मारीवाला हेल्थ इनिशिएटिव (एमएचआई) की स्थापना दिवस मनाया

 क्वीर अफर्मेटिव काउंसिलिंग प्रैक्टिस - एक​किताब जो मानसिक स्वास्थ्य परामर्श में एक क्वीर व्यक्ति का दृष्टिकोण शामिल करने का रोडमैप पेश करती है


LGBTQIA+ लोग जिस खास तरह के तनाव का सामना करते हैं, मारीवाला हेल्थ इनिशिएटिव की यह रिसोर्स बुक उनके कारणों पर प्रकाश डालती है


मुंबई/दिल्ली (अमन इंडिया)। मारीवाला हेल्थ इनिशिएटिव (एमएचआई) की स्थापना


हर्ष मारीवाला द्वारा की गई है। यह उनकी ओर से एक व्यक्तिगत परोपकारी पहल है। यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक खास दृष्टिकोण की वकालत करने, क्षमता निर्माण करने और अनुदान जुटाने वाला संगठन है। एमएचआई हाशिये पर स्थित लोगों और समुदायों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने पर जोर देता है। सभी को साथ लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, एमएचआई ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों के लिए एक रिसोर्स बुक, क्वीर अफर्मेटिव काउंसिलिंग प्रैक्टिस (क्यूएसीपी) पेश की है। इस पुस्तक का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों को LGBTQIA+ व्यक्ति जिन खास तरह के तनावों का सामना करते हैं, उनकी पहचान करना और ऐसे तनावों पर काबू पाने में मदद करना है। LGBTQIA+ व्यक्ति अक्सर संस्थागत, सामाजिक और व्यक्तिगत संबंधों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करते हैं।


मानसिक स्वास्थ्य परामर्श में क्वीर का दृष्टिकोण शामिल करने के महत्व के बारे में बोलते हुए, श्री हर्ष मारीवाला, संस्थापक, मारीवाला हेल्थ इनिशिएटिव एवं चेयरमैन, मैरिको लिमिटेड ने कहा, “वैश्विक स्तर पर, विभिन्न जेंडर और सैक्सुएलिटी पर बहुत अधिक बातचीत होती है। समाज को पर्सनल स्पेस और कार्यस्थलों, दोनों में इसे स्वीकार करने और मान्यता देने की जरूरत है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों को भी अपनी काउंसिलिंग प्रैक्टिस में सकारात्मक होने के लिए नई जानकारी और कौशल हासिल करने की जरूरत होगी। चाहे कोई इंडिविजुअल प्रोवाइडर हो या वर्कप्लेस - सबके पास एक सुरक्षित स्थान होने की खास क्षमता है। सभी तेज और बेहतर तरीके से आगे बढ़ सकते हैं - तो फिर हम सभी को अपने मैंटल हेल्थ स्पेस और वर्कस्पेस को सुरक्षित और सकारात्मक बनाने से क्या चीज रोक रही है?”


इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी ने 2018 में समलैंगिकता मानसिक बीमारी के बदले एक यौन भिन्नता घोषित किया था| इसके बावजूद क्वीर -ट्रांस पहचानों को विकृत करने का लम्बा इतिहास जो अब भी मानसिक स्वास्थ्य से जुडी प्रथाओं पर हावी है। यहां तक​​कि जब सेवाएं क्वीर लोगों के अनुकूल होती हैं, तब भी समलैंगिक व्यक्तियों के मानसिक स्वास्थ्य को विषम मानकों पर आंका जाता है। क्यूएसीपी रिसोर्स बुक इस दृष्टिकोण को चुनौती देती है और क्वीर लोगों के अनुकूल सेवाओं को क्वीर अफर्मेटिव प्रैक्टिस की दिशा में बढ़ने का प्रयास करती है।


डॉ. दयाल मीरचंदानी, एमडी, डीपीएम और बिहेवियरल साइंस नेटवर्क के निदेशक ने संरचनात्मक मुद्दों पर प्रकाश डाला, जिन पर क्यूएसीपी रिसोर्स बुक्स अंतर्दृष्टि प्रदान करती है, “पुस्तक वास्तव में व्यापक है, जेंडर और सेक्सुएलिटी की गहरी समझ प्रदान करती है, और सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक और धार्मिक विचारधाराओं जैसे बाहरी प्रभावों, और उनके आंतरिककरण की प्रक्रिया पर प्रकाश डालती है। यह किताब "सामान्यता" के सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंडों में फिट होने वाले लोगों के विशेषाधिकारों, और यौन दमनकारी तथा समलैंगिक लोगों के प्रति प्रबल घृणा करने वाले वातावरण में जीने के नकारात्मक प्रभाव के बारे में भी बात करती है।“


