भोजपुरी भाषा की मिठास से फिर महकेगा बिहार ' युपी व पूर्वाचंल - काव्या सिंह


नई दिल्ली( अमन इंडिया) | विश्व के मान चित्र मे भारत की पहचान विभिन्न संस्कृति ' सम्यता ' भिन्न बोली जाने वाली भाषा से होती है। तभी तो भारत को अनेकता मे एकता का देश कहा गया है। बिहार राज्य के भोजपुर से भोजपुरी भाषा का प्र दुभाव हुआ ' जिसका कलान्तर मे प्रचार . प्रसार व विस्तार बिहार ' यु ०पी व पूर्वाचंल मे होते भारत की भौगोलिक से बाहर निकल कर विदेशो मे जैसे मोरिसस

 व बिहार ' यु० पी० व पुर्वाचंल के लोग गये उन्होने अपनी प्यारी भोजपुरी को अपनी विरासत के रूप संयोग कर रखा । परिणाम आज भारत मे भोजपुरी के प्रेमी विदेशो मे अपना परचम फैला रहा है ।

विगत दिनो 30 अप्रैल को भोजपुरी प्रेमी के स्टार गायक पवन सिंह व दक्षिण भारतीय फिल्मो की ख्याति प्राप्त एक्ट्रेस काव्या सिंह भोजपुरी संगीत " मोहब्बत अब बेचता " का टीजर यु ट्युब पर ऑन लाईन लॉन्च की गई । भोजपुरी गायक के पवन सिंह के स्वर व काव्या सिंह की धमाकेघार अभिनय ने भोजपुरी संगीत प्रेमी के दिलो ऐसी दस्तक दी कि इस गाने के तीन दिन मे पाँच मिलियन व्यु की रिकार्ड अपने नाम कर ली है।

  काव्या सिंह इतनी सी छोटी उमर मे नाम व शोहरत अपने नाम कर ली है जिसका प्रत्यक्ष परिणान हम सभी के समाने है। 

 "होनहार बीरवान के चिकने पाथ" काव्या सिंह पे यह कहावत 100% चरिचार्थ होता है " 

 कलाकार होना सौभाग्य की बातहै, एक सच्चे कलाकार को अपने मिट्टी की खुशबू अपनों खींच लाती है, कहानी एक ऐसी ही युवती की है जो दक्षिण भारत की कई व्यवसायिक फिल्मों में काम कर चुकी है जिसने दक्षिण के फिल्मी क्षेत्रों में अपने प्रतिभा का लोहा मनवाया है ,लेकिन उन्हें भोजपुरी की खुशबू मानो वर्षों से पुकार रही थी ,इस यूवती में भोजपुरी के पारंपरिक इतिहास को नए सिरे से पिरो रही है ,आप इनके द्वारा गाए गीत जब सुनेंगे तब आपके हृदय को नई अनुभूति भीनी भली मिठास का एहसास होगा ,आपको संगीत की साफगोई नई ऊर्जा प्रदान करेगी ,तमाम भोजपुरी साहित्य प्रेमी से आग्रह है कि आप इनके गीतों को सुनें और झोली भर आशीर्वाद दे .[

भोजपुरी संगीत भारत की समद्धि व अनोखी विरासत के लिए जाना जाता है ।भोजपुरी एक गीत . संगीत मात्र ही नहीं ब्लकि जन भावनाओं को एकता अखण्डता मे पिरोने का सशक्त माध्यम भी रहा है ।भोजपुरी संगीत आज भी महेंद्र मिश्र और भिखारी ठाकुर जैसे महान कलाकरो को पाकर धन्य हुआ है । भोजपुरी संगीत आपसी सौहार्द प्रेम वभाई चारे व भावना की पवित्र गंगा थी 'लेकिन हालिया के दिनों में कुछ बाजार वाद एवं व्यवसायिक लोगों के हाथ में आकर मात्र कठपुतली व फहुड व अशीलता के चरम पर पहुँच भोजपुरी अपने महान पुर्वजो को बदनाम और कलंकित किया है । आज का भोजपुरी संगीत वर्तमान के दिनों में अपना रास्ता से भटक गया है। लेकिन बाजार वाद के बर्तमान परिस्थितियो के बावुजद आज भी काव्या सिंह जैसी उमदा कलाकार ऐसे युवा हैं जो अपनी विरासत को आगे बढाने मे दिन रात लगी रहती हैं । ताकि फिर भोजपुरी भाषा की मिठास से महके उठेगा बिहार ' उ० प्र० व पूर्वाचंल का आँगन ।

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