फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने दंपति को चलने की राहा

 पिछले कई वर्षों से इस बुजुर्ग दंपत्ति की जिंदगी व्हीलचेयर तक सिमटकर रह गई थी, फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में इलाज के बाद 

दोबारा चलने-फिरने में समर्थ 

जटिल घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) सर्जरी ने उत्तराखंड के इस दंपत्ति को

 मोबिलिटी के साथ-साथ आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास भी लौटाया

ग्रेटर नोएडा (अमन इंडिया) । फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा ने उत्तराखंड से इलाज के लिए आए एक ऐसे बुजुर्ग दंपत्ति को दोबारा आत्मनिर्भरता का उपहार दिया है जो अपने घुटनों में गंभीर रूप से दर्द के चलते पिछले कई वर्षों से चलने-फिरने में असमर्थ थे। इन्होंने दिल्ली-एनसीआर के कई अस्पतालों में उपचार के लिए परामर्श लिया, लेकिन कोई खास राहत नहीं मिली। अंत में उन्होंने फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा से संपर्क किया जहां डॉ भरत गोस्वामी, कंसल्टेंट, ऑर्थोपिडिक, फोर्टिस ग्रेटर नोएडा की देखरेख में उनकी विस्तृत जांच और एडवांस ऑर्थोपिडिक केयर ने उनके जीवन की दिशा ही बदलकर रख दी। 

इस मामले में, 72-वर्षीय पति घुटने में तपेदिक (ट्यूबरक्लॉसिस/टी.बी.) और संक्रमित जोड़ों की वजह से पिछले करीब चार साल से व्हीलचेयर पर जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर थे। उनकी कंडीशन काफी जटिल थी और इसके लिए पहले एंटीबायोटिक नी स्पेसर के साथ उनकी डीब्राइडमेंट सर्जरी की गई। इसके 15 दिनों के बाद, टोटल नी रिप्लेसमेंट (टीकेआर) को सफलतापूर्वक किया गया, जिससे उनके 

घुटने में स्थिरता आयी और वह फिर काम करने लगा तथा परिणामस्वरूप मरीज दोबारा चलने-फिरने में सक्षम बने। 

उनकी 68-वर्षीय पत्नी भी घुटने में काफी दर्द की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती हुई थीं और ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण करीब सात वर्षों से उनका चलना-फिरना काफी कम हो गया था। अस्पताल में उनका बाइलेटरल टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया, जिसके बाद वह खुद से खड़ी होकर, अपने आप चलने-फिरने लगीं और यहां तक कि अपनी दैनिक गतिविधियों को भी करने में समर्थ हो गईं। सर्जरी के बाद उनके घुटनों की तकलीफ काफी घट चुकी थी। दोनों ही सर्जरी सफल रहीं और इस दंपत्ति को स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दी गई।  

इन मामलों की और जानकारी देते हुए डॉ भरत गोस्वामी, कंसल्टेंट, ऑर्थोपिडिक, फोर्टिस हॉस्पीटल, ग्रेटर नोएडा, ने कहा, “ये दोनों ही मामले मेडिकल दृष्टि से काफी चुनौतीपूर्ण थे क्योंकि मरीजों के जोड़ काफी खराब हो चुके थे और एक मामले में तो घुटने का जोड़ संक्रमित भी था। लेकिन सटीक डायग्नॉसिस, चरणबद्ध तरीके से इलाज तथा एडवांस सर्जिकल तकनीकों के इस्तेमाल से दोनों मरीजों की मोबिलिटी में काफी सुधार हुआ है और अब वे अपेक्षाकृत बेहतर लाइफ क्वालिटी का लाभ उठा रहे हैं। यदि समय पर इनका उपचार नहीं किया जाता, दोनों ही मरीजों की हालत और बिगड़ती, और घुटनों में लगातार दर्द रहने से उनकी मोबिलिटी भी दिन पर दिन कम होती जाती जिसके परिणामस्वरूप उनकी लाइफ क्वालिटी पर बुरा असर पड़ता।

अस्पताल की मेडिकल टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए, 72-वर्षीय मरीज ने कहा, “पिछले लगभग चार वर्षों से व्हीलचेयर तक सिमटकर रहने की वजह से मेरी आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास को काफी ठेस पहुंची थी। मैंने अपनी कंडीशन में सुधार के लिए इससे पहले भी कई डॉक्टरों से परामर्श किया, लेकिन फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा में इलाज के लिए आने के बाद से मेरी जिंदगी की दिशा ही बदल गई। आज मैं अपने पैरों पर दोबारा खड़ा हो सकता हूं और फिर से चलने-फिरने लगा हूं, यह वाकई किसी चमत्कार से कम नहीं है।

उनकी 68-वर्षीय पत्नी ने कहा “बीते सात वर्षों में, मेरे लिए रोज़मर्रा की हल्की-फुल्की गतिविधियां भी बेहद तकलीफदेह और थकान भरी बन चुकी थीं। उस पर अपने पति को और गंभीर तकलीफों से गुजरते हुए देखकर भी मैं काफी दुःखी थी। लेकिन फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा में इलाज के बाद हमारी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई थी। सर्जरी के बाद मैं अपने आप चलने-फिरने लायक हो गई हूं और अब लगातार घुटनों के दर्द से भी जूझना नहीं पड़ रहा।

सिद्धार्थ निगम फैसिलिटी डायरेक्टर फोर्टिस हॉस्पीटल, ग्रेटर नोएडा ने कहा फोर्टिस हॉस्पीटल ग्रेटर नोएडा में अत्याधुनिक ऑर्थोपिडिक टैक्नोलॉजी, उन्नत ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू सपोर्ट के साथ-साथ चौबीसों घंटे इमरजेंसी एवं ट्रॉमा केयर उपलब्ध है। साथ ही, हमारा मल्टीडिसीप्लीनरी और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण भी काफी सहायक होता है। अस्पताल में एडवांस ज्वाइंट रिप्लेसमेंट क्षमता तथा स्पेश्यलाइज़्ड ऑर्थोपिडिक विशेषज्ञता उपलब्ध है, और हम वर्ल्ड-क्लास केयर उपलब्ध कराते हैं जिससे मरीजों को दोबारा मोबिलिटी के साथ-साथ आत्मसम्मान तथा अधिक सक्रियता और बिना तकलीफ के जीवन बिताने का मौका मिलता है।