दिल्ली (अमन इंडिया) । प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक ज़िया-उस-सलाम की नवीनतम पुस्तक “ए मिनट ए डे: एनर्ज़ाइज़र्स एंड एडमोनिशन्स फ्रॉम द क़ुरआन” का औपचारिक रूप से जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक, जिसे मार्कज़ी मक्तबा इस्लामी, दिल्ली द्वारा प्रकाशित किया गया है, क़ुरआन की चयनित आयतों पर आधारित है और उनसे प्राप्त व्यावहारिक शिक्षाओं को प्रस्तुत करती है।
पुस्तक लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोहतसिम ख़ान ने पुस्तक के प्रकाशन पर ज़िया-उस-सलाम को बधाई दी। पुस्तक की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह पुस्तक अत्यंत परिश्रम और समर्पण के साथ तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि पुस्तक की पहली सीख मानवता को सच्चाई के मार्ग की ओर आमंत्रित करना है। इस पुस्तक में क़ुरआनी शिक्षाओं के आलोक में 365 नसीहतें शामिल की गई हैं। मलिक मोहतसिम ख़ान ने कहा कि यह पुस्तक क़ुरआन से सबक़ हासिल करने का एक सरल और सुलभ माध्यम प्रदान करती है। क़ुरआन मानवता को अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाने का एक महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने आगे कहा कि जब कोई व्यक्ति अल्लाह को भुला देता है तो अल्लाह भी उसे भुला देता है, और अल्लाह को याद रखने का सर्वोत्तम साधन पवित्र क़ुरआन है।
पुस्तक का परिचय कराते हुए ज़िया-उस-सलाम ने कहा कि अल्लाह के निकट होने का सर्वोत्तम तरीका क़ुरआन के साथ निकटता स्थापित करना है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हमें केवल अल्लाह से डरना ही नहीं चाहिए बल्कि उससे प्रेम भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भौतिकवाद हमारे समय की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक है। लोग व्यक्तित्व विकास के लिए अनेक पुस्तकें पढ़ते हैं और जीवन में सफलता के लिए झूठे सहारे तलाश करते हैं, जबकि हमें दूसरों के सामने हाथ फैलाने के बजाय ईश्वर के वचन से ऊर्जा और मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए। लेखक ने आगे कहा कि क़ुरआन के साथ सबसे बड़ा अन्याय यह है कि उसे केवल सजावटी जिल्दों में बंद करके रख दिया जाए। हमें स्वयं को क़ुरआन से जोड़ने की आवश्यकता है क्योंकि यह हमारे जीवन की मार्गदर्शिका है। इससे हम जीवन के लिए नई ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं और चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सकते हैं।
पुस्तक के प्रकाशन पर लेखक को बधाई देते हुए इस्लामी विद्वान इफ्तिख़ार अली हाशमी ने कहा कि क़ुरआन समस्त मानवता के लिए नसीहत का स्रोत है। क़ुरआन अल-ज़िक्र है, जिसे सभी मनुष्यों के मार्गदर्शन के लिए अवतरित किया गया है। यदि कोई व्यक्ति क़ुरआन से दूरी बना लेता है तो वह शैतान के चंगुल में फँस जाता है। पुस्तक की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि क़ुरआन के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए ज़िया-उस-सलाम ने इस पुस्तक को इस प्रकार संरचित किया है कि प्रत्येक सूरह से कम से कम एक आयत और उसके संदेश को इसमें शामिल किया गया है। उन्होंने दुआ की कि अल्लाह इस पुस्तक को स्वीकार्यता प्रदान करे।
अपने समापन वक्तव्य में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के सचिव मौलाना मुहम्मद अहमद ने कहा कि क़ुरआन एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है। यह जीवन के प्रत्येक पहलू में मार्गदर्शन प्रदान करता है और एक न्यायपूर्ण एवं संतुलित जीवन प्रणाली की अवधारणा प्रस्तुत करता है, जिसमें सभी के लिए कल्याण और सफलता निहित है।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने पुस्तक से संबंधित प्रश्न पूछे। छात्रों के साथ-साथ शहर के अनेक सम्मानित नागरिक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। इस पुस्तक की कीमत 380 रुपये है और यह मार्कज़ी मक्तबा इस्लामी पब्लिशर्स के साथ-साथ अमेज़न और अन्य ऑनलाइन बुक स्टोर्स पर उपलब्ध है ।