54 वां आईजीएचएफ दिल्ली मेला- ऑटम 2022



माननीय  राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन मंत्री, मध्यप्रदेश सरकार, मध्य प्रदेश सरकार के अधिकारियों की टीम के साथ किया दौरा


सस्टेनेबल इनोवेशन्स और भारतीय शिल्पियों ने भारत के सतत नवाचार और भारतीय कारीगर शिल्प ने उत्पादों की जीवंत श्रृंखला पेश की

समावेशी पैनल चर्चा ने सस्टेनेबल और उत्तरदायी शिल्प प्रथाओं, रिन्यूएबल और जीरो वेस्टेज पर ज्ञान साझा किया


आगामी सीजन के रुझानों को दर्शाने वाले रैंप शो प्रमुख आकर्षण साबित हुए, उमड़ी भीड़


ग्रेटर नोएडा (अमन इंडिया)। 


16 विस्तृत हॉल में और 12 श्रेणियों में विस्तृत रूप से फैली उत्पाद श्रेणियों के साथ, इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट आयोजित आईएचजीएफ दिल्ली फेयर-ऑटम 2022 अपने परंपरागत सरक्षकों के साथ ही पहली बार मेले में आए व्यवसायिक आगंतुकों को प्रेरित और उत्साहित करना जारी रख रहा है। यहां आने वाले आगंतुक निर्माताओं से मिलते हैं, एक मंच पर इकट्ठा होते हैं, भारत-विभिन्न भौगोलिक स्थानों के साथ देश- भर में फैले शिल्प क्षेत्रों और उत्पादन समूहों के एक क्रॉस सेक्शन से मिलते हैं। निर्माता उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और प्रचुर मात्रा में कच्चे माल के आधार से बने उत्पादों से प्रेरणा लेकर निर्माण करते हैं।


यह मेला इनोवेशन और हैंडीक्राफ्ट फ्यूजन के साथ जीवंत बना हुआ है। सदाबहार क्लासिक्स से लेकर आधुनिकतम प्रभावों तक, संक्रमणकालीन तत्वों से लेकर प्रकृति और रोजमर्रा की जिंदगी से प्रेरित सरल लेकिन आश्चर्यजनक शिल्प जैसे तत्व मेले के आवश्यक पहलू है। आधुनिक, दिशात्मक और असामान्य मध्यम से हाई एंड गिफ्ट और कलेक्टिबल्स में व्यापक विकल्प के साथ, नवीनता, सामग्री, डिजाइन, मूल्यवर्धन, उपयोगिता और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण पर जोर दिया गया है।


आईएचजीएफ दिल्ली मेले में उत्पाद की पेशकशों में सस्टेनेबिलिटी सबसे प्रमुख तत्व है। प्रदर्शकों और आपूर्तिकर्ताओं से पर्यावरण के अनुकूल होम,लाइफ स्टाइल, फैशन, वस्त्र और फर्नीचर उत्पादों में एक बड़ी विविधता है जो एक अधिक सस्टेनेबल और नैतिक भविष्य सुनिश्चित करने के लिए अपनी ओर से प्रयास कर रहे हैं। आज, जबकि भारत में कई स्थापित खिलाड़ियों (निर्माताओं/निर्यातकों) ने सामाजिक और साथ ही पर्यावरण के अनुरुप और उनका अनुपालन करने और उत्तरदायी होने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं, जो प्रमाणित हैं, ऐसे कई कारीगर और निर्माता हैं जिनका व्यवसाय मॉडल की प्राथमिकता सस्टेनेबिलिटी है। वे मेले में, कपास और जूट लाइफस्टाइल के सामान, प्राकृतिक रंगों का उपयोग करते हुए हाथ से पेंट किए गए हस्तनिर्मित शिल्प परिधान, कागज के साथ बेकार कपड़े का उपयोग कर शिल्प, प्रकृति के साइक्लिक परिवर्तनों के दौरान प्राप्त लोटस स्टेम फाइबर से बने फैशन के सामान, अहिंसा (अहिंसक) रेशम स्कार्फ लाए हैं। स्टोल और बैग, रिवर रीड (कौना घास) टेबल एक्सेसरीज़ और बहुउद्देश्यीय बैग, बांस के फ्लास्क और बांस के तिनकों से बना ट्रैवल मग, बेंत और बांस से बने घर की सजावट की वस्तुएं और फर्श की चटाई आदि भी मेले की शोभा बढ़ा रहे है ।


