FITT AIC IIT दिल्ली और सोनीपत ने केडेन्स के साथ साझेदारी की

 


FITT Forward 2025: IIT दिल्ली समिट ने तय किया भारत का डीप-टेक दशक

सेमीकंडक्टर से स्टार्टअप्स तक: FITT Forward 2025 ने बढ़ाया भारत का इनोवेशन ड्राइव

FITT Forward 2025: IIT दिल्ली बना डीप-टेक चैंपियंस का लॉन्चपैड

वैश्विक संवाद और ब्रेकथ्रू इनोवेशन के साथ संपन्न हुआ FITT Forward 2025

डीप-टेक इनोवेशन की झलक: FITT Forward 2025 में स्टार्टअप्स, नीति और साझेदारियों का संगम

IIT दिल्ली का FITT Forward 2025: प्रोटोटाइप से स्केलेबल डीप-टेक की ओर भारत की छलांग

नई दिल्ली (अमन इंडिया ) ।  दिल्ली के फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (FITT) का फ्लैगशिप इनोवेशन समिट FITT Forward 2025 दो दिवसीय आयोजन में स्टार्टअप्स, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत को एक मंच पर लेकर आया। यह समिट भारत के आगामी डीप-टेक दशक की लॉन्चपैड के रूप में स्थापित हुआ, जहाँ हेल्थ, मोबिलिटी, रोबोटिक्स और स्मार्ट मटीरियल्स जैसे क्षेत्रों में मार्केट-रेडी समाधान प्रदर्शित हुए। साथ ही, नीति संवाद, निवेशक संपर्क और SME सहयोग भी आयोजित किए गए।

दूसरे दिन, FITT IIT दिल्ली और AIC IIT दिल्ली सोनीपत ने केडेन्स के साथ साझेदारी में 24-महीने का इनक्यूबेशन प्रोग्राम लॉन्च किया ।जिसका उद्देश्य फैब्लेस सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स को ग्रूम करना है। FITT के प्रबंध निदेशक डॉ. निखिल अग्रवाल ने FITT Forward में इस पहल की घोषणा की। इस कार्यक्रम में स्टार्टअप्स को Cadence के EDA टूल्स, IIT दिल्ली की लैब्स और प्रोटोटाइप सुविधाएँ, तकनीकी और व्यवसायिक मेंटरशिप, निवेशक कनेक्ट, लीगल/IP सपोर्ट और माइलस्टोन-आधारित अनुदान उपलब्ध कराए जाएंगे। राष्ट्रीय चयन प्रक्रिया के तहत 15–20 टीमों को बूटकैंप के लिए चुना जाएगा, जिनमें से 2 स्टार्टअप्स को पूर्ण इनक्यूबेशन मिलेगा। फोकस क्षेत्रों में फैब्लेस SoCs, NPUs और AI एक्सेलेरेटर, RISC-V, AI-ड्रिवन डिजाइन टूल्स, सप्लाई-चेन इंटेलिजेंस और एनर्जी-इफिशिएंट डिजाइन वर्कफ़्लोज़ शामिल हैं। यह पहल इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और MeitY की प्राथमिकताओं के अनुरूप है, जो Make in India और Viksit Bharat 2047 के लक्ष्यों को मजबूती देती है। डॉ. अग्रवाल ने कहा, “भारत सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में एक निर्णायक मोड़ पर है। यह कार्यक्रम उस खोई हुई कड़ी को पूरा करता है—जहाँ उत्कृष्ट डिज़ाइन टैलेंट को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डीप-टेक कंपनियों में बदलने की क्षमता मिले।

उच्च-प्रभाव वाले समाधान में बदल सकते हैं।

दो दिनों तक चले FITT Forward 2025 में ऐसे डीप-टेक स्टार्टअप्स केंद्र में रहे जो आम जीवन को नया आकार दे रहे हैं—मिनटों में बैक्टीरिया खत्म करने वाले फैब्रिक्स से लेकर भारत का पहला ऑटोनॉमस पूल-क्लीनिंग रोबोट तक। इनोवेशन में हर्बल वेलनेस टेक्सटाइल्स, एंटीमाइक्रोबियल फैब्रिक्स, ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए AI टूल्स, ऑटो सिमुलेशन सॉफ़्टवेयर, पोर्टेबल डायग्नोस्टिक किट्स, प्रीडिक्टिव वियरेबल्स और न्यूट्रिएंट-डिलीवरी स्मार्ट पैचेस शामिल रहे। रोबोटिक्स आइल में पानी के अंदर सफाई करने वाले रोबोट ने ध्यान खींचा, वहीं ड्रोन स्टार्टअप्स ने रेस्क्यू और लॉजिस्टिक्स में UAVs की नई भूमिका प्रदर्शित की। 

FITT Forward अवार्ड सेरेमनी में Honeyloop Technologies को ₹3 लाख, Earth Sense Labs को ₹5 लाख का नकद पुरस्कार मिला। Green Aero Propulsion को Most Promising Startup और Vecmocon Technologies को Most Impactful Startup का खिताब दिया गया। इन पुरस्कारों ने यह संदेश दिया कि FITT उन स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन दे रहा है, जो डीप-टेक इनोवेशन को स्केलेबल और 

FITT Forward 2025 ने साफ संदेश दिया कि भारत का डीप-टेक इकोसिस्टम अब प्रोटोटाइप से व्यावहारिक समाधानों की ओर बढ़ रहा है और आने वाले दशक को परिभाषित करने के लिए तैयार है।


TechFront पैनल में Visa के प्रेसिडेंट (टेक्नोलॉजी) रजत तनेजा ने कहा कि नवाचार के केंद्र में विश्वास और सुरक्षा को बनाए रखना अनिवार्य है। जैसे-जैसे तकनीक स्मार्ट और सीमाहीन हो रही है, उन्होंने जोर दिया कि नियामकों, अकादमिक जगत, शोधकर्ताओं और उद्योग को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक जिम्मेदारी, नैतिकता और पारदर्शिता के साथ विकसित हो। उन्होंने जोड़ा कि Visa भारत के Viksit Bharat लक्ष्यों के अनुरूप सुरक्षित, सहज और भविष्य-तैयार वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

“यूनिटी इन डाइवर्सिटी  एंबेसीज़ इन डायलॉग ” सत्र में जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्ज़रलैंड और ब्रिटेन के राजनयिकों ने नीति आयोग के साथ मिलकर विज्ञान, तकनीक और नवाचार में वैश्विक सहयोग पर विचार-विमर्श किया। वक्ताओं ने डीप-टेक, स्पेस टेक, AI और स्टार्टअप एक्सचेंज में क्रॉस-बॉर्डर साझेदारियों को इकोसिस्टम की मजबूती का आधार बताया और कहा कि “विविधता में एकता” केवल एक सिद्धांत नहीं बल्कि लचीलापन बढ़ाने की रणनीति है।