अनुभव के मुताबिक पर्याप्त स्वास्थ्य कवरेज का अभावहै विश्लेषण से पता चलता है कि व्यापक कैंसर उपचार को पर्याप्त रूप से शामिल करने के लिए न्यूनतम ₹15-25 लाख की बीमा राशि की ज़रूरत बढ़ रही हैखास तौर पर बीमारी के बढ़ने या लंबे समय तक देखभाल के मामलों में।इसके अलावा व्यापक कवरेज होने से कैंसर के इलाज के दौरान वित्तीय बोझ कम करने में मदद मिलती है। ज़्यादा बीमा राशिनो-क्लेम बोनस के फायदेसब-लिमिट का न होनेबड़े कैशलेस स्वास्थ्य प्रदाता नेटवर्क तक पहुंचसाथ ही गंभीर बीमारियों के लिए विशेष कवर से जेब से होने वाले खर्च को कम करने और इलाज की निरंतरता बनाए रखने में काफी मदद मिलती है

मनीष ने आगे कहा “इस लंबे समय तक विभिन्न चरणों वाले इलाज सेअक्सर मरीज़ों और उनके परिवारों पर लंबे समय तक वित्तीय बोझ पड़ता है। लेकिन अब इलाज के नए-नए तरीके विकसित हो रहे हैंऔर समय के साथ ये अधिक सुलभ भी हो रहे हैंऐसे में यह ज़रूरी है कि उपभोक्ता समय-समय पर अपने स्वास्थ्य बीमा कवरेज का नए सिरे से मूल्यांकन करें और यहसुनिश्चित करें कि इलाज के दौरान पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा हो