डा रागिनी नायक राष्ट्रीय प्रवक्ता कांग्रेस ने वोट बचाओ देश बचाओ अभियान को लेकर प्रेस वार्ता की




नोएडा (अमन इंडिया ) । डा रागिनी नायक राष्ट्रीय प्रवक्ता AICC पर्यवेक्षक द्वारा महानगर कांग्रेस कमेटी नोएडा के सैक्टर 52 स्थित पार्टी कार्यालय पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि हम तो पहले ही कहते थे कि ‘चौकीदार चोर है’ और अब चोर रंगे हाथों पकड़ा गया है। वोट चोरी के खिलाफ़ लगभग दो साल पहले जो अलख नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी ने आलंद, महादेवपुरा, हरियाणा, कर्नाटक में हुई वोटों की धांधली का पर्दाफ़ाश कर के जगाया था, उसकी पुष्टि 2 चुनाव आयुक्तों के 14 शिकायती पत्रों ने कर दी। लोकतंत्र और संविधान पर कुठाराघात करने वाले, जनादेश को लूट कर देश गद्दारी करने वालों की ईंट से ईंट बजाने का प्रण राहुल गॉंधी जी और कांग्रेस के हर संघर्ष के साथी ने लिया है। इसकी शुरुआत ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े से होगी।


मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूँ कि ‘सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना कांग्रेस का मक़सद नहीं..हमारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए’। ‘वोट चोरी’ को बंद करने वाला हर रास्ता हम खोलना चाहते हैं इसीलिए जहॉं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 12-13 साल में एक प्रेस वार्ता करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए, वहॉं लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के साथ ‘वोट-चोरी’ के मद्दे पर ही 12-13 प्रेस वार्ताएँ राहुल जी ने कीं। संसद में मुद्दा उठाया, सड़क पर संघर्ष किया, राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया - हर संभव कोशिश की और अब कांग्रेस पार्टी - ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ नाम से देश-व्यापी अभियान चला रही है जिसकी रूप-रेखा मैं आपको बताने वाली हूँ। उससे पहले कुछ तथ्य आपके सामने रखना चाहती हूँ।


1.वोट चोरी एक व्यापक मुद्दा है, SIR समस्या का केवल एक हिस्सा है

वोट चोरी का मुद्दा केवल मौजूदा SIR प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। कांग्रेस ने कई चुनावों के दौरान मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने, दोहरे पंजीकरण, चुनाव संबंधी आँकड़ों में पारदर्शिता, EVM और VVPAT की कार्यप्रणाली तथा चुनाव आयोग के आचरण पर लगातार सवाल उठाए हैं।

मूल सवाल यह है कि क्या हर नागरिक अपने संवैधानिक मताधिकार का प्रयोग क्यों नहीं कर सकता है और क्या चुनाव एक निष्पक्ष संस्था की निगरानी में कराए जा रहे हैं?


2. राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस

राहुल गांधी और कांग्रेस ने कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाने के लिए बार-बार निर्वाचन क्षेत्र के स्तर के आँकड़े और चुनावी तुलनाएँ सार्वजनिक की हैं। इसमें 7 फरवरी 2025 को महाराष्ट्र में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस, 7 अगस्त 2025 को महादेवपुरा से जुड़े आँकड़ों की प्रस्तुति, सितंबर 2025 में आलंद से जुड़े आरोप, नवंबर 2025 में हरियाणा से जुड़े आरोप और सितंबर 2026 में चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों के खुलासे के बाद उठाए गए सवाल शामिल हैं।


‘वोट-चोरी’ का प्रकरण SIR से शुरू हुआ मुद्दा नहीं, बल्कि आँकड़ों, सार्वजनिक जाँच-पड़ताल और संस्थागत जवाबदेही के माध्यम से जवाब माँगने की एक निरंतर कोशिश है।


3. महाराष्ट्र और मतदाताओं की संख्या में अचानक वृद्धि पर सवाल

7 फरवरी 2025 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं सुप्रिया सुले और संजय राउत के साथ 2024 के लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बीच लगभग 39 लाख मतदाताओं के जुड़ने पर सवाल उठाए। इसके मुकाबले, पिछले पाँच वर्षों में लगभग 32 लाख मतदाता जुड़े थे।

