बड़े पायरेसी रैकेट बॉस आईपीटीवी का भंडाफोड़ दुनियाभर में भारतीय प्रीमियम कंटेंट को अवैध रूप से स्ट्रीमिंग करने वाले कई गिरफ्तार


दिल्ली (अमन इंडिया)। हाल ही में फरीदाबाद में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज हुई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि कथित रूप से फेस मास्क और पीपीई किट बनाने वाली कंपनी रिसले प्रा.लि. (Rhysley Private Limited) विभिन्न भारतीय और अंतरराष्ट्रीय प्रसारकों से अवैध रूप से सिग्नल चुरा रही है, बॉक्स सेलिंग, टेक सपोर्ट और एक्टिवेशन बॉक्स जैसे बैकएंड ऑपरेशन का संचालन कर रही है और इस तरह पूरी इंडस्ट्री को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचा रही है। 

इन लुटेरों ने लगभग 70-80% प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वारदात को अंजाम दिया है। भारतीय प्रसारकों को कोई शुल्क दिए बिना 400 से अधिक भारतीय और कई अंतरराष्ट्रीय चैनलों को इन क्षेत्रों में अवैध रूप से स्ट्रीम किया है। यदि दुनियाभर के प्रमुख लुटेरे बंद हो जाते हैं, तो उद्योग के लिए लगभग 113 मिलियन अमरीकी डॉलर का बाजार उपलब्ध होगा। विदेश में रहने वालों के लिए दक्षिण एशिया के लीडिंग ओवर-द-टॉप (ओटीटी) ऑडियो-विजुअल कंटेंट प्रोवाइडर में से एक यप्प टीवी ने रिसले प्रा.लि. का भंडाफोड़ कर पूरे उद्योग के लिए एक सकारात्मक कदम उठाया है। 


स्टार, कलर्स सहित प्रमुख निजी ब्रॉडकास्टर रिसले प्रा.लि. के तहत/साथ काम कर रहे पाइरेट कार्टेल बॉस आईपीटीवी के खिलाफ युद्ध में हमारे साथ हैं, जो दुनिया भर में बॉस आईपीटीवी सर्विसेस बेचकर सभी टॉप ब्रॉडकास्टर नेटवर्क्स के भारतीय प्रीमियम कंटेंट की अवैध रूप से स्ट्रीमिंग कर रहा है।

बॉस आईपीटीवी जैसे पाइरेट्स हमारे वैध घरेलू या इंटरनेशनल सिग्नल्स को रोकते हैं और अवैध रूप से उन सिग्नल्स को पूरी दुनिया में प्रसारित करते हैं। नतीजतन, वैध लाइसेंसधारी / अधिकार धारक जैसे कि यप्प टीवी जो ब्रॉडकास्टरों के कार्यक्रम को प्रसारित करने के लिए अधिकृत हैं, इन अपराधों के कारण भारी नुकसान उठाते हैं। और दुख की बात यह है कि इसका संचालन/अपलिंक भारत से हो रहा है। ऐसे चैनलों के ग्राहकों के लिए, यह उनके पर्सनल डेटा के लिए गंभीर खतरा बनते हैं क्योंकि उनके क्रेडिट कार्ड और डेटाबेस को आसानी से हैक कर सकते हैं। इसके अलावा, चूंकि ऐसी कंपनियां अवैध हैं, इसलिए वे कंज्यूमर डेटा का दुरुपयोग भी कर सकते हैं।


बॉस आईपीटीवी, टशन आईपीटीवी, वोइस (Vois) आईपीटीवी, पंजाबी आईपीटीवी, इंडियन आईपीटीवी, ब्राम्पटन (Brampton) आईपीटीवी, बॉस एंटरटेनमेंट, और गुरु आईपीटीवी जैसे पाइरेट्स के ग्रुप का हिस्सा है जो एक ही चैट प्रोवाइडर, होस्टिंग प्रोवाइडर और आईपी एड्रेस का उपयोग करते हैं और अवैध रूप से ब्रॉडकास्टर के सिग्नल्स को दुनियाभर में स्ट्रीम करते हैं। यह कंपनी श्री हरप्रीत रंधावा के नाम से रजिस्टर्ड है, जिसके नाम पर कई कंपनियां रजिस्टर्ड है, जैसे कि सर्वर सेंटर, चकदे टीवी, वोइस (VOIS), टिप्सी टाइम, टशन आईपीटीवी, 2144644 अलबर्टा लिमिटेड और रिसले काउचर प्रा.लि., जिसका नाम बदलकर रिसले प्राइवेट लिमिटेड रखा गया। 

दर्ज शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस ने फरीदाबाद में रिसले इंडिया मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और रिसले इंडिया सेल्स ऑफिस सहित कई स्थानों पर छापे मारे। मैन्युफैक्चरिंग सेट यूनिट में अवैध सेट टॉप बॉक्स और प्रीमियम भारतीय चैनलों की अवैध बिक्री से संबंधित ईमेल संचार वाले सिस्टम पाए गए, जबकि सेलर और ग्राउंड फ्लोर पर 20+ सीटर ऑफिस मिला, जहां विशेष रूप से सेल्स, सपोर्ट और उपरोक्त अवैध आईपीटीवी सेट टॉप बॉक्स के लिए एनओसी भी मिली है।  

उपरोक्त दो स्थानों से फॉरेंसिक जांच के लिए 10 से अधिक सिस्टम (लैपटॉप / डेस्कटॉप) जब्त किए गए। मुख्य आरोपी के बिजनेस पार्टनर और कुछ प्रमुख कर्मचारियों सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया और वे अभी पुलिस हिरासत में हैं क्योंकि जांच अभी भी शुरुआती अवस्था में है। इसके बाद, 10 मार्च 2021 को एक एफआईआर दर्ज की गई। आरोपियों ने फरीदाबाद में कोर्ट के समक्ष जमानत याचिका दायर की है और माननीय न्यायाधीश सुश्री किम्मी सिंगला ने दोनों पक्षों को सुनकर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। इस पर विचार करने के बाद, माननीय अदालत ने जमानत अर्जी खारिज कर दी गई। 11 मार्च 2021 को गिरफ्तार किए गए सभी 6 लोगों की शिनाख्त सुमित शर्मा, हरमिंदर सिंह संधू, गणेश नायर, अनिल कुमार पाल, वीरेंद्र कुमार, देवव्रत राय के रूप में की गई।

आगे की जांच में यह भी पाया गया कि बॉस आईपीटीवी ने जो अवैध सेट टॉप बॉक्स का इस्तेमाल किया, उनमें डेटाकेम्प जैसे सीडीएन प्रोवाइडर, GoDaddy.com, प्रॉक्सी, एलएलसी, ऑलस्ट्रीमकॉर्प (AllstreamCorp), कनाडा और infomir.eu के रूप में विभिन्न वेंडर्स का उपयोग करता है। बॉस आईपीटीवी के इन विक्रेताओं के लिंक की भी जांच की जानी चाहिए और चोरी का समर्थन करने के लिए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू होनी चाहिए। इस तरह के पाइरेट्स उद्योग के लिए खतरा है और इन्हें मिटा देना चाहिए। अदालत ने पहले ही इन पाइरेट्स के खिलाफ जमानत आदेश खारिज कर दिया है, जो सही दिशा में एक कदम है।

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