फिलिप्स इंडिया स्लीप सर्वे 2021 में सामने आया कि भारतीय व्यस्कों ने कोविड-19 महामारी के दौरान ज्यादा नींद ली



नई दिल्ली (अमन इंडिया)। हैल्थ टेक्नॉलॉजी में ग्लोबल लीडर, रॉयल फिलिप्स (एनवाईएसईः पीएचजी, एईएक्सः पीएचआईए) ने आज इंडिया स्लीप सर्वे रिपोर्ट के परिणाम जारी किए। इसका शीर्षक ‘फिलिप्स ग्लोबल स्लीप सर्वे 2021’ है। वर्ल्ड स्लीप डे 2021 से पहले जारी की गई यह रिपोर्ट नींद की सेहत पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव एवं महामारी के कारण डिजिटल हैल्थ टेक्नॉलॉजी अपनाने में हुई वृद्धि पर केंद्रित है। डिजिटल हैल्थ टेक्नॉलॉजी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, 60 प्रतिशत भारतीयों ने बताया कि वो नींद से संबंधित समस्याओं के लिए टेलीहैल्थ का उपयोग कर चुके हैं और आगे भी करेंगे।

इस रिपोर्ट में सामने आया कि कोविड-19 महामारी की शुरुआत से, भारतीय व्यस्क नींद की नई चुनौतियों, जैसे नींद आने में परेशानी (37 प्रतिशत), सोते रहने में मुश्किल (27 प्रतिशत) और रात में जाग जाने (39 प्रतिशत) का सामना कर रहे हैं।

यह सर्वे मरीजों पर स्लीप एप्निया के बुरे प्रभावों पर भी केंद्रित था। अध्ययन में सामने आया कि स्लीप एप्निया से पीड़ित 80 प्रतिशत मरीज दिन में नींद का अनुभव करते हैं, जबकि जिन्हें स्लीप एप्निया नहीं है, ऐसे 52 प्रतिशत लोगों को ऐसा अनुभव होता है। 47 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि स्लीप एप्निया उनके संबंधों को प्रभावित कर रही है। दिन में अनपेक्षित नींद आने एवं ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल होने जैसे लक्षणों के साथ स्लीप एप्निया उत्पादकता एवं जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। स्लीप एप्निया से स्वास्थ्य की गंभीर समस्याएं जैसे दिल की बीमारी, हृदयाघात, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा आदि हो सकते हैं, जो विस्तृत रूप से संदर्भित क्लिनिकल शोध पत्रों में देखा गया है।

फिलिप्स ने अपने केयर ऑर्केस्ट्रेटर स्लीप एवं रेस्पिरेटरी केयर मैनेजमेंट सिस्टम के लॉन्च की भी आज घोषणा की। यह सिस्टम क्लिनिशियंस एवं हैल्थकेयर संस्थानों को सिंगल सिस्टम द्वारा दूर से निगरानी एवं स्लीप एप्निया व श्वास के मरीजों के प्रबंधन के साथ स्वास्थ्य के बेहतर परिणाम प्रस्तुत करने में समर्थ बनाता है।

क्षितिज कुमार, बिज़नेस लीडर, प्रेसिज़न डायग्नोस्टिक्स एवं कनेक्टेड केयर, फिलिप्स भारतीय उपमहाद्वीप ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी का हर किसी के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। हर कोई नई जीवनशैली का अभ्यस्त हो रहा है। इसलिए हैल्थकेयर प्रदाता एवं मरीज, दोनों ही हैल्थकेयर की आपूर्ति में परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डिजिटल टेक्नॉलॉजी, जैसे नींद संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए टेलीहैल्थ को अपनाने में मरीज की ओर से होने वाली वृद्धि एक सकारात्मक पहल है, जिसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। फिलिप्स केयर ऑर्केस्ट्रेटर स्लीप एवं रेस्पिरेटरी केयर मैनेजमेंट सिस्टम ऐसा ही एक अत्याधुनिक समाधान है, जो हैल्थकेयर संस्थानों एवं प्रैक्टिशनर्स को सिंगल सिस्टम द्वारा अपने सभी स्लीप एप्निया एवं श्वास के मरीजों की दूर से निगरानी एवं प्रबंधन करने में समर्थ बनाएगा। हम अगले दशक में प्रवेश कर रहे हैं, फिलिप्स एक ऐसे भविष्य का निर्माण करने पर केंद्रित है, जिसमें नींद के संपूर्ण परिवेश में टेक्नॉलॉजी का उपयोग कर लोगों को अपने जीवन की पूरी गुणवत्ता प्राप्त करने में मदद की जा सके।

