फोर्टिस और एगिलस ने दूसरे जेनेक्सस सिस्टम के लॉन्च किया


फोर्टिस और एगिलस ने दूसरे जेनेक्सस सिस्टम के लॉन्च के साथ रैपिड जीनोमिक टेस्टिंग क्षमताओं में किया विस्तार

अब देश में त्वरित और पर्सनलाइज़्ड कैंसर केयर की राह बनेगी आसान 


गुरुग्राम (अमन इंडिया ) ।  फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफएमआरआई), गुरुग्राम ने उपचार सुविधाओं को अधिक सटीक एवं उन्नत बनाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए, एगिलस डायग्नॉस्टिक्स के सहयोग से अपना दूसरा जेनेक्सस (Genexus) सिस्टम लॉन्च किया है, जो देश में सर्वाधिक तेज रफ्तार और आवश्यकतानुसार विस्तार की क्षमता रखने वाला जीनोमिक टेस्टिंग प्रोग्राम है। इसके साथ ही, फोर्टिस और एगिलस द्वारा देश में अत्याधुनिक डायग्नॉस्टिक्स एवं समय पर, म्युटेशन-मैचिंग के आधार पर उपचार के जरिए कैंसर केयर को उन्नत बनाने की प्रतिबद्धता को मजबूती मिली है। 

जेनेक्सस (Genexus) प्लेटफार्म 24 घंटे में लिक्विड बायोप्सी, 72 घंटे में मायलॉइड एनजीएस, तथा 5 दिनों के भीतर एमआरडी टेस्टिंग जैसी महत्वपूर्ण मेडिकल रिपोर्ट अभूतपूर्व रूप से कम समय में उपलब्ध कराते हुए नेक्स्ट-जेनरेशन सिक्वेंसिंग (एनजीएस) को सक्षम बनाता है। इतनी कम समयावधि में परिणाम उपलब्ध होने से पारंपरिक डायग्नॉस्टिक के तौर-तरीके पिछड़ गए हैं, जिनमें कई बार कई सप्ताह तक लगते थे और उनसे जेनेटिक जटिलताओं के मामले में भी काफी सीमित जानकारी मिलती थी। 

डॉ राहुल भार्गव, प्रिंसीपल डायरेक्टर एवं चीफ – हेमेटोलॉजी एंड बोन मैरो ट्रांसप्लांट, एफएमआरआई, ने कहा, “दूसरे जेनेक्सस सिस्टम के उपलब्ध होने के बाद, अब हम पहले की तुलना में अधिक मरीजों एवं क्षेत्रों से एएमएल तथा अन्य हेमेटोलॉजिक मैलिग्नेंसी के मामलों में एनजीएस वर्कफ्लो में तेजी ला सकते हैं। त्वरित और गहन जानकारी के आधार पर, न केवल निर्णय लेना आसान बनेगा बल्कि हमारे मरीजों को भी जीवित रहने तथा दीर्घकालिक आधार पर रोग से बचाव के बारे में सटीक तस्वीर मिल सकेगी।”

फोर्टिस तथा एगिलस में रैपिड एनजीएस (नेक्स्ट-जेनरेशन सिक्वेंसिंग) प्रोग्राम के चलते, डॉक्टर अब किसी व्यक्ति के कैंसर के पीछे जेनेटिक कारणों का पता कुछ ही दिनों में लगा सकते हैं, जबकि पहले इस प्रक्रिया में कई हफ्तों का समय लगा करता था। इस उल्लेखनीय प्रगति से मरीजों की देखभाल के मामले में वास्तविक और अधिक सार्थक बदलाव लाया जा सकता हैः 

मरीज जल्द से जल्द सही उपचार शुरू करवा सकते हैं – कम समय में टेस्ट रिज़ल्ट मिलने का एक महत्वपूर्ण लाभ यह होगा कि मरीज अपनी अनोखी जेनेटिक प्रोफाइल के आधार पर जल्द से जल्द सर्वाधिक प्रभावी और पर्सनलाइज़्ड उपचार ले सकेंगे। सच तो यह है कि, 40% से अधिक मरीजों ने लक्षित थेरेपी ली है, जबकि पहले जबकि टेस्ट के नतीजे मिलने में लंबा समय लगा करता था तब यह आंकड़ा केवल 11% था।