कांग्रेस ने माँग की कि बताया जाए कि ये अतिरिक्त मतदाता कौन थे, उनका पंजीकरण कब हुआ और इतने कम समय में संख्या में इतनी तेज़ वृद्धि क्यों हुई। इस अंतर के आधार पर पारदर्शी और मशीन-पठनीय मतदाता आँकड़े उपलब्ध कराने की माँग की गई।


4. महादेवपुरा: वोट चोरी के तरीके

7 अगस्त 2025 को राहुल गांधी ने बेंगलुरु सेंट्रल के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र का विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया कि पाँच प्रकार की अनियमितताओं के कारण 1,00,250 वोट प्रभावित हुए। इनमें दोहरा पंजीकरण, अमान्य या संदिग्ध तस्वीरें, फॉर्म 6 का दुरुपयोग और अन्य संदिग्ध प्रविष्टियाँ शामिल थीं।

उन्होंने कहा कि इन निष्कर्षों के आधार पर मतदाता सूची की शुद्धता की व्यापक जाँच होनी चाहिए।


5. हरियाणा, आलंद और अन्य निर्वाचन क्षेत्र: सत्यापन योग्य आँकड़ों की माँग

इसके बाद कांग्रेस ने हरियाणा में दोहरे मतदाताओं और मतदाता सूची की संदिग्ध प्रविष्टियों तथा कर्नाटक के आलंद में नाम हटाने के कथित प्रयासों को लेकर सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने ऐसे सॉफ़्टवेयर टूल के कथित रूप से बंद किए जाने पर भी सवाल किया, जिसका उद्देश्य तस्वीरों और जनसांख्यिकीय विवरणों में समानता के आधार पर संदिग्ध मतदाता प्रविष्टियों की पहचान करना था।

कांग्रेस की माँग स्पष्ट रही है: मूल आँकड़े उपयोग योग्य डिजिटल प्रारूप में उपलब्ध कराए जाएँ, नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया का खुलासा हो और राजनीतिक दलों तथा नागरिकों को केवल आश्वासनों पर निर्भर रहने के बजाय स्वतंत्र रूप से सत्यापन करने का अवसर मिले।


6. द इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल और चुनाव आयोग के भीतर से उठी आपत्तियाँ

25 सितंबर 2026 को प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की एक अहम पड़ताल में बताया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने लगभग दस महीनों के दौरान कम-से-कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्तियाँ दर्ज कराईं। इनमें फॉर्म 6 से जुड़ी आपत्तियाँ भी शामिल थीं।

रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों का संबंध ऐसे फैसलों से था जो उनकी जानकारी के बिना लिए गए, ख़ास तौर पर फॉर्म 6 से संबंधित, मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने, मतदाता सूची के डेटाबेस तक पहुँच, मतदाता आँकड़ों के केंद्रीकरण और प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ़्टवेयर की विश्वसनीयता से जुड़ी चिंताओं से था।


7. SIR के आँकड़े क्या उजागर करते हैं?

रिपोर्ट के अनुसार, जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में रिपोर्ट तैयार किए जाने तक SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी या जिस चरण को रिपोर्ट में शामिल किया गया था, वहाँ 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए थे।

पश्चिम बंगाल में तार्किक विसंगतियों के आधार पर चिह्नित लगभग 60 लाख मतदाताओं के मामलों के निपटारे में सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद लगभग 27 लाख नाम हटाए गए, जबकि न्यायाधिकरणों के समक्ष अपीलों की संख्या लगभग 38 लाख तक पहुँच गई थी।


दिल्ली में तो हर तीसरे वोटर का नाम चुनाव आयोग की सूची से ग़ायब है।SIR से पहले दिल्ली में 1.45 करोड़ वोटर थे, और आयोग ने इनमें से 47,56,722 नाम ASDD श्रेणी में काट दिए, जो पूरी सूची का 32.78 प्रतिशत है। कटे हुए और शक के घेरे में डाले गए नाम मिलाकर 79.2 लाख हो जाते हैं, यानी दिल्ली के 54.6 प्रतिशत वोटर।

