यूजीसी को लेकर विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री मिला



*विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात


*यूजीसी के नए नियमों में संशोधन की उठाई माँग, बताया संविधान की मूल भावना के विपरीत


नोएडा(अमन इंडिया) । विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर यूजीसी के नवीन “इक्विटी प्रमोशन विनियम–2026” पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई और इनमें तत्काल संशोधन की माँग की। प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई गौतम बुद्ध नगर के सांसद डॉ. महेश शर्मा ने की। यह जानकारी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व राज्यपाल पंडित कलराज मिश्र ने उक्त विनियमों को लेकर एक प्रेस वार्ता आयोजित दी, जिसमें उन्होंने नए नियमों को संविधान की मूल भावना के प्रतिकूल बताते हुए कहा कि ये नियम शिक्षण संस्थानों में समानता और सामाजिक समरसता को कमजोर करने वाले हैं।


पंडित कलराज मिश्र ने बताया कि परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सतीश शर्मा एवं वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेश तिवारी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से भेंट कर यह माँग रखी कि यूजीसी के नए नियमों में संशोधन कर सभी वर्गों को शिकायत का समान अधिकार दिया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वालों के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई का प्रावधान हो। उन्होंने कहा, "शिक्षण संस्थानों में समानता और न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक है, किंतु किसी एक वर्ग विशेष को लगातार संदेह के दायरे में रखकर उसके विरुद्ध निगरानी एवं अनुशासनात्मक तंत्र खड़ा करना न केवल असंवैधानिक है, बल्कि सामाजिक समरसता के लिए भी अत्यंत घातक है।" पूर्व राज्यपाल ने यह भी स्मरण कराया कि यूजीसी द्वारा वर्ष 2012 में बनाए गए नियमों में शिकायत निवारण की व्यवस्था सभी वर्गों के लिए समान, निष्पक्ष और संतुलित थी, जिसमें किसी भी छात्र या शिक्षक को पूर्वाग्रह के आधार पर दोषी मानने की प्रवृत्ति नहीं थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2019 के ऐतिहासिक निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि कोई भी जांच प्रक्रिया निष्पक्ष, संतुलित और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। झूठी शिकायतों से निर्दोष व्यक्तियों की गरिमा और अधिकारों की रक्षा भी न्याय प्रक्रिया का अभिन्न अंग है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन 

प्रेसवार्ता के दौरान वीरेश तिवारी को परिषद के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया जिन्होंने बताया कि प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री में मुलाक़ात कर नए नियमों में जल्द से जल्द संसोधन कि माँग को मजबूती से रखा, जिस पर केंद्रीय मंत्री द्वारा सकारात्मक आश्वासन दिया गया।

परिषद के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए पंडित कलराज मिश्र ने कहा,"विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद का लक्ष्य ब्राह्मण समाज को केंद्र में रखते हुए पूरे समाज में सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना है, जबकि यूजीसी के ये नए विनियम समाज में विभाजनकारी खाई पैदा करने का कार्य करते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 सभी नागरिकों को समानता, सम्मान और जीवन की गरिमा की गारंटी देते हैं, जबकि प्रस्तावित विनियम इन मूल अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन करते प्रतीत होते हैं। परिषद की प्रमुख माँगें हैं कि यूजीसी के इक्विटी प्रमोशन विनियम 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए जाति-आधारित एकतरफा दंडात्मक प्रावधानों को समाप्त किया जाए,सभी वर्गों (विद्यार्थी, शिक्षक एवं अन्य स्टाफ) को शिकायत का समान अधिकार मिले,शिकायत निवारण प्रणाली को निष्पक्ष, पारदर्शी और सर्वसमावेशी बनाया जाए,झूठी शिकायत करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान हो,शिकायत निवारण समितियों में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए

वक्तव्य के अंत में पंडित कलराज मिश्र ने भारत सरकार से इन विनियमों की शीघ्र समीक्षा कर संशोधन करने की माँग करते हुए कहा कि "न्याय की आड़ में किसी भी वर्ग का दमन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।