एक वर्ष में 80% पुरुषों ने पहली बार मानसिक स्वास्थ्यपरामर्श लिया

 मानसिक स्वास्थ्य परामर्श लेने वालों में हर 10 में से 4 पुरुषलंबे समय तक रहने वाला तनाव अब भी अनदेखामार्गा माइंड केयर रिपोर्ट

• पिछले एक वर्ष में 80% पुरुषों ने पहली बार मानसिक स्वास्थ्यपरामर्श लियाजो मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लेकर बढ़तीस्वीकार्यता का संकेत है।

 

बेंगलुरु/दिल्ली (अमन इंडिया) । पुरुषों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँलगातार बढ़ रही हैंविशेषकर युवाओं में। मार्गा माइंड केयर की नईरिपोर्ट के अनुसारअब मानसिक स्वास्थ्य परामर्श लेने वालों में हर 10 में से 4 पुरुष हैं। इनमें सबसे अधिक मामले 19–25 वर्ष आयु वर्ग(जनरेशन ज़ेडके हैंजिनके बाद 26–35 वर्ष आयु वर्ग का स्थान है।

अधिकांश पुरुष शुरुआत में नींद से जुड़ी समस्याओं और नशे की लतजैसी शिकायतों के साथ परामर्श के लिए आते हैं। विस्तृत मूल्यांकन केबाद चिंताअवसादमनोविकृति और सिज़ोफ्रेनिया जैसी मानसिकस्वास्थ्य समस्याएँ सामने आती हैं। लगभग आधे पुरुष लंबे समय तकतनाव का सामना करते हैंलेकिन उसे मानसिक स्वास्थ्य समस्या नहींमानते और लक्षणों को तब तक नज़रअंदाज़ करते रहते हैंजब तकउनका प्रभाव उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन पर दिखाई नहीं देनेलगता।

कार्यस्थल का दबाव एक प्रमुख कारण बना हुआ है। रिपोर्ट केअनुसारमानसिक स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त 40% पुरुषों ने कार्यस्थलसे जुड़े तनाव के कारण सहायता ली। वहीं 80% पुरुष पहली बारमानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए आगे आएजो मानसिक स्वास्थ्यके प्रति बदलते दृष्टिकोण का संकेत है।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NMHS) और निम्हांस(NIMHANS) के अनुसारभारत में हर 10 में से 1 व्यक्ति किसी किसी मानसिक स्वास्थ्य विकार से प्रभावित है। यह समय पर पहचानखुली बातचीत और सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकताको रेखांकित करता है।

पीपल ट्री हॉस्पिटल्स एवं मार्गा माइंड केयर की संस्थापकचेयरपर्सन एवं प्रबंध निदेशक डॉज्योति नीरजा ने कहा
आमतौर पर पुरुष तब सहायता लेने आते हैंजब भावनात्मक दबावउनके व्यक्तिगत या पेशेवर जीवन को प्रभावित करने लगता है। हमनेदेखा है कि सहायता लेने वाले 50% से 60% पुरुष तनाव से जुड़ेलक्षणों का अनुभव करते हैंलेकिन उन्हें यह एहसास नहीं होता कि यहउनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा है।

मार्गा माइंड केयर की वरिष्ठ सलाहकार (वयस्क मनोचिकित्सक एवंसेक्सोलॉजिस्टडॉकृतिका ऐनापुर ने कहा युवा पुरुषों में मानसिक स्वास्थ्य परामर्श लेने की बढ़ती प्रवृत्तिसकारात्मक संकेत है। हालांकि चिंताअवसाद और कार्यस्थल कातनाव आज भी प्रमुख चुनौतियाँ हैं। समय पर पहचान और उचितउपचार अत्यंत आवश्यक है।

रिपोर्ट इस बात पर ज़ोर देती है कि सामाजिक कलंक के कारण पुरुषोंका मानसिक स्वास्थ्य अक्सर अनदेखा रह जाता है। लगभग आधेपुरुष रोगियों में चिंता और अवसाद दोनों साथ पाए गएजिससे समग्रमानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता स्पष्ट होती है।


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