आम बजट में अल्पसंख्यकों की अनदेखी हुई है विनोद तकियावाला


दिल्ली (अमन इंडिया)। भारतीय लोकतंत्र मंदिर (संसद) मे विगत दिनो आगामी वितीय वर्ष 21-22 आम बजट केन्द्रीय वित्त मंत्री डा0 र्निमला सीतारमण के द्वारा लाल रंग करसमाई पैक्ट मे पेस की गई . जिस पर चर्चा के उपरान्त वित्तीय बजट पास होता है ' लेकिन इस वार कुछ अलग शीन बनता नजर आ रहा है। क्योकि हमारा अन्न दाताओ तीनो नये कृषि कानुनो के खिलाफ घरना प्रदर्शन चल रहे है ' सता पक्ष -विपक्षी दलो के द्वारा राज्य सभा मे विल के पक्ष - विपक्ष मे चर्चा मे मशगुल है। 

 आम बजट के संदर्भ मे जो समय देना चाहिए वे नही मिल पा रहा है । केद्र की सरकार अपने जुम्ले बाजी व नित्य नबीन नये महूदा पर जनता का ध्यान भटकाने मे अपनी महारत हाशिल कर ली है ' यह जग जाहिर है ' केद्र की सरकार की इन जुम्ले मे " सबका साथ 'सबका विकास ' सबका विश्वास ' की बाते तो करही है और करनी भीचाहिए । लेकिन जब जमीनी घरातल पर असील जामा पहनाने की बात होती है। तो जमीनी हकिकत दुर दुर तक नजर नही आती है। इसका सबसे बडा उद्धाहरण इस वार की आम बजट है ।इस वित्तीय वर्ष के बजट में जहाँ निम्न व मध्यम वर्गीय परिवार को किसी भी तरह रियायत नही दी गई बही - अल्पसंख्यको की हितो की अनदेखी की गई है। iवर्

 वर्ष 2021- 22 के बजट में अल्पसंख्यकों की उपेक्षा का क्रम को जारी रखा गया है। वित्तमंत्री सीताराम ने गत वर्ष के संशोधित बजट में ही नहीं बल्कि इस वर्ष के अल्पसंख्यकों को आवंटित बजट में भारी कटौती करके देश के अल्पसंख्यकों को निराश किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने उन्हें बजट प्राथमिकताओं में बिल्कुल पीछे रहने को मजबूर कर दिया है। इस बजट से न केवल मुसलमान घाटे में है बल्कि सिख , ईसाई, जैन, पारसी, बौद्ध व अन्य धार्मिक समूह निराश हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ सबका विकास की बात करते हैं लेकिन जबअल्पसंख्यकों की बात होती है, तब उन्हें देने के लिए प्रधानमंत्री की झोली में कुछ खास नहीं मिलता।

मोदी सरकार को अपनी कथनी और करनी में समानता लानी होगी। अल्पसंख्यक मंत्रालय के लिए इस बार बजट में 4810.77 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वित्त वर्ष 2020-21 में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के लिए बजट 5029 करोड़ रुपये था, चूंकि मंत्रालय ने आवंटित राशि खर्च नहीं कि इसलिए बाद में संशोधित आवंटन 4005 करोड़ रुपये कर दिया गया।

इस महामारी के चलते पर्यटन उद्योग को चौपट हो गया था। , अब जब हालात बदल रहे हैं पर्यटन , खेलों की सख्त जरूरत है ,ऐसे में इस सरकार ने इन दोनों मदों में बजट राशि मे कटौती कर के पर्यटन और खेलों की प्रगति में रुकावट खड़ी कर दी है। सब जानते हैं कि देश के अनेक शहर और कस्बे पर्यटन पर आश्रित हैं। इसी तरह खेल व खेल आयोजनों से आर्थिक स्तिथि में सुधार आता है और युवाओं के शरीर और मानसिक स्तिथि बेहतर बनती है। हैरत की बात है कि पर्यटन मंत्रालय का आवंटन 19 प्रतिशत घटा दिया गया।पहले आवंटित 2,500 करोड़ रुपये से घटा कर 2026.77 करोड़ रुपये कर दिया गया है. बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1088.03 करोड़ रुपये के प्रावधान किए गए हैं. उन्होंने बताया कि खेल मंत्रालय को 230 करोड़ कम राशि का प्रवधान है। वर्ष 2021-22 के बजट में खेल और युवा कार्य मंत्रालय को 2596.14 करोड़ रुपये आवंटित किये हैं. खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन का बजट 70 करोड़ रुपये से घटाकर 53 करोड़ रूपये कर दिया गया. वहीं 2010 राष्ट्रमंडल खेल साभी स्टेडियमों की मरम्मत का बजट 75 करोड़ रूपये से घटाकर 30 करोड़ रूपये कर दिया गया. उन्होंने कहा कि स्वस्थ और शक्तिशाली भारत के लिए तीनों क्षेत्रों में बजट राशि कम किया जाना देश के हित में नहीं है। उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की कि सरकार बजट पारित करने से पहले इन कमियों को दूर करेगी।

 केन्द्र की सरकार खास प्रधान मंत्री को अपने बचन को यथार्थ की घरातल पर सत प्रति शत लागु करना ही उनकी सच्ची देश प्रेम - व लोक प्रियता की मापदंड है प्रधान मंत्री जी ये जनता जनार्दन सब कुछ जानती है ' कुछ महीने बाद ही कई राज्य मे विधान सभा के चुनाव होने वाले है हालाकि वित्त मंत्री जी आगामी राज्यो के विधान सभा चुनाव को ध्यान मे रखते हुए कई घोषणा की है लेकिन उनसे ज्यादा समझदार भारत के जागरूक मतदाता है । ये इस बार अपने मताधिकार करने से पहले कई बाते की बारिको को ध्यान रख कर मत दान करेगी ' हालाकि चुनाव मे अभी वक्त है ।

  चुनाव मे जीत हार के अंकगणित के आकंडे के बारे अभी कहना जल्द वाजी होगीई वी एम महाराज की कृपा दृष्टि / कु दृष्टि भी अपनी भुमिका अदा करेगी ।अभी आप से विदा लेने का समय आ गया है। पुनः " निरक्षी नजर ' तीखी खबर " से आप सभी के समक्ष उपस्थित होगे ।तब तक अपने खबरी लाला को विदा दे ।ना कॉहु से दोस्ती,ना कॉहु से बैरखबरीलाल तो माँगे सबकी खैर ॥


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