नोएडा/एनसीआर (अमन इंडिया ) । नया वर्ष दुनिया की विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों में नई शुरुआत, आशा और आत्म-सुधार का प्रतीक माना जाता है। इस्लाम, हिंदू धर्म और ईसाई धर्म में नव वर्ष अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है, लेकिन सभी का संदेश सकारात्मक जीवन और अच्छे कार्यों की ओर बढ़ना है।
इस्लामी नव वर्ष मुहर्रम महीने की पहली तारीख से शुरू होता है। इस्लामी कैलेंडर चाँद की गति पर आधारित है, इसलिए इसकी तारीख हर वर्ष बदलती रहती है।हिजरी कैलेंडर की शुरुआत पैगंबर हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मक्का से मदीना हिजरत (प्रवास) की ऐतिहासिक घटना से मानी जाती है। यही कारण है कि इसे "हिजरी कैलेंडर" कहा जाता है।
इस्लामी नव वर्ष मुसलमानों को अपने जीवन का आत्ममंथन करने, गलतियों को सुधारने और अच्छे कार्यों का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है।मुहर्रम इस्लाम के सबसे पवित्र महीनों में से एक है। इस महीने में इबादत, दुआ और नेक कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
मुहर्रम की 10वीं तारीख को "यौम-ए-आशूरा" कहा जाता है। इस दिन रोज़ा रखना बहुत पुण्य का कार्य माना जाता है। हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भी आशूरा का रोज़ा रखा और इसकी प्रेरणा दी।
मुहर्रम का महीना हज़रत इमाम हुसैन (रज़ियल्लाहु अन्हु) की महान कुर्बानी की भी याद दिलाता है। वे हज़रत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) के पुत्र और हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के नवासे थे।
10 मुहर्रम को Battle of Karbala में उन्होंने सत्य और न्याय की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी कुर्बानी आज भी हमें अन्याय के सामने न झुकने और सत्य का साथ देने की प्रेरणा देती है।हिंदू धर्म में नव वर्ष को अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न नामों से मनाया जाता है, जैसे नव संवत्सर, गुड़ी पड़वा और उगादी।
उत्तर भारत में हिंदू नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है, जिसे विक्रम संवत् का पहला दिन माना जाता है। विक्रम संवत् की शुरुआत महान सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ी मानी जाती है और यह अंग्रेजी कैलेंडर से लगभग 56-57 वर्ष आगे चलता है।ईसाई धर्म और दुनिया के अधिकांश देशों में नया वर्ष 1 जनवरी को मनाया जाता है। यह ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है। इस अवसर पर लोग नए संकल्प लेते हैं और आने वाले वर्ष के लिए शुभकामनाएँ देते हैं।
इस्लामी, हिंदू और ईसाई नव वर्ष की परंपराएँ भले ही अलग हों, लेकिन उनका मूल संदेश एक ही है नई शुरुआत, आत्म-सुधार, अच्छे कार्य और मानवता की सेवा।इस्लामी नव वर्ष हमें हिजरत, मुहर्रम की पवित्रता, आशूरा के रोज़े और कर्बला के महान बलिदान की याद दिलाता है। वहीं हिंदू नववर्ष विक्रम संवत् की समृद्ध परंपरा और नए आरंभ का संदेश देता है।
नया वर्ष हमें यह अवसर देता है कि हम अपने जीवन को बेहतर बनाएं, समाज में प्रेम और भाईचारा बढ़ाएं तथा सत्य, न्याय और सद्भाव के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।सैय्यद शमीम अनवर संरक्षक साइम एजुकेशनल ट्रस्ट ने प्रेस रिलीज देकर जानकारी दी ।