बिजली के पोल गिरने से घायल युवक की फेलिक्स अस्पताल में बची जान


-इंटरनल ब्लीडिंग और कई अंगों में चोट लगने से मरीज की हालत थी सीरियस  


नोएडा (अमन इंडिया ) । सेक्टर-137 स्थित फेलिक्स अस्पताल के डॉक्टरों की सूझबूझ के कारण बिजली के पोल से गिरने के कारण घायल मजदूर की हालत बची है। मजदूर को पोल से गिरने के बाद पेट में चोट में लगने के कारण दर्द और इंटरनल ब्लीडिंग की शिकायत थी। फेलिक्स अस्पताल में भर्ती के बाद समय पर जांच और इलाज से मजदूर की जान बची है। 

अलीगढ़ का 22 वर्षीय मजदूर बिजली के पोल पर काम के लिए चढ़ा था। काम करने के दौरान अचानक गिरकर घायल हो गया। उसे गंभीर हालत में इलाज के लिए फेलिक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने अस्पताल पहुंचना पर पाया मजदूर की हालत काफी गंभीर है। उसे इंटरनल ब्लीडिंग हो रही है। जिससे उसके लिवर, प्लीहा और किडनी सहित कई महत्वपूर्ण अंगों में गंभीर चोट आई है। करीब 2.5 लीटर रक्त स्त्राव के साथ खून का थक्का बनने की भी शिकायत मिली। इस कारण मरीज का हीमोग्लोबिन का स्तर सात पर आ पहुंचा था। हीमोग्लोबिन के गिरते स्तर के बीपी की शिकायत पर मरीज को तत्काल उपचार की जरूरत थी। लिहाजा डॉक्टरों ने बिना किसी देरी के तुरंत उपचार का फैसला लिया। अस्पताल के लेप्रोस्कोपिक और जनरल सर्जन डॉ. रितेश अग्रवाल् की देखरेख में मरीज का इलाज शुरू किया गया। पहले सर्जरी से मरीज के क्षतिग्रस्त अंगों को सही करने के साथ रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए ऑपरेशन करना पड़ा। समय पर सर्जरी के कारण मजदूर की जान बच पाई है। इलाज करने वाली टीम में एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ. आराधना और डॉ. अभिमन्यु शामिल रहें। सर्जरी के बाद मरीज के होश में आने का इंतजार  किया गया। करीब 24 घंटे बेहतर निगरानी के बाद मरीज की हालत में काफी सुधार हुआ। मरीज ने इलाज के तीसरे दिन सामान्य अपने हाथों से भोजन करना शुरू किया। पांचवें दिन मरीज ने अपने शरीर में फूर्ति दिखाई। भर्ती मरीज को इलाज के लिए लगाए गए टांके हटाए गए। भर्ती होने के 10 दिन के अंदर ही मरीज की हालत में काफी सुधार हुआ है। जिससे मरीज अब पूरी तरह से स्वस्थ है। अस्पताल के चेयरमैन डॉ. डीके गुप्ता का कहना है कि किसी भी दुर्घटना के बाद घायल मरीज को अगर गोल्डन ऑवर (किसी भी हादसे के बाद पहला शुरुआती एक घंटा) में इलाज के लिए अस्पताल लाया जाए तो मरीज की बचने की संभावना बढ़ जाती है। इस केस से हमें यह सबक मिलता है कि मरीज को घायल होने के दौरान ऐसी चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए थी। जहां डॉक्टर बिना किसी देरी के इलाज शुरू कर सकें। इसके लिए सबसे जरूरी होता है इलाज के लिए जरूरी एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉक्टर और अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर हो। जिससे मरीज की जान समय पर बचाई जा सके। इस केस में भी ऐसे ही हुआ। अस्पताल में एक जगह पर सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मिलकर गंभीर रूप से घायल मरीज की जान बचाने में कामयाबी पाई है। आए दिन देखने को मिलता है कि इलेक्ट्रानिक पोल पर चढ़े मरीज की बिजलीकर्मी मौत हो गई। इसलिए जरूरी है कि सेफ्टी उपकरण पहनने के बाद ही बिजली कर्मी काम करें। किसी हादसे के बाद मरीज को बिना किसी देरी के पास के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल पहुंचाया जाए।