शिव नादर विश्वविद्यालय दिल्ली-एनसीआर में चौथी जीनोमिक्स इंडिया कॉन्फ्रेंस 2024 का सफलतापूर्वक आयोजन


- अमेरिका, यूके, यूरोप और एशिया पेसिफिक के 500 से अधिक जीनोमिक्स के प्रख्यात विद्वानों ने  तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में भाग लिया

ग्रेटर नोएडा (अमन इंडिया ) ।  भारत के युवा इंस्टीट्यूशन्स ऑफ एमिनेंस (आईओई) शिव नादर विश्वविद्यालय दिल्ली-एनसीआर की ओर से तीन दिवसीय जीनोमिक्स इंडिया कॉन्फ्रेंस 2024 (जीआईसी 2024) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य जीनोमिक्स को समझने में आधुनिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी, सफलताओं, चुनौतियों और रणनीतियों पर प्रकाश डालना था। बायोटेक्नोलॉजी विभाग भारत सरकार के सचिव डॉ. राजेश गोखले ने मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहकर कॉन्फ्रेंस की शोभा बढ़ाई।

इस तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस में अमेरिका, यूके, यूरोप और एशिया पेसिफिक के 500 से अधिक जीनोमिक्स के प्रख्यात विद्वानों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में नोबेल पुरस्कार विजेता, अग्रणी अनुसंधानकर्ता, सरकारी अधिकारी और रेगुलेटरी विशेषज्ञों सहित बड़ी संख्या में वक्ताओं ने सहभाग लिया। नेक्स्ट जेनरेशन सिक्वेंसिंग (एनजीएस) एनालिटिक्स और जीनोम इंफॉर्मेटिक्स प्रोग्राम पर आधारित इस कार्यशाला में उपस्थितों को एनजीएस डाटा क्यूसी, अलाइमेंट/असेंबली, एनोटेशन, वेरिएंट कॉलिंग, व्याख्या और रिपोर्टिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों में व्यावहारिक ज्ञापन प्राप्त हुआ।

जीनोमिक्स मानव जीनोम को समझने का उभरता हुआ विज्ञान है। यह जीन और जीनोम के विश्लेषण से संबंधित है और यह तय करता है कि प्रत्येक मनुष्य में डीएनए व्यक्तिगत स्वास्थ्य और बीमारी को कैसे प्रभावित करता है। जबकि जेनेटिक्स यह जानने में मदद करती है कि कैसे कुछ बीमारियां परिवारों में विरासत में मिलती है। अस्थमा, कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग आदि जैसी जटिल बीमारियों का गहन विश्लेषण जीनोमिक्स अध्ययन द्वारा किया जाता है क्योंकि आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारकों का संयोजन केवल एक व्यक्तिगत जीन की तुलना में इन समस्याओं का कारण बनता है।

जीनोटाइपिक टेक्नोलॉजी के सीईओ डॉ. राजा मुगासीमंगलम ने कहा, “शिव नादर विश्वविद्यालय दिल्ली एनसीआर में न केवल जीनोमिक्स के विज्ञान में पारंगत एक उच्च जानकार संकाय है बल्कि इस क्षेत्र में बहुत रुचि रखने वाले विद्यर्थी भी है। जीनोमिक्स को भविष्य की एक सक्षम तकनीक के रूप में पहचानते हुए हम युवा पीढ़ी को इस क्षेत्र को अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए उत्सुक हैं।”

कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन के दौरान एचसीएल हेल्थकेयर के सीईओ एवं उपाध्यक्ष शिखर मल्होत्रा ने कहा, “एचसीएल हेल्थकेयर विशेष रूप से कंपनियों और कॉर्पोरेट्स के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान केंद्रित करता है। व्यापक दृष्टि पूर्व अनुमानित विश्लेषण और स्वास्थ्य देखभाल के लिए जिनोमिक्स का उपयोग करने के इर्द-गिर्द घूमती है जो महत्वपूर्ण रूप से मूल्यवान आधारित समाधान प्रदान करती है। जीनोमिक्स कॉन्फ्रेंस हमारे लिए इस क्षेत्र में अत्यधिक संभावनाओं का पता लगाने और वास्तव में क्रांतिकारी कार्यों की भविष्यवाणी करने का एक रोमांचक अवसर है।”

शिव नादर यूनिवर्सिटी दिल्ली एनसीआर में स्कूल ऑफ नेचुरल साइंस के अधिष्ठाता डॉ. संजीव गलांडे ने कहा, “कुछ वैज्ञानिक जीवन काल बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जबकि एक अन्य समूह यह समझने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि इस दौरान स्वस्थ जीवन कैसे जिया जाए। किसी भी मामले में पूर्व अनुमानित स्वास्थ्य देखभाल चिकित्सा का भविष्य है और जीनोमिक्स और एपिजीनोमिक्स हमें वर्षों तक हमारे स्वास्थ्य यात्रा को समझने और प्रोजेक्ट करने की शक्ति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्वविद्यालय में एपिजेनेटिक्स में उत्कृष्टता केंद्र में, हम एपिजेनोमिक्स विधियों और रोग मॉडल का उपयोग करके ऐसी जटिल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सटीक समाधान कर रहे हैं।”