फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा ने एडवांस रोबोटिक सर्जरी की मदद से 32-वर्षीय मरीज के दुर्लभ किस्म के जननांग कैंसर का किया सफल उपचार



रोबोट असिस्टेड कीहोल प्रक्रिया की मदद से कैंसरग्रस्त लिंफ नोड्स को सावधानीपूर्वक सटीकता से निकाला गया जबकि पारंपरिक ओपन सर्जरी के साथ जोखिम जुड़े होते हैं

नोएडा (अमन इंडिया ) । फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा ने कीहोल प्रोसिजर जिसे रोबोटिक वीईआईएल रोबोट-असिस्टेड वीडियो एंडोस्कोपिक इंजिनल लिंफडेनेक्टोमी कहा जाता है और यह मिनीमॅली इन्वेसिव तकनीक होती है, की मदद से 32-वर्षीय मरीज के कैंसरग्रस्त ग्रॉइन लिंफ नोड्स को सफलतापूर्वक निकाला है। उक्त मरीज पेनाइल कैंसर (लिंग के कैंसर) से ग्रस्त थे। इस जटिल मामले का प्रबंधन डॉ शैलेन्द्र कुमार गोयल, डायरेक्टर ऑफ यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट, फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा के नेतृत्व में गठित टीम ने किया।

मरीज को बार-बार मूत्र मार्ग में संक्रमण और फिमोसिस (इसमें लिंग की ऊपरी त्वचा, जिसे फोरस्किन कहते हैं, पूरी तरह से पीछे नहीं हट पाती) की समस्या रहती थी। अस्पताल में उनकी जांच से पेनाइल कैंसर की पुष्टि हुई, और इमेजिंग जांच से पता चला कि उनका रोग सिंगल ग्रॉइन लिंफ नोड तक फैल चुका था, हालांकि दूर के अंगों में मेटास्टेसिस का कोई प्रमाण नहीं मिला था। पेनाइल कैंसर एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर रोग है जो दुनियाभर में पुरुषों में कैंसर के 1% से भी कम मामलों में पाया जाता है, और इसे आमतौर से 55 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में देखा गया है। लेकिन उक्त मरीज की उम्र कम थी और इस वजह से यह मामला असामान्य था। फिमोसिस को पेनाइल कैंसर के जोखिम कारक के तौर पर देखा जाता है और इसकी वजह से क्रोनिक इंफ्लेमेशन तथा जलन की समस्या हो सकती है।

फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा की मेडिकल टीम ने एडवांस दा विंची Xi रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम की सहायता से पांच घंटे चली प्रक्रिया के दौरान मरीज की जांघ में मामूली चीरे लगाकर प्रभावित लिंफ नोड तक पहुंच बनायी। मरीज के पैर में एक सुरक्षित फ्लोरेसेंट डाइ (आईसीजी) डालकर, डॉक्टरों ने एक स्पेशल कैमरा स्क्रीन पर उनके शरीर में मौजूदा ड्रेनेज मार्गों की पहचान करने के उपरांत कैंसरग्रस्त ऊतकों को निकाला और इस पूरी प्रक्रिया में उनकी रक्त धमनियों को सुरक्षित रखा गया। पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में, जिसमें गहरे कट लगाने की जरूरत होती है और त्वचा को पहुंचने वाली क्षति तथा घाव में संक्रमणों की आशंका के चलते अधिक जोखिम भी होता है, रोबोट-असिस्टेड कीहोल सर्जरी से त्वचा में किसी प्रकार की कोई जटिलता नहीं पैदा हुई और सर्जरी के केवल चार ही दिनों के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई।

इस दुर्लभ किस्म के कैंसर रोग के उपचार में मिली इस सफलता ने एक बार फिर फोर्टिस हॉस्पीटल, नोएडा की क्लीनिकल इनोवेशन के मामले में प्रतिबद्धता को उभारा है और साथ ही, यह भी प्रदर्शित किया है कि सुरक्षित, बेहद कारगर तथा मिनीमॅली इन्वेसिव कैंसर केयर उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल में किस हद तक उन्नत टेक्नोलॉजी तथा मेडिकल विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाता है।

इस मामले की जानकारी देते हुए डॉ शैलेन्द्र कुमार गोयल डायरेक्टर – यूरोलॉजी एंड किडनी ट्रांसप्लांट फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा ने कहा 32-वर्षीय युवक में पेनाइल कैंसर का मामला काफी असामान्य है। और उस पर ग्रॉइन लिंफ नोड के भी कैंसरग्रस्त होने से यह मामला काफी पेचीदा था। हमारी प्राथमिकता प्रभावित लिंफेटिक टिश्यू को पूरी तरह से इस प्रकार निकालने की थी ताकि कैंसर उपचार के लक्ष्यों के साथ कोई समझौता न हो, और साथ ही, मरीज को कम से कम सर्जिकल ट्रॉमा हो। रोबोटिक सिस्टम ने बेहतर विजुअलाइज़ेशन और सटीक तरीके से उपचार करने में मदद पहुंचायी, जिसके चलते सर्जिकल टीम ने आसपास की धमनियों तथा ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बगैर मामूली चीरे लगाकर ही प्रभावित लिंफ नोड्स को निकाला। इस मामले ने यह प्रदर्शित किया है कि किस तरह से सावधानीपूर्वक चुनी गई जटिकल कैंसर सर्जरी के मामलों में रोबोटिक टेक्नोलॉजी जख्मों से जुड़ी जटिलताओं से बचाव करने के साथ-साथ अस्पताल में ठहरने की अवधि को कम करते हुए तेजी से रिकवरी में भी मदद करती है।”

मोहित सिंह, ज़ोनल डायरेक्टर फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा ने कहा “फोर्टिस हॉस्पीटल नोएडा में हमारा लक्ष्य यह रहता है कि हम नई मेडिकल टेक्नोलॉजी और बेहतरीन सर्जिकल दक्षता का मेल कराते हुए वर्ल्ड-क्लास क्लीनिकल केयर उपलब्ध कराएं। इस जटिल, रोबोट-असिस्टेड प्रक्रिया को पूरा करना वास्तव में, हाइ-एंड सर्जिकल ओंकोलॉजी को उन्नत बनाने की हमारी प्रतिबद्धता का सूचक है। अपनी क्लीनिकल टीमों को हमने कई अत्याधुनिक प्लेटफार्मों जेसे दा विंची XI सिस्टम से सुसज्जित किया है ताकि हमारे मरीजों को सुरक्षित उपचार मिल सके और उन्हें त्वरित रिकवरी का लाभ मिले तथा वे बेहतर स्वास्थ्य परिणाम हासिल कर सकें।