एमपीएल अब 7 लेयर सिक्योरिटी के साथ भारत का सबसे सुरक्षित गेमिंग प्लेटफॉर्म

मोबाइल प्रीमियर लीग (एमपीएल) अब 7 लेयर सिक्योरिटी के साथ भारत का सबसे सुरक्षित गेमिंग प्लेटफॉर्म है

 

 दिल्ली (अमन इंडिया ) । दुनिया का प्रमुख मोबाइल ई-स्पोर्ट्स और डिजिटल गेमिंग प्लेटफॉर्म, एमपीएल भारत का सबसे सुरक्षित गेमिंग प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। कंपनी के सुरक्षा प्रबंधों और नीतियों की सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद कंपनी की 7 लेयर सिक्योरिटी को 6 स्‍वतंत्र ग्लोबल सिक्योरिटी संगठनों से सर्टिफिकेट मिला है।

 

एमपीएल को मिली सबसे नई मान्यता आईएसओ/आईईसी 27001:2013 सर्टिफिकेशन है। ये ग्राहकों के डेटा से लेकर बुनियादी ढांचे तक तमाम डोमेन में एमपीएल के गेम, सिस्टम और सर्विसेज की सिक्योरिटी और कार्यकुशलता की पुष्टि करता है। आईएसओ के अलावा, एमपीएल को आर्थर डी' लिटिल, शील्ड, एआईजीएफ, आईटेक लैब्स और रेडहंटलैब्स जैसे कई भारतीय और ग्लोबल संगठनों द्वारा दिए जाने वाले सर्टिफिकेट मिले हैं।

 

एमपीएल के को-फाउंडर, साई श्रीनिवास ने एक सुरक्षित गेमिंग वातावरण प्रदान करने की कंपनी की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा, "एमपीएल में, हम न केवल गेमिंग का अनूठा अनुभव देते हैं, बल्कि अपने उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षा के उच्चतम मानकों को भी सुनिश्चित करते हैं। हमारा प्लेयर को पहली वरीयता देने का नजरिया हमारे उपयोगकर्ताओं को गेमिंग में धोखाधड़ी से बचाता है और उनको गेमिंग के लिए निष्पक्ष और सुरक्षित प्लेटफार्म उपलब्ध करवाता है। हम एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए जीपीएस पहचान, मजबूत केवाईसी जांच और मशीन लर्निंग-आधारित पैटर्न पहचान जैसे सुरक्षा उपायों को अपनाते हैं। ग्लोबल सिक्योरिटी संगठनों से मिले सर्टिफिकेट हमारे इन प्रयासों का प्रमाण हैं।"

 

अन्य सुरक्षा मान्यताएं:


● एमपीएल के सुरक्षा उपायों को इंटरनेशनल कंसल्टिंग फर्म आर्थर डी' लिटिल से भी मान्यता प्राप्त है। आर्थर डी' लिटिल ने यूजर वेरीफिकेशन मानकों, प्लेयर सिक्योरिटी, रिस्पॉन्सिबल गेमिंग, वित्तीय सुरक्षा, विवादों के समाधान, विज्ञापन और प्रचार आदि के संबंध में कंपनी की अनुपालन प्रक्रियाओं की समीक्षा की है।


● इस गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म को शील्ड ट्रस्ट सर्टिफिकेशन भी मिला है। यह एक ग्लोबल रिस्क इंटेलीजेंस कंपनी शील्ड की तरफ से दिया गया है। 95.95 फीसदी के ट्रस्ट स्कोर के साथ, एमपीएल यह सर्टिफिकेट हासिल करने वाली दुनिया की पहली मल्टी-गेमिंग कंपनी है।


● भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जे. विक्रमजीत सेन के नेतृत्व वाले एआईजीएफ ने एमपीएल द्वारा पेश किए गए स्किल गेम की जांच के बाद एमपीएल को 'एआईजीएफ अप्रूव्‍ड गेम्स सर्टिफिकेशन' से सम्मानित किया है। यह सर्टिफिकेट लागू कानूनों, नियमों और एआईजीएफ स्किल गेमिंग चार्टर का पालन करने के लिए एमपीएल की प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता है।


● निष्पक्ष गेमिंग के प्रति एमपीएल की प्रतिबद्धता को ऑनलाइन गेमिंग सिस्टम के लिए दुनिया की प्रमुख टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन लैब, आईटेक लैब्स से भी मान्यता मिली है। आईटेक लैब्स ने कंपनी की 'नो बॉट' पॉलिसी और पीयर-टू-पीयर गेमप्ले के लिए सर्टिफिकेट दिया है।


