नोएडा/मुरादाबाद (अमन इंडिया) । मुरादाबाद केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित RoDTEP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) दरों में लगभग 50% तक की कटौती ने देशभर के निर्यातकों, विशेषकर हस्तशिल्प क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। RoDTEP का उद्देश्य निर्यातित उत्पादों पर लगने वाले करों और शुल्कों की भरपाई करना था, ताकि भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहें।
मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट उद्योग पर प्रभाव मुरादाबाद का पीतल, एल्युमिनियम, आयरन और मिश्रित धातुओं का हस्तशिल्प उद्योग पहले से ही बढ़ती लागत, अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और लॉजिस्टिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में RoDTEP दरों में भारी कटौती से निर्यातकों की लागत और बढ़ने की आशंका है।
MHEA अध्यक्ष नवेद उर रहमान का बयान मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (MHEA) के अध्यक्ष नवेद उर रहमान ने इस निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा “RoDTEP दरों में 50% कटौती हमारे जैसे लेबर‑इंटेंसिव सेक्टर के लिए बड़ा झटका है। मुरादाबाद का हैंडीक्राफ्ट उद्योग पहले ही कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, मजदूरी लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अनिश्चितताओं से दबाव में है। ऐसे समय में इंसेंटिव कम होना हमारे उत्पादों की ग्लोबल प्रतिस्पर्धा को सीधे प्रभावित करेगा।
उन्होंने आगे कहा“मुरादाबाद के हजारों कारीगरों और छोटे‑मझोले निर्यातकों की आजीविका इस उद्योग पर निर्भर है। RoDTEP में कटौती से न केवल निर्यात घटने का खतरा है, बल्कि रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। हम सरकार से आग्रह करते हैं कि हैंडीक्राफ्ट जैसे पारंपरिक और रोजगार‑प्रधान सेक्टर के लिए दरों की पुनः समीक्षा की जाए।
निर्यातकों की मांग
• सरकार RoDTEP दरों को पूर्व स्तर पर बहाल करे
• हैंडीक्राफ्ट सेक्टर के लिए विशेष राहत पैकेज पर विचार करे
• बढ़ती लागत को देखते हुए निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को मजबूत किया जाए
निष्कर्ष RoDTEP दरों में कटौती से मुरादाबाद का विश्व‑प्रसिद्ध हैंडीक्राफ्ट उद्योग नई चुनौतियों का सामना कर सकता है। निर्यातक समुदाय सरकार से सकारात्मक हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहा है, ताकि यह पारंपरिक कला और उससे जुड़े लाखों लोगों की आजीविका सुरक्षित रह सके।