लैंगिक अधिकारों और समावेशन के लिए धारा 377 को हटाना एक बड़ा मील का पत्थर था। वयस्क द्वारा सहमति से किए गए यौन व्यवहार को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने से सेक्सुअल और जेंडर माइनोरिटीज़ के सामने आने वाली समस्याओं को मुख्य धारा की चर्चा में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। 2019 में, ऐतिहासिक निर्णय के 6 महीने से भी कम समय में, एमएचआई ने क्वीर अफर्मेटिव काउंसिलिंग प्रैक्टिस में योग्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों के लिए प्रशिक्षण की एक श्रृंखला शुरू की। इसके तहत क्वीर/ट्रांस फेमिनिस्ट मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों की एक कोर टीम योग्य से जुड़े पेशेवरों के लिए एक प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करने के लिए एक साथ आई। इन प्रशिक्षणों का एक अनिवार्य हिस्सा जेंडर एवं सेक्सुएलिटी की दृष्टि जानकारी प्राप्त करना था, जिसने मानसिक स्वास्थ्य को समलैंगिक और ट्रांसजेंडर ग्राहकों के लिए सकारात्मक और उत्तरदायी बनाने की ओर प्ररित किया।


मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों के लिए क्यूएसीपी रिसोर्स बुक एमएचपी की एक कोर टीम द्वारा लिखी गई है। जिसमें डॉ केतकी रानाडे सहायक प्रोफेसर, टीआईएसएस, डॉ श्रुति चक्रवर्ती (चीफ एडवाइजर, एमएचआई), पूजा नायर (कंसल्टेंट थेरेपिस्ट, एमएचआई) और गौरी श्रृंगारपुरे (थेरेपिस्ट, क्यूएसीपी फैकल्टी)। यह किताब भारत की 40 जगहों पर 350 से अधिक एमएचपी को दिए गए क्वीर अफर्मेटिव ट्रेनिंग कोर्सेस से बीते 3 साल में प्राप्त हुई समझ का नतीजा है।


होमोफोबिया, बाईफोबिया और ट्रांसफोबिया (IDAHOBIT) 2019 के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर, क्यूएसीपी समूह ने कंवर्जन थेरेपी के खिलाफ एक याचिका पेश की थी। इस याचिका पर मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों ने हस्ताक्षर किए थे। एक क्वीर पर्सपेक्टिव के साथ मानसिक स्वास्थ्य का एक दृष्टिकोण बनाने के अलावा, QACP रिसोर्स बुक स्ट्रक्चरल वॉयलेंस और क्वीर एवं ट्रांस व्यक्तियों से होने वाले भेदभाव पर ध्यान देती है।


किताब के सह-लेखकों में से एक, डॉ श्रुति चक्रवर्ती ने अफर्मेटिव काउंसिलिंग सीखने के लिए एमएचपी की जरूरत पर प्रकाश डाला, उन्होंने कहा "LGBTQIA+ व्यक्ति सिस्टम और संस्थानों के भेदभाव का सामना करते हैं, ये उन्हें अपनी आवाज, अभिव्यक्ति और पहचान को दबाने के लिए मजबूर करते हैं। हेट्रोनॉर्मेटिव सिस्टम लोगों को जेंडर और सेक्सुएलिटी के सख्त विचारों को अपनाने में मदद करती है और उन लोगों के साथ भेदभाव करती है जो समान नहीं हैं। इस समाजीकरण की व्यापकता औपचारिक मानसिक स्वास्थ्य पाठ्यक्रम में दिखाई देती है और LGBTQIA+ व्यक्तियों के लिए हानिकारक है। अफर्मेटिव काउंसिलिंग मेंटल हेल्थ प्रेक्टिस में कमियों को दूर करने का एक अवसर है। क्वीर अफर्मेटिव काउंसलिंग प्रैक्टिस रिसोर्स बुक, क्वीर-ट्रांस व्यक्तियों के जीवित अनुभव को ऐसे टूल और समझ के साथ एकीकृत करती है, जिससे यह पता चले कि व्यवहार में कैसे क्वीर अफर्मेटिव हुआ जा सकता है।“

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