फर्जी डिग्री के खिलाफ मुहिम चलाने की तैयारी वीरेंद्र सिंह गुड्डू बोले पीड़ितों की मदद के लिए आगे आएंगे
नोएडा (अमन इंडिया) । गौतमबुद्ध नगर जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे अधिवक्ता मनोज कुमार भाटी का वकालत लाइसेंस निरस्त किए जाने के मामले में शिकायतकर्ता वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने शुक्रवार को नोएडा मीडिया क्लब में प्रेसवार्ता की। उन्होंने पूरे मामले में अपनी शिकायत, दस्तावेजों और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति की कार्रवाई का हवाला देते हुए कहा कि इस लड़ाई का उद्देश्य व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को सामने लाना है। उन्होंने ऐसे मामलों से पीड़ित लोगों की मदद के लिए अभियान शुरू करने की बात भी कही।
वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने बताया कि उन्होंने 22 फरवरी 2021 को शपथ पत्र के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि मनोज कुमार भाटी 22 फरवरी 1991 से 30 अप्रैल 2009 तक भारतीय वायुसेना में कार्यरत रहे। गुड्डू के मुताबिक, वायुसेना में सेवा के दौरान भाटी ने कथित तौर पर विभागीय अनुमति के बिना उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से पत्राचार के माध्यम से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसी डिग्री के आधार पर उन्होंने वर्ष 2004 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से संबद्ध जनहित कॉलेज ऑफ लॉ, ग्रेटर नोएडा में तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया।
गुड्डू ने सवाल उठाया कि वायुसेना में तैनाती के दौरान कॉलेज से करीब 2,000 किलोमीटर दूर रहते हुए नियमित कक्षाओं में 76 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज होना कैसे संभव था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाटी ने 26 अप्रैल 2009 को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में पंजीकरण कराया, जबकि उनके शपथ पत्र पर 24 अप्रैल 2009 की तारीख दर्ज थी। गुड्डू के अनुसार, शपथ पत्र में नौकरी या व्यवसाय में नहीं होने की घोषणा की गई थी, जबकि उनके दावे के मुताबिक भाटी 30 अप्रैल 2009 तक वायुसेना में कार्यरत थे।
नौ बिंदुओं पर शिकायत, अनुशासन समिति के आदेश का दिया हवाला
वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने बताया कि उनकी शिकायत पर उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति ने मामले में नौ वाद बिंदु तय किए और दोनों पक्षों को सुनने के बाद निर्णय दिया। गुड्डू के मुताबिक, समिति ने सभी बिंदुओं पर शिकायतकर्ता के पक्ष में निष्कर्ष निकाले। उन्होंने बताया कि आदेश में नियमित कक्षाओं में 76 प्रतिशत उपस्थिति को संबंधित परिस्थितियों में संभव नहीं माना गया। उनके अनुसार, समिति ने कॉलेज की उपस्थिति शीट का उल्लेख करते हुए यह भी निष्कर्ष निकाला कि कक्षाओं में भाटी के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थिति दर्ज कराई गई थी।
गुड्डू ने कहा कि अनुशासन समिति ने एलएलबी की तीन वर्षीय डिग्री को अमान्य एवं अवैध मानते हुए इसे अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 35 के तहत कदाचार माना और मनोज कुमार भाटी का वकालत लाइसेंस निरस्त करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उनके द्वारा प्रस्तुत शिकायत और दस्तावेजों के बाद हुई। इन निष्कर्षों का विस्तृत विवरण संबंधित आधिकारिक आदेश से मिलान किए जाने पर और स्पष्ट होगा।
मैं वकील नहीं पेशे से इंजीनियर हूं प्रेसवार्ता में वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने कहा “सबसे बड़ी बात यह है कि मैं वकील नहीं हूं। मैंने एलएलबी की पढ़ाई की है, लेकिन मैं पेशे से इंजीनियर हूं। मैंने अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण इसलिए नहीं कराया, क्योंकि मैं एक आम नागरिक के तौर पर इस व्यवस्था के खिलाफ लड़ना चाहता था।
उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में केवल मौखिक आरोप लगाने से काम नहीं चलता, बल्कि दस्तावेजी साक्ष्य और तथ्यों के आधार पर शिकायत की जानी चाहिए। गुड्डू के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों के सामने जब भी उन्होंने दस्तावेज रखे, तो उनके आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ी। उन्होंने न्यायालयों, बार काउंसिल और पुलिस अधिकारियों के समक्ष तथ्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया।
अन्य मामलों में भी कार्रवाई का दावा वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश में फर्जी डिग्री और पेशेवर अनियमितताओं से जुड़े अन्य मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में 100 से अधिक अधिवक्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और गौतमबुद्ध नगर में भी कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की संख्या और अधिक हो सकती है। इन आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
गुड्डू ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास फर्जी डिग्री या पेशेवर पंजीकरण में अनियमितता से जुड़े ठोस प्रमाण हैं और वह पीड़ित है, तो वह उसकी मदद के लिए तैयार हैं। उनके मुताबिक, इस घटनाक्रम के बाद करीब 85 से 100 फोन कॉल और संदेश उनके पास आए हैं। इनमें कुछ महिलाएं भी शामिल हैं, जिन्होंने ऐसे मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर मार्गदर्शन मांगा है।
पीड़ितों को जोड़कर अभियान चलाने की तैयारी
वीरेंद्र सिंह गुड्डू ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों से प्रभावित लोगों को एक मंच पर लाने और उनकी शिकायतें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए अभियान शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि अन्य पीड़ित और दस्तावेजी साक्ष्य सामने आते हैं, तो इस मुहिम को आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर कथित अनियमितताओं को सामने लाना तथा पीड़ितों को उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने में मदद करना है। गुड्डू ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कानून और प्रमाणों के आधार पर ही होनी चाहिए।