नोएडा (अमन इंडिया ) । को नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की अध्यक्षता में सेक्टर-6 स्थित बोर्ड रूम में नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विपिन मल्हन के नेतृत्व में पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उद्योगों से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं Unified Regulation 2025 नीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों द्वारा ट्रांसफर चार्ज में वृद्धि, निर्माण अवधि में कमी, अत्यधिक जुर्माना एवं शुल्क, NOC एवं प्रमाण पत्र से संबंधित जटिल प्रक्रियाओं, ई-नीलामी से बढ़ती भूमि कीमतों तथा अन्य प्रशासनिक समस्याओं को प्रमुख रूप से उठाया गया।
प्राधिकरण के अधिकारियों ने सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना तथा कई बिंदुओं पर आवश्यक संशोधन एवं विचार-विमर्श का आश्वासन दिया। कुछ मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए, जबकि अन्य विषयों को उच्च स्तर एवं आगामी बोर्ड बैठक में विचार हेतु प्रस्तुत करने की बात कही गई।बैठक का उद्देश्य उद्योगों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें बेहतर एवं सुगम वातावरण उपलब्ध कराना है।
दिनांक: 24-03-2026
प्रेस विज्ञप्ति
आज दिनांक 24-03-2026 को श्री कृष्णा करुणेश जी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, नोएडा विकास प्राधिकरण की अध्यक्षता में सेक्टर-6 स्थित बोर्ड रूम में नोएडा एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ उद्योगों से संबंधित समस्याओं के संबंध में एक बैठक का आयोजन किया गया।
प्राधिकरण के विभिन्न विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में एनईए अध्यक्ष श्री विपिन कुमार मल्हन जी ने अवगत कराया कि—
1. नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा उद्योगों में कमर्शियल गतिविधि चलाने पर धारा 10B के नोटिस जारी किए जाते हैं। वर्ष 2021 से पूर्व उद्यमी द्वारा कमर्शियल गतिविधि बंद कर भविष्य में न चलाने का शपथ पत्र देने पर नोटिस वापस ले लिया जाता था। लेकिन अब ऐसे मामलों में शपथ पत्र के साथ 1% चार्ज जमा कराकर पुनः कमेटी में रखा जाता है। अतः यह व्यवस्था पूर्व की भांति की जाए और निस्तारण ओएसडी स्तर पर हो।
यूनिफाइड रेगुलेशन 2025 नीति
2. वर्तमान में 4% ट्रांसफर शुल्क है, जिसे नई नीति में बढ़ाकर 10% कर दिया गया है। यह लगभग 250% की वृद्धि है।
3. पहले औद्योगिक भूखंड पर 3 वर्ष निशुल्क और 8 वर्ष सशुल्क समय मिलता था (कुल 11 वर्ष), जबकि नई नीति में अधिकतम 5 वर्ष कर दिया गया है। अतः अतिरिक्त 2 वर्ष का समय दिया जाए।
4. शेयर होल्डिंग/डायरेक्टर परिवर्तन पर ₹500 प्रतिदिन जुर्माना लिया जा रहा है, जिसे घटाकर ₹100 प्रतिदिन किया जाए।
5. निर्माण समयवृद्धि शुल्क में भारी वृद्धि की गई है, जिसे पूर्व नीति के अनुसार रखा जाए।
6. सेक्टर-65 और 67 में आवंटित भूमि पर 2015 में विवाद उत्पन्न हुआ, जिसका अभी तक समाधान नहीं हुआ है—इस पर गंभीरता से विचार किया जाए।
7. ई-नीलामी से भूखंड दरें बहुत बढ़ गई हैं, जिससे लीज रेंट भी बढ़ गया है। सुझाव है कि लीज रेंट प्रतिशत के बजाय प्रति वर्गमीटर तय किया जाए।
8. वन टाइम लीज रेंट जमा करने के बाद पुनः एनओसी की मांग न की जाए।
9. परियोजना परिवर्तन के मामलों का निस्तारण उच्च स्तर के बजाय ओएसडी/एजीएम स्तर पर किया जाए।
10. LLP में परिवर्तन को ट्रांसफर न माना जाए और CIC शुल्क हटाया जाए।
11. कार्यशील प्रमाण पत्र न लेने वाली इकाइयों को दंडित न किया जाए, यदि वे सभी शर्तें पूरी कर लें।
12. किराया अनुमति शुल्क केवल किराए पर दिए गए क्षेत्र पर लिया जाए।
13. पुराने मामलों में ट्रांसफर डीड न होने की समस्या का समाधान निकाला जाए।
14. सेक्टर-64 में हाई नेटवर्क जैमर के कारण आसपास नेटवर्क समस्या हो रही है—इसे हटाया जाए।
15. पारिवारिक ट्रांसफर (सास-ससुर से बहू) पर चार्ज न लिया जाए।
16. वेंडर जोन में अवैध दुकानों की जांच के लिए कमेटी बनाई जाए।
17. सेक्टर-63 में मेट्रो लाइन के नीचे सड़क की मरम्मत कराई जाए।
18. कार्यशील प्रमाण पत्र के लिए कंप्लीशन सर्टिफिकेट की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
19. संयुक्त औद्योगिक इकाइयों को पुनः अलग करने की अनुमति दी जाए।