ओमिक्रॉन वेरिएंट से बचाव के लिए सावधानी और सतर्कता है जरूरी : डॉ डीके गुप्ता



नोएडा (अमन इंडिया)। दक्षिण अफ्रीका, हांगकांग, बोस्टवाना में मिले कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। भारत सरकार ने विदेश से आने वाले यात्रियों के लिए एयरपोर्ट पर जांच अनिवार्य किया है।उधर डॉक्टरों ने कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर चेताया है। हालांकि इससे डरने के बजाए सावधानी और सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

फेलिक्स अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डीके गुप्ता ने बताया कि कोरोना के नए वेरिंएट B.1.1529 का पता दक्षिण अफ्रीका में लगा है। ओमक्रॉन वेरिएंट दक्षिण अफ्रीका, बेल्जियम, हांगकांग, बोत्सवाना समेत दूसरे देशों में बड़ी ही तेजी से फैल रहा है। यह डेल्टा वेरिएंट्स से खतरनाक है। वैज्ञानिक जांच में ओमिक्रॉन में 30 से ज्यादा म्यूटेशन मिले हैं जबकि डेल्टा वेरिएंट में करीब 15 म्यूटेशन मिले थे, इसलिए यह डेल्टा से बहुत ज्यादा संक्रामक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी इसे वेरिएंट ऑफ कंसर्न की कैटेगरी में डाला है। इसे कोरोना का अब तक का सबसे ज्यादा म्यूटेटेड वर्जन कहा जा रहा है। इसलिए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। डॉ. गुप्ता का कहना है कि वैक्सीन की इम्युनिटी पर निर्भर न रहें।आशंका है कि कहीं यह नया वेरिएंट वैक्सीन से मिली रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हावी न हो जाए या वैक्सीन इस वायरस पर कारगर ही न हो हालांकि, अच्छी बात यह है कि कोविड के इस नए वेरिएंट का आरटीपीसीआर के जरिए पता लगाया जा सकता है।

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इन बातों पर करना होगा गौर

-15 दिसंबर से शुरू होने जा रही अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर केंद्र सरकार को फिर से विचार करना होगा।

-कोरोना के नए वेरिंएट से जूझ रहे देशों के यात्रियों की आवाजाही एक माह के लिए बंद कर देनी चाहिए ।

-सरकार, डॉक्टर्स, हेल्थकेयर समेत दूसरे जिम्मेदार लोगों को मिलकर इससे बचने की प्लानिंग बनानी चाहिए।

-डॉक्टर्स फ्रंटलाइन और हेल्थ केयर वर्कर्स को दोनों डोज लगे हुए आठ-नौ माह में बीत चुके है। इससे उनकी इम्यूनिटी कम हुई होगी, इसलिए सबसे पहले बूस्टर डोज उन्हें दिए जाने चाहिए।

-बूस्टर डोज के लिए वैक्सीन में बदलाव होना चाहिए उदाहरण के लिए जिन लोगों को कोविशील्ड का पहला और दूसरा टीका लगाया गया है, उन्हें कोवैक्सीन का बूस्टर डोज दिया जाना चाहिए।

-ओमिक्रॉन से लड़ रहे देशों को अच्छे तालमेल की जरूरत है ताकि बेहद खतरनाक माने जा रहे इस वेरिंएट से बचने के रास्ते समय रहते तैयार किए जा सके।

-विदेश से लौटे व्यक्ति पर नजर रखी जाए। उन्हें क्वारंटाइन अवधि पूरा करने को कहा जाए। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो।

-कोरोना के लक्षण दिखने पर संदिग्द व्यक्ति की जांच की जाए। संक्रमिक व्यक्ति के संपर्क में आए लोग को क्वारंटाइन करने जांच की जाए। कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग बढ़ाई जाए।

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