महर्षि महेश योगी संस्थान की जमीनों की अवैध बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट सख्त SIT गठित करने का आदेश


महर्षि संस्थान के श्रीकांत ओझा द्वारा  (एस आर एम फाउंडेशन ऑफ इंडिया ) की गयी अपील को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकारा


नोएडा (अमन इंडिया) । उच्चतम न्यायालय ने आध्यात्मिक उत्थान के लिए बनाई गयी 'स्पिरिचुअल रिजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया' (महर्षि महेश योगी संस्थान) की संपत्तियों की अवैध खरीद-फरोख्त के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। महर्षि संस्थान के श्रीकांत ओझा (एस आर एम फाउंडेशन ऑफ इंडिया ) द्वारा की गयी अपील को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की देखरेख में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। यह टीम संस्थान की जमीनों के अनधिकृत हस्तांतरण और फर्जी दस्तावेजों के जरिए की गई बिक्री की गहन जांच करेगी।

मुख्य सचिव की निगरानी में होगी जांच

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने निर्देश दिया कि इस SIT में 'रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज' को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाए।


हाईकोर्ट का आदेश रद्द जांच जारी रखने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें पुलिस को जांच रिपोर्ट (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 193(3) के तहत) दाखिल करने से रोक दिया गया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच में इस तरह की रोक लगाना उचित नहीं है। पीठ ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करें और आरोपी पक्ष जांच में पूरी तरह से सहयोग प्रदान करें ।

तीन महीने में देनी होगी रिपोर्ट अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संस्थान की जमीनों से जुड़े कई आपराधिक मामले लंबित हैं, फिर भी संपत्तियों की बिक्री जारी है। कोर्ट ने SIT को तीन महीने के भीतर अपनी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है। यदि जांच में धोखाधड़ी या आपराधिक मंशा  पाई जाती है, तो कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि महर्षि महेश योगी ने कभी यह नहीं चाहा होगा कि उनके संस्थान की संपत्ति इस तरह विवादों और अवैध कब्जों की भेंट चढ़ जाए।