● इसके अतिरिक्त, आईटेक लैब्स के 'रैंडम नंबर (आरएनजी) सर्टिफिकेशन' से इस बात की पुष्टि होती है कि एमपीएल के कार्ड गेम में कार्ड अप्रत्याशित क्रम में वितरित किए जाते हैं, इसमें दोहराव नहीं होता और ये समान रूप से वितरित होते हैं।


● सुरक्षा के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण अपनाते हुए, एमपीएल हर साल अपनी सुरक्षा व्यवस्था का थर्ड पार्टी ऑडिट करवाता है। सबसे हालिया ऑडिट लंदन स्थित साइबर सिक्योरिटी सोल्यूशन प्रोवाइडर, रेडहंटलैब्स द्वारा किया गया है। ये ऑडिट कमजोरियों के खिलाफ एमपीएल के प्रोडक्ट और बुनियादी ढांचे दोनों की मजबूती की जांच करते हैं। ये ऑडिट नए साइबर खतरों से निपटने के लिए आईपीएल की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं।

 

कंपनी एक ग्लोबल बग बाउंटी प्रोग्राम भी चलाती है। इसके तहत जहां बाहरी सुरक्षा शोधकर्ता एमपीएल के सिस्टम में किसी भी सुरक्षा कमजोरी के बारे में बता सकते हैं और 10 लाख रुपये तक का इनाम पा सकते हैं। एमपीएल भारत की पहली गेमिंग कंपनी है जिसने धोखाधड़ी के लिए दस लाख से अधिक खातों पर प्रतिबंध लगाया है।

 

भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते गेमिंग बाजारों में से एक है। वित्त वर्ष 2022 में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री बढ़कर 2.6 अलब डॉलर की हो गई। 2027 तक इसके 27 फीसदी की सालाना ग्रोथ रेट के साथ 8.6 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। इस जोरदार विकास ने गेमिंग इंडस्ट्री को साइबर अपराधियों के लिए आकर्षक बना दिया है। साइबर अपराधियों के चलते ऑनलाइन गेमिंग में मल्टिपल लॉगिन, चार्जबैक और लोकेशन स्पूफिंग से लेकर डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस (डीडीओएस) हमले, एडवेयर और फ़िशिंग जैसे खतरों का सामना करना पड़ता है। कैस्परस्की की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1 जुलाई, 2022 और 1 जुलाई, 2023 के बीच मोबाइल उपकरणों को संक्रमित करने के 436786 प्रयास हुए। इसके चलते पूरी दुनिया में 84,539 मोबाइल यूजर्स प्रभावित हुए। 1 जुलाई, 2022 और 1 जुलाई, 2023 के बीच, कैस्परस्की ने मोबाइल उपकरणों को संक्रमित करने के 436,786 प्रयासों को दर्ज किया, जिससे वैश्विक स्तर पर 84,539 मोबाइल उपयोगकर्ता प्रभावित हुए। नॉर्टन की साइबर सुरक्षा रिपोर्ट भारत में स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करती है। इस रिपोर्ट से पता चलता है कि चार में से तीन भारतीय गेमर्स को साइबर हमलों का सामना करना पड़ा है। जिसके चलते उन्हे नकद पैसे की हानि, दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर इंस्टॉलेशन (35%) और हैक किए गए खाते (29%) जैसे खतरों का सामना करना पड़ा है।

 

इस ट्रेंड की पुष्टि डेटा विश्लेषण और उपभोक्ता क्रेडिट रेटिंग कंपनी एक्सपीरियन की एक जांच से भी होती है। जिसमें पाया गया है कि 30 फीसदी भारतीय उपभोक्ताओं ने कहा है कि वे गेमिंग में धोखाधड़ी के प्रति संवेदनशील हैं। साइबर सुरक्षा कंपनी अरकोस लैब्स ने ऑनलाइन धोखाधड़ी में दुनिया में 260 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। अरकोस लैब्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 की चौथी तिमाही की तुलना में 2022 की पहली तिमाही में फर्जी खाता रजिस्ट्रेशन के मामलों में 85 फीसदी की बढ़त हुई है। ये रिपोर्ट उभरते साइबर खतरों का मुकाबला करने के लिए गेमिंग इंडस्ट्री में सुरक्षा उपायों को बढ़ाने की तात्कालिक जरूरत पर बल देती है।