श्रीविष्णु महायज्ञ और श्रीराम कथा का छठवां दिन

श्रीराम कथा पापों व संतापों को हरने वाली हैः परम पूज्य सद्गुरूनाथ जी महाराज


नोएडा (अमन इंडिया ) । भावातीत ध्यान एवं योग प्रवर्तक महर्षि महेश योगी जी के दिव्य आशीर्वाद से पिछले दस दिसंबर से रामलीला मैदान में आयोजित श्रीविष्णु महायज्ञ में चल रहे श्रीराम कथा में सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहाकि इस कलिकाल में सिर्फ मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम ही संकट और विपदा से मुक्ति दिला सकते हैं। जिंदगी की आपाधापी में श्रीराम का स्मरण करना नहीं भूलना चाहिए। जिस पर कृपा श्रीराम की हो वो पत्थर भी तैर जाते हैं। अगर भगवान श्रीराम की कृपा आप पर हो जाए तो नाना प्रकार की चीजों से झोली भर जाती है। कथा के दौरान सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कहाकि श्रीराम शाश्वत हैं, सर्वाेच्च सत्ता हैं, विश्व चेतना हैं और ब्रह्माण्डीय अस्तित्व के आधार हैं। दुनिया के सभी ग्रंथों में रामायण को उच्च दर्जा प्राप्त है। परन्तु आज का युवा पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव में आकर अपनी संस्कृति से दूर होता जा रहा है। हमें सनातन पद्धति के अनुसार लोगों से व्यवहार करना चाहिए। सनातन का ज्ञान हमें रामायण से प्राप्त होती है। आज संपूर्ण दुनिया में सनातन संस्कृति और धर्म का डंका बज रहा है। जिस प्रकार चरित्र बल से मनुष्य का निर्माण करता है। रामायण ग्रन्थ में चरित्र को बड़े ही अद्भुत ढंग से दिखाया गया है। भगवान राम का अवतरण इस धराधाम पर पापियों के उद्धार के लिए हुआ था। प्रभु श्रीराम प्रेम से प्राप्त होते हैं, और इस घोर कलिकाल में श्रीराम कथा का बार-बार श्रवण, मनन तथा  चिंतन करना चाहिए। श्रीराम कथा सभी पापों तथा संतापों को हरने वाली है। इस कथा को भगवान भोलेनाथ ने माता पार्वती को सुनाया था, इस कारण श्रीरामकथा को अमरकथा कहा जाता है। 

सद्गुरूनाथ जी महाराज ने कथा के दौरान अपने श्रीमुख से कहाकि दुःख में सुख खोज लेना, हानि में लाभ खोज लेना, प्रतिकूलताओं में भी अवसर खोज लेना ही सकारात्मक दृष्टिकोण कहलाता है। जीवन का ऐसा कोई बड़े से बड़ा दुःख नहीं जिससे सुख की परछाईयों को ना देखा जा सके। जिन्दगी की ऐसी कोई बाधा नहीं जिससे कुछ प्रेरणा ना ली जा सके। रास्ते में पड़े हुए पत्थर को आप मार्ग की बाधा भी मान सकते हैं और चाहें तो उस पत्थर को सीढ़ी बनाकर ऊपर भी चढ़ सकते हैं। जीवन का आनन्द वही लोग उठा पाते हैं जिनके सोचने का ढंग सकारात्मक होता है।

दंडक वन गौतम ऋषि के श्राप से उजाड़ हो गया था परंतु श्रीरामजी ने वहाँ वास कर उसे हरा भरा कर दिया। इसी तरह जिसने भी श्रीराम नाम को अपना लिया उसका मन सकारात्मक विचारों से भर जाता है। सकारात्मकता ही हमें पावनता प्रदान करती है अर्थात् राम नाम मन से कलुषता मिटता है। जब हमारे अंदर पाप रहेगा ही नहीं, तो हम और आप भी पावन हो जाएंगे। अतः पावनता पाने के लिए श्रीराम नाम धारण करें।

कथा का सीधा प्रसारण आस्था, आस्था प्राईम-1, आस्था फेसबुक एवं आस्था यूटूयूब चैनल पर अगले 18 दिसम्बर तक किया जाएगा। देश और विदेश के भक्तजन टीवी और इंटरनेट द्वारा कथा का आनंद ले सकते हैं।

इस अवसर पर डॉ. महेश शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार व सांसद, गौतम बुध नगर, श्री अजय प्रकाश श्रीवास्तव, अध्यक्ष, महर्षि महेश योगी संस्थान और  कुलाधिपति, महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फार्मेशन टेक्नालोजी, श्री राहुल भारद्वाज, उपाध्यक्ष, महर्षि महेश योगी संस्थान, भैयाजी, अलोक जी, श्रीमती कमलेश सिंह, मुख्य  विकास अधिकारी, यशवंत सिंह, रजिस्ट्रार, नोएडा अथॉरिटी, डॉ. तृप्ति अग्रवाल, डीन एकेडमिक, डॉ. के. बी. अस्थाना, डीन, महर्षि स्कूल ऑफ़ लॉ, संजय कमल, बॉबी सिंह, महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ़ इंफार्मेशन टेक्नालॉजी, नोएडा कैंपस, संजय सिन्हा, एस पी गर्ग, उमाचरण मिश्रा, यज्ञाचार्य पंडित सतीश भट्ट, राजेश मिश्रा, कौशल कुमार झा, बबलू पांडे और हरीश (प्रयागराज), श्रीविष्णु महायज्ञ व श्रीराम कथा कार्यक्रम के संयोजक रामेन्द्र सचान, गिरीश अग्निहोत्री एवं हजारो श्रद्धालु उपस्थित थे।

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