डॉक्टर जेसी सूरी, डायरेक्टर एवं हेड, डिपार्टमेंट ऑफ पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसीन, फोर्टिस फ्लाईट लेफ्टिनेंट, राजन ढल हॉस्पिटल, वसंत कुंज, नई दिल्ली एवं फाउंडर, प्रेसिडेंट और चेयरमैन, इंडियन स्लीप डिसऑर्डर एसोसिएशन ने बताया, ‘‘स्लीप हमारे दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण तत्व है। इसका हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है। नींद की समस्याओं जैसे स्लीप एप्निया के बारे में पिछले दशक में जागरुकता में स्थिर रूप से सुधार हुआ है। हालांकि, हमें अभी भी इस समस्या के निदान और इलाज की दिशा में गंभीरता बढ़ाने के लिए लंबी दूरी तय करनी है। फिलिप्स जैसे ब्रांड एवं डॉक्टर समुदाय इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ब्रांड्स लोगों को स्लीप एप्निया के लिए जागरुक बनाने के लिए काम करते हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि फिज़िशियंस को नींद की बीमारियों, खासकर स्लीप एप्निया की जाँच, निदान एवं इलाज की सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। तभी हम भारत में नींद संबंधी सेहत में महत्वपूर्ण सुधार ला सकेंगे।

अपने पूर्ण अभियानों के तहत नींद की समस्याओं, खासकर स्लीप एप्निया के समाधान के लिए फिलिप्स ने अक्टूबर 2020 में श्रेणी के प्रथम छः माह के ऑनलाईन सर्टिफाईड कंप्रेहेंसिव स्लीप मेडिसीन कोर्स के लॉन्च की घोषणा की। यह कोर्स एकेडमी ऑफ पल्मोनरी क्रिटिकल केयर एवं स्लीप मेडिसीन (एपीसीसीएसएम) के सहयोग एवं इंडियन स्लीप डिसऑर्डर एसोसिएशन (आईएसडीए) के तत्वाधान में आयोजित किया जा रहा है। स्लीप केयर में मेडिकल शिक्षा की कमी को पूरा करने के लिए डिज़ाईन किए गए इस कोर्स का पहला बैच 2 मार्च, 2021 को शुरू हुआ, जिसमें 70 से ज्यादा डॉक्टर्स को डॉक्टर जे. सी. सूरी के सक्षम मार्गदर्शन में प्रशिक्षित किया जा रहा है। फिलिप्स ने अक्टूबर 2020 में एक समर्पित स्लीप हैल्पलाईन (1800 258 7678) एवं होम स्लीप टेस्ट सॉल्यूशन भी लॉन्च किया है, ताकि नींद की समस्याओं से पीड़ित मरीजों को केयर की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।

कंपनी ने 500 से ज्यादा स्लीप तकनीशियनों को प्रशिक्षित किया है और देश में आज तक 850 से ज्यादा स्लीप लैब्स के लॉन्च का मागदर्शन किया है।

उद्योग के नेतृत्वकर्ता एवं स्लीप और रेस्पिरेटरी केयर में इनोवेटर के रूप में, फिलिप्स क्लिनिकली प्रमाणित समाधानों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है, जो नींद की सेहत को नियंत्रित करने में लोगों की मदद कर सकें। फिलिप्स का उद्देश्य ऐसे समाधान प्रदान करना है, जो उपभोक्ताओं एवं हैल्थकेयर प्रोफेशनल्स की विकसित जरूरतों को पूरा कर सकें। क्वालिटी, एक्सेसिबल एवं वैल्यू-बेस्ड केयर पर केंद्रित रहते हुए कंपनी स्लीप एवं रेस्पिरेटरी समाधानों की रेस्पायरोनिक्स श्रृंखला के तहत अपने उत्पादों पर ‘नो-कॉस्ट ईएमआई’ भी प्रदान कर रही है।



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