विभिन्न देशों के खरीदार पहले ही इसमें प्रतिभाग कर चुके हैं। अमरीका से आई सारा यहां हैंडबैग, किचन के लिए टेक्सटाइल और महिलाओं के परिधान खरीदने की इच्छुक हैं। उन्होंने साझा किया "हम मेले में आपूर्तिकर्ताओं और उत्पादों के संग्रह को देखकर खुश हैं और हमें यहां उपयोगी व्यावसायिक कनेक्शन मिलने की उम्मीद है। इस साल भारत से हमारा आयात अच्छा दिख रहा है!” इस मेले में तीसरी बार शामिल हो रही है। ऑस्ट्रेलिया की क्रिस्टीन भारत से फैशन के सामान और एंटीक फर्नीचर खरीदती है। उन्होंने कहा, "मेला हमें अद्भुत अवसर प्रदान करता है और हमें यकीन है कि हमारा यहां आकर लगाया गया समय पूरी तरह उत्पादक और उपयोगी होगा।” यूके के डैन हेसम ने कहा कि वह उत्पादों, उनकी गुणवत्ता और उचित मूल्य निर्धारण से प्रभावित हैं।


आज आईएचजीएफ दिल्ली मेले का दौरा मध्यप्रदेश सरकार के औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन मंत्री श्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने किया। उन्होंने ईपीसीएच के अध्यक्ष श्री राज के मल्होत्रा; ईपीसीएच के महानिदेशक और अध्यक्ष, आईईएमएल श्री राकेश कुमार; श्री अवदेश अग्रवाल, प्रेजिडेंट आईएचजीएफ दिल्ली फेयर ऑटम’22 स्वागत समिति; ईपीसीएच के प्रमुख सदस्य निर्यातक; से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने मध्य प्रदेश में विशेष रूप से सूक्ष्म उद्यमों विशेषकर हस्तशिल्प एवं पारम्परिक उत्पाद के लिए व्यापार को बढ़ावा देने के अवसरों का पता लगाने की संभावनाओं पर विचार किया। 


आज आयोजित 'सस्टेनेबिलिटी एंड सर्कुलरिटी - हाउ वेस्ट कैन भी यूटिलाइज्ड टु जेनरेट वैल्यू' विषय पर पैनल चर्चा में सामाजिक उद्यमों के संस्थापकों, अपशिष्ट अप-साइकिलिंग प्रौद्योगिकीविदों के साथ-साथ फैशन फ्रॉम वेस्ट, औद्योगिक अपशिष्ट सामग्री के उपयोग को फिर से तैयार करने ,पारंपरिक शिल्प के ज्ञान और कौशल को आधुनिक सामग्रियों के साथ जोड़ने जैसे मुद्दों को बढ़ावा देने वाले पेशेवर और प्रख्यात वक्ता शामिल हुए। उन्होंने आज के पर्यावरण से संबंधित मुद्दों पर विचार किया और यह भी इंगित किया कि कैसे हस्तशिल्प उद्योग बर्बादी को कम करने के लिए विवेकपूर्ण तरीके से संसाधनों का उपयोग करने में कदम से कदम मिलाकर काम कर सकता है। पैनल ने सर्कुलर इकोनॉमी के महत्व पर चर्चा की, कचरे तक पहुंच और अपशिष्ट आपूर्ति श्रृंखला को समझना, शिल्प के माध्यम से मूल्य बनाने के लिए कचरे का उपयोग करना, अप-साइकिल शिल्प आपूर्ति श्रृंखला , अनौपचारिक श्रमिकों के साथ काम करना, इनोवेशन, में सरकार की भूमिका के साथ ही उपलब्ध विकल्पों पर भी चर्चा की। 'सस्टेनेबल जेड ईडी सर्टीफिकेशन बेनिफिट्स फॉर हैंडीक्राफ्ट्स मैन्यूफेक्चरर्स एंड एस्पोर्टर्स' ; 'कॉन्शस एंड कंटीन्यूअस इंप्रेवमेंट टुवर्ड्स नेट जीरो' विषयक सेमिनारों को वरिष्ठ सलाहकारों ने संचालित किया और इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रतिभाग किया। आने वाले सीज़न के लिए कई नए संग्रह प्रदर्शित करने वाली रैंप प्रस्तुतियां को दर्शकों बहुत प्यार मिला। इस आयोजन ने भीड़ को आकर्षित करना जारी रखा।


इस अवसर पर ईपीसीएच के महानिदेशक और आईईएमएल के चेयरमैन डॉ. राकेश कुमार ने सूचित किया कि ईपीसीएच दुनिया भर के विभिन्न देशों में भारतीय हस्तशिल्प निर्यात को बढ़ावा देने और उच्च गुणवत्ता वाले हस्तशिल्प उत्पादों और सेवाओं के एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में विदेशों में भारत की छवि बनाने के लिए जिम्मेदार एक नोडल संस्थान है। वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान हस्तशिल्प निर्यात 33253.00 करोड़ ( 4459.76 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा, जिसमें बीते वर्ष की तुलना में रुपये के संदर्भ में 29.49% और डॉलर के संदर्भ में 28.90% की वृद्धि दर्ज हुई है।

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