8. RSS-BJP की प्रतिक्रिया क्या रही?

जब भी कांग्रेस ने चुनावी अनियमितताओं पर सवाल उठाए, राजनीतिक प्रतिक्रिया में आरोपों को खारिज करने, साक्ष्यों पर सवाल उठाने या राहुल गांधी से अपने दावों को प्रमाणित करने की माँग करने पर ज़ोर दिया गया।

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे - महादेवपुरा विवाद में कर्नाटक के चुनाव अधिकारियों ने विशिष्ट विवरण और हस्ताक्षरित घोषणा-पत्र माँगा। चुनाव आयोग ने भी इस दावे को खारिज किया कि ऑनलाइन नाम हटाने के अनुरोधों के आधार पर उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं।


जब भी चुनाव आयोग से सवाल पूछे जाते हैं या मुख्य चुनाव आयुक्त को कठघरे में खड़ा किया जाता है तो भाजपा प्रवक्ता बचाव में प्रेस वार्ता करने आ जाते हैं क्योंकि चोर-चोर मौसेरे भाई !


पर इस सब के बावजूद वो कहते हैं ना,

हिम्मत रख कुछ कर गुजरने की

बंजर ज़मीन ले फल निकलेगा

जिंदा रख दिल में उम्मीदों को

मरुस्थल से भी जल निकलेगा


‘वोट चोरी’ का पर्दाफाश करते हुए राहुल गॉंधी लगातार Machine Readable Digital Voter List की माँग कर रहे थे..चुनाव आयोग ने खुल कर विरोध किया..भाजपाइयों ने मज़ाक उड़ाया लेकिन आखिरकार घुटने टेकने पड़े..अब चुनाव आयोग को राजनैतिक दलों को Machine Readable Digital Voter List

 देनी पड़ेगी।


9.ज्ञानेश कुमार: संस्थागत जवाबदेही का सवाल

इस विवाद के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी बन गए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि आयोग ने इस तरह काम किया है, जिससे उसकी स्वतंत्रता और सार्वजनिक विश्वसनीयता कमजोर हुई है।

सितंबर 2026 की पड़ताल के बाद राहुल गांधी ने RSS-BJP और चुनाव आयोग पर अपने आरोप दोहराए, जबकि कांग्रेस नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और व्यापक जाँच की माँग की।

मतदाताओं के सामने मूल सवाल यह है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार संवैधानिक संस्था क्या पूरी पारदर्शिता बरत रही है और मतदाता सूची के प्रबंधन से जुड़े गंभीर सवालों का स्वतंत्र रूप से जवाब दे रही है।


10.मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून ने सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के फैसले में निर्धारित चयन व्यवस्था को बदल दिया।

पहले की अंतरिम व्यवस्था के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल थे। 2023 के कानून के तहत मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया। इस बदलाव से सरकार को ऐसी संस्था की नियुक्तियों पर अधिक प्रभाव मिल जाता है, जिसे स्वतंत्र रूप से सरकार के चुनावी आचरण की जाँच करनी चाहिए।


11.2023 का कानून और चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण

इसी कानून के तहत धारा 16 लागू की गई, जो मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त के पद पर रहे किसी व्यक्ति के आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए या किए जाने का दावा किए गए कार्य के लिए दीवानी या आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाती है।

कांग्रेस इस प्रावधान की आलोचना करती है क्योंकि यह आजीवन संरक्षण प्रदान करता है और जवाबदेही को कमजोर करता है।

कांग्रेस की राजनीतिक माँग यह है कि चुनाव आयुक्तों की स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले सुरक्षा उपाय हों, लेकिन वैध आधिकारिक आचरण को सार्थक जवाबदेही से पूरी तरह बाहर न रखा जाए।

12.कांग्रेस का अभियान

कांग्रेस का अभियान अब प्रेस कॉन्फ्रेंस और संसद में उठाए गए सवालों से आगे बढ़ चुका है।

