हार्पिक ने स्वच्छता नायकों के सम्मान में अनोखे स्मरणीय पोस्टल स्टैम्प लॉन्च किया

 स्वच्छता नायकों के सम्मान में अनोखे स्मरणीय पोस्टल स्टैम्प लॉन्च किए

दिल्ली (अमन इंडिया) । वर्ल्ड टॉयलेट डे के अवसर पर हेल्थ और हाइजीन में वैश्विक अग्रणी रेकिट ने भारत के स्वच्छता कर्मचारियों को एक ऐतिहासिक सम्मान दिया। जो देश की सफाई और स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। यह पहल डेटॉल बनेगा स्वच्छ इंडिया के तहत शुरू की गई है। रेकिट ने छह विशेष स्मारक पोस्टल स्टैम्प का संग्रह जारी किया। जो स्वच्छता कर्मचारियों की गरिमा साहस और देश को स्वच्छ रखने में उनकी अहम भूमिका का उत्सव मनाते हैं।

यह पहल “सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास” की सोच से गहराई से जुड़ी है, जो देश की प्रगति की नींव है। रेकिट पिछले एक दशक से स्वच्छ भारत मिशन का सक्रिय सहयोगी रहा है, जिसमें सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव, संचालन और देखभाल पर भी बराबर ध्यान दिया गया है, जो स्थायी बदलाव लाते हैं।ये स्मारक पोस्टल स्टैम्प सिर्फ प्रतीक नहीं हैं, बल्कि एक राष्ट्रीय सम्मान हैं। ये हमें याद दिलाते हैं कि असली विकास सिर्फ GDP से नहीं, बल्कि हर नागरिक की गरिमा, स्वच्छता और भलाई यानी ग्रॉस डोमेस्टिक बिहेवियर से मापा जाता है।

लंबे समय से स्वच्छता कर्मचारी अदृश्य रहे हैं जबकि वे बेहद जोखिम भरा काम करते हैं जो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। उनकी लाइफ एक्सपेक्टेंसी सिर्फ 45 साल है, जबकि आम नागरिक की 75 साल यानी 30 साल का अंतर, जो बड़ी असमानता दिखाता है। हार्पिक वर्ल्ड टॉयलेट कॉलेज (HWTC) के जरिए, रेकिट इस अंतर को कम करने के लिए काम कर रहा है। वह उन्हें कौशल, सुरक्षा और सम्मान देकर, गरीबी के चक्र से बाहर निकालते हुए और पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही कठिनाइयों को तोड़ते हुए।

2018 से HWTC ने 1 लाख से अधिक स्वच्छता कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया है उन्हें तकनीकी ज्ञान, जीवन कौशल और सुरक्षित व सम्मानजनक काम के नए अवसर दिए हैं। इस पहल ने हजारों जिंदगियां बदली हैं और उन्हें अपने समुदायों में बदलाव का नेतृत्व करने में सक्षम बनाया है। यह रेकिट की समान स्वच्छता पहुंच, व्यवहार परिवर्तन और सिस्टम-स्तर पर सुधार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस अवसर पर गौरव जैन एक्सिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट रेकिट  साउथ एशिया ने कहा “रेकिट का मानना है कि हर व्यक्ति अच्छी सेहत और स्वच्छता का हकदार है। यही सोच हमें प्रेरित करती है कि हम हर व्यक्ति तक सही उत्पाद, सही जानकारी और सही साधन पहुंचाएं। स्वच्छता कर्मचारी हमारे देश की हाइजीन व्यवस्था के असली स्तंभ हैं। वे हर दिन हमारी सुरक्षा करते हैं और हमारे शहरों की सेहत का ख्याल रखते हैं। इन स्मारक पोस्टल स्टैम्प्स के माध्यम से, हम उनके साहस, मेहनत और अमूल्य योगदान का सम्मान करते हैं। हार्पिक वर्ल्ड टॉयलेट कॉलेज उन्हें कौशल, सम्मान और वह पहचान देने के लिए प्रतिबद्ध है जिसके वे हकदार हैं।

जैक सिम वर्ल्ड टॉयलेट ऑर्गनाइजेशन के संस्थापक व निदेशक ने कहा “दुनिया की स्वच्छता व्यवस्था उन लोगों के काम पर टिकी है जो अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिए जाते हैं और जिनकी आवाज़ सुनी नहीं जाती। स्वच्छता कर्मचारियों को स्मारक पोस्टल स्टैम्पस के माध्यम से सम्मान देना बेहद सार्थक कदम है। भारत यह दिखा रहा है कि जो लोग स्वच्छता के मोर्चे पर काम करते हैं, उन्हें पहचान और सम्मान मिलना चाहिए। रेकिट की यह पहल हमें याद दिलाती है कि स्वच्छता कर्मचारी हमारे अनदेखे नायक हैं, जो पूरे देश की कृतज्ञता के पात्र हैं।

ये स्मारक पोस्टल स्टैम्प उन छह स्वच्छता नायकों को समर्पित हैं जिनकी जिंदगी HWTC के जरिए बदली:

जसविंदर कौर (पटियाला) ब्रेस्ट कैंसर से जंग जीतकर आज सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित और साफ टॉयलेट सुनिश्चित करती हैं।

सीतल बस्तिया (कटक) पहचान के संघर्ष से उभरकर, अब WTC प्रशिक्षण के बाद सेप्टेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन करती हैं।

सुनील कापुरसिंग सिरासवाल (छत्रपति संभाजीनगर) –पहले दैनिक मजदूरी पर मैनहोल साफ करते थे, आज "स्वच्छता रत्न पुरुष बचत गट" के संस्थापक और सुरक्षित, मशीनीकृत स्वच्छता के समर्थक हैं।

आरती नाइक (भुवनेश्वर)  वर्षों की अस्थिर आय के बाद अब स्थिर स्वच्छता कार्य में लगी हैं और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर रही हैं।

कुकू राम (पटियाला) स्वच्छता कर्मचारी और अंतरराष्ट्रीय बॉडीबिल्डिंग चैंपियन, जिन्हें WTC ने सपनों को आगे बढ़ाने में मदद की और वे भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

सुशील कुमार (वाराणसी)  सात पीढ़ियों में कोई स्कूल नहीं गया था, लेकिन अब वे अपने समुदाय में शिक्षा और स्वच्छता के समर्थक और आदर्श हैं।