अब जीवनरक्षक प्रत्यारोपण पहले से जल्दी हो रहे हैं – जिन मरीजों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, उनके लिए हर दिन कीमती होता है। इस प्रोग्राम से पहले, अधिकांश मरीजों को ट्रांसप्लांट शुरू होने से पहले लगभग 4 महीने तक इंतजार करना पड़ता था। लेकिन अब डायग्नॉस्टिक्स की प्रक्रिया में तेजी आने का नतीजा यह हुआ है कि यह प्रतीक्षा समय घटकर 3 माह से भी कम रह गया है – जिससे मरीजों की रिकवरी की संभावनाएं बेहतर हुई हैं। 

अब उपचार के पहले महीने में कम मरीजों की मौत होती है – ल्यूकीमिया जैसे ब्लड कैंसर के मामलों में उपचार के फैसले जल्द से जल्द लेना काफी महत्वपूर्ण होता है। अब रैपिड टेस्ट रिजल्ट की सुविधा होने से डॉक्टर शुरुआती अवधि में मरीजों की मृत्यु (डायग्नॉसिस के 30 दिनों के भीतर) के मामलों में लगभग पचास फीसदी कमी लाने में कामयाब हुए हैं। 

अधिक मरीजों का जीवनकाल बढ़ रहा है – रैपिड एनजीएस प्रोग्राम का एक बड़ा लाभ यह हुआ है कि, अब एक साल बाद मरीजों की सर्वाइवल रेट 11% बेहतर है और इससे मरीजों एवं उनके परिजनों को कई गंभीर कैंसर रोगों में आशा की नई किरण दिखायी दी है। 

जीनोमिक्स केवल भविष्य का सपना नहीं रहा – यह आज ही जीवन बचाने में योगदान कर रहा है। जेनक्सस 2.0 की मदद से, फोर्टिस एवं एगिलस ने सटीक कैंसर केयर को अधिक तेज रफ्तार और पहले की तुलना में अधिक स्मार्ट तथा प्रत्येक मरीज के लिए अधिक सुलभ भी बनाया है। 

डॉ आनंद के, एमडी एवं सीईओ, एगिलस डायग्नॉस्टिक्स ने कहा, “दूसरे जेनक्सस के उपलब्ध होने के बाद, अब हम एडवांस मॉलीक्यूलर डायग्नॉस्टिक्स को अधिकाधिक जरूरतमंदों तक पहुंचाने की स्थति में हैं। इससे केवल टेस्ट रिजल्ट उपलब्ध होते हैं बल्कि रिकॉर्ड समय में रोग की सही स्थति के बारे में सटीक जानकारी भी मिलती है। इसने पर्सनलाइज़्ड मेडिसिन को प्रत्येक भारतीय कैंसर रोगी के और नजदीक पहुंचाया है।

फोर्टिस की क्लीनिकल उत्कृष्टता और एगिलस के देशव्यापी लेबोरेट्री इंफ्रास्ट्रक्चर की बदौलत, इस पार्टनरशिप से हेमोटोलॉजिस्ट, ओंकोलॉजिस्ट, मॉलीक्यूलर पैथोलॉजिस्ट तथा बायोइंफोरमेटिशियंस को एक छत के नीचे लाना आसान हो गया है। इसका मकसद यह है कि मरीजों को जीवन-रक्षक जीनोमिक रिजल्ट का इंतजार करने हुए अनावश्यक रूप से समय गंवाना न पड़े। 

फोर्टिस और एगिलस द्वारा मिलकर एआई-आधारित जीनोमिक्स तथा इंटीग्रेटेड ट्यूमर बोर्ड की सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ अब इस नए सिस्टम के लॉन्च के बाद भारत में सटीक आंकोलॉजी को काफी व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जा सकेगा।