AICC के परिपत्र में 2 से 8 अक्टूबर 2026 तक “लोकतंत्र बचाओ सप्ताह” आयोजित करने, इसके बाद ब्लॉक स्तर पर मार्च और रैलियाँ निकालने, दशहरे के दौरान जनसंपर्क करने तथा “वोट बचाओ – देश बचाओ” अभियान चलाने का उल्लेख है।

इन कार्यक्रमों का उद्देश्य चुनावी निष्पक्षता से जुड़े सवालों को देशव्यापी जनआंदोलन में बदलना है। इसके तहत ज़िला इकाइयों को स्थानीय शिकायतों का दस्तावेज़ीकरण करने और नागरिकों को उनके मताधिकार की रक्षा के लिए संगठित करने की जिम्मेदारी दी गई है।

13.राहुल गांधी और INDIA गठबंधन का विरोध प्रदर्शन

अक्टूबर की शुरुआत में INDIA गठबंधन के सांसदों और नेताओं ने दिल्ली की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया। चुनाव आयोग की ओर मार्च करते समय पुलिस बैरिकेडिंग के कारण उन्हें रोक दिया गया।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने आकाशवाणी भवन के पास अचानक धरना दिया। इसके बाद विंडसर प्लेस के निकट विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा हुआ तथा राजघाट पर मौन प्रदर्शन किया गया।

9 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और मुख्य चुनाव आयुक्त, 2023 के कानून, SIR तथा चुनावी निष्पक्षता से जुड़ी चिंताओं पर ज्ञापन सौंपा।


14.कांग्रेस का देशव्यापी जन-अभियान

AICC के परिपत्र में “वोट बचाओ – देश बचाओ” अभियान के अगले चरणों का उल्लेख है। इनमें 25 अक्टूबर को ज़िला और राज्य स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस, “वोट रक्षक” के माध्यम से बूथ स्तर पर मतदाता सूची का सत्यापन, 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक गाँवों में चौपालें और 1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन के सहयोगियों के साथ एक विशाल राष्ट्रीय रैली शामिल है।

इसके अतिरिक्त “दिल्ली चलो” कार्यक्रम के तहत विभिन्न राज्यों से यात्राएँ निकालकर 25–26 नवंबर को दिल्ली पहुँचने का आह्वान किया गया है।

15.कांग्रेस की माँगें

29 सितंबर 2026 को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) द्वारा अपनाया गया रुख पार्टी की एकजुट माँगों का आधार है।

कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR को स्थगित करने, मतदाता सूचियों से हटाए गए उन 13.3 करोड़ नामों को बहाल करने की माँग की है, जिन्हें हटाए जाने का आरोप पार्टी ने लगाया है, और गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र तथा समयबद्ध जाँच कराने की माँग की है।

पार्टी ने कथित व्यापक साज़िश को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी माँग की है। ये कांग्रेस की घोषित राजनीतिक माँगें हैं।

अनुच्छेद 326 के तहत मतदान का अधिकार एक संवैधानिक गारंटी है! ‘वोट-चोरी’ देशद्रोह से कम नहीं।प्रत्येक पात्र मतदाता के अधिकार की रक्षा के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और जन-जागरूकता आवश्यक है।मैं नोएडा महानगर के हर नागरिक से अनुरोध करती हूँ कि आइए हमारे साथ 

एक कदम बढ़ाइए

वोट चोरी के खिलाफ़

तानाशाही के खिलाफ़

पुलिस की बर्बरता के खिलाफ़

एक कदम बढ़ाइए

लोकतंत्र के लिए

संविधान के लिए

Right To Protest के लिए


आज की प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री दीपक कुमार,जिला अध्यक्ष दीपक भाटी, महानगर अध्यक्ष मुकेश यादव, दिनेश अवाना, पवन शर्मा, शहाबुद्दीन, सतेंद्र शर्मा, लियाकत चौधरी, फिरे सिंह नागर, यतेंद्र शर्मा, निशा शर्मा, संजय तनेजा,चरण सिंह यादव, कैप्टन पी एस रावत, गौतम अवाना, जावेद खान, दयाशंकर पांडेय, संदीप सिसोदिया, वीरो देवी, मधुराज, मुकेश शर्मा, रामकुमार शर्मा, मजहर हुसैन, उदयवीर यादव, वसीम खान सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे ।