क्विक हील फाउंडेशन ने लॉन्‍च की ‘साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा - अर्न एंड लर्न’ पहल

क्विक हील फाउंडेशन ने लॉन्‍च की ‘साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा - अर्न एंड लर्न’ पहल; बारपेटा के समुदाय को मजबूत किया



इस प्रोग्राम का लक्ष्य जनजाति समुदायों सहित 40,000 स्टूडेंट्स और 10,000 ग्रामीणों को लाभ पहुँचाना, साइबर संबंधी जागरूकता और दृढ़ता को बढ़ावा देना तथा युवाओं में कौशल का निर्माण करना है


दिल्ली (अमन इंडिया ) ।  क्विक हील टेक्‍नोलॉजीज लिमिटेड ने अपनी सीएसआर इकाई - क्विक हील फाउंडेशन के माध्यम से आज असम के बारपेटा में अपनी महत्‍वपूर्ण “साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा - अर्न ऐंड लर्न” (साइबर सुरक्षा के लिए साइबर शिक्षा - कमायें और सीखें) पहल लॉन्‍च की। इस अवसर पर क्विक हील की ऑपरेशनल एक्सीलेंस की चीफ और क्विक हील फाउंडेशन की चेयरपर्सन, सुश्री अनुपमा काटकर उपस्थित थीं, जिन्होंने प्रोग्राम का उद्घाटन किया। यह बारपेटा में साइबर सुरक्षा की शिक्षा बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्थानीय एनजीओ, ‘सृजन - एक सोच’ के सहयोग से यह पहल इस क्षेत्र में 40,000 स्टूडेंट्स और 10,000 ग्रामीणों तक पहुंच बनाएगीा इसकी मदद से लोगों के बीच डिजिटल व्यवहारों पर जागरूकता फैलाने साइबर सुरक्षा के प्रति तत्परता को मजबूत करने का काम किया जाएगा।


भारत में 250 सर्वाधिक पिछड़े जिलों में से एक बारपेटा को वर्ष 2006 से पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि प्रोग्राम (बीआरजीएफ) का लाभ मिल रहा है। प्राकृतिक सुन्दरता से भरा बारपेटा शहर गुवाहाटी से 98 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है और बारपेटा जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है।


“साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा - अर्न ऐंड लर्न” पहल बारपेटा में युवाओं के सर्वांगीण विकास के प्रति समर्पित है। इसका लक्ष्य युवाओं को साइबर सुरक्षा से आगे तक के कौशल से लैस करना है। इसमें व्यक्तित्व विकास, व्यावहारिक कौशल और पब्लिक स्पीकिंग सहित शिक्षा पर जोर दिया गया है। इस प्रोग्राम में इन युवाओं को विभिन्न व्यावहारिक ज्ञान का अनुभव देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और व्यक्तिगत विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा जिससे कि वे सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में आने वाली बाधाओं को पार करने के योग्य बन सकें। इसके अलावा, यह पहल इन युवाओं को रोजगार के भावी अवसरों के लिए तैयार करके उनके स्थानीय रोजगार बाज़ार और व्यापक समाज, दोनों में बहुमूल्य अंशदाता बनायेगी। आखिरकार, इससे डिजिटल युग में विकसित होने में सक्षम सुयोग्य व्यक्तियों का निर्माण होगा।


इस प्रोग्राम के तहत, स्थानीय समुदाय और स्थानीय कॉलेजों के स्टूडेंट्स के बीच से कंप्यूटर साइंस की शिक्षा देने वाले लगभग 40 वालंटियर का चयन किया जाएगा। ये वालंटियर इस आकांक्षी जिले में असम साइबर वॉरियर्स के रूप में काम करेंगे और स्थानीय आबादी के बीच साइबर सुरक्षा पर जागरूकता बढ़ाएंगे। इन वॉलंटियर्स के लिए प्रशिक्षण में व्यावहारिक कौशल और सामान्य साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता पर केन्द्रित चार घंटे के ऑनलाइन स्तर शामिल हैं। इसके अलावा ऑफलाइन सत्र भी होंगे, जहाँ इन्हें व्यक्तित्व विकास, टीम निर्माण, लक्ष्य निर्धारण और पब्लिक स्‍पीकिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा।


ये साइबर वॉरियर्स स्कूल के बच्चों और समुदाय से संपर्क करेंगे और उन्हें फिशिंग स्कैम्स, साइबर धमकी, फर्जी खबरों, ऑनलाइन शॉपिंग घोटालों आदि सहित संभावित डिजिटल खतरों के बारे में स्थानीय भाषा में शिक्षा प्रदान करेंगे। इस पहल के द्वारा व्यापक साइबर सुरक्षा जागरूकता सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीणों के साथ उनकी सुविधा के अनुसार दिन में और रात में “साइबर चौपाल” का आयोजन भी किया जाएगा। इस सम्‍पर्क अभियान के तहत साइबर वॉरियर्स पोस्टर आदि जैसी संचार सामग्री भी तैयार करेंगे, जिनमें साइबर हमलों को रोकने के लिए स्‍थानीय भाषा में आसानी से समझने लायक जानकारी दी जायेगी। इन पोस्टरों को ग्राम पंचायत के कार्यालयों और सामुदायिक भीड़-भाड़ वाली दूसरी जगहों पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।


साइबर वॉरियर्स प्रोग्राम के दौरान और बाद भी सम्बंधित गाँवों में चेंज एजेंट के रूप में काम करते रहेंगे। इन समर्पित साइबर वॉरियर्स को उनके शैक्षणिक खर्चों को पूरा करने में मदद के लिए स्टाइपेंड दिया जाएगा ताकि वे अपना ज्ञान और विशेषज्ञता प्रभावकारी तरीके से साझा करने में समर्थ हो सकें।


क्विक हील की ऑपरेशनल एक्सीलेंस की चीफ और क्विक हील फाउंडेशन की चेयरपर्सन, सुश्री अनुपमा काटकर ने कहा कि, “साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा - अर्न ऐंड लर्न’ को लॉन्च करके हम बहुत उत्‍साहित हैं। यह हमारे समुदायों को सशक्त करने और उन्हें डिजिटल परिदृश्य में सुरक्षा के साथ आगे बढ़ने के लिए ज़रूरी ज्ञान और कौशल से लैस करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ‘सत्रों की भूमि’ में हम स्थानीय प्रतिभा का पोषण करते हुए साइबर जागरूकता का बीज बो रहे हैं, जिससे वे साइबर वॉरियर्स बनेंगे। ‘सृजन - एक सोच’ के साथ मिलकर हम न केवल स्थानीय समुदाय का डिजिटल भविष्य सुरक्षित करने के साथ-साथ उनके बीच दृढ़ता और सशक्तीकरण की भावना को प्रोत्साहित भी कर रहे हैं। हमें आशा है कि यह पहल साइबर-अज्ञानता के अन्धकार में एक महत्‍वपूर्ण रोशनी साबित होगी और हमारे लोगों को ज्यादा सुरक्षित और कुशल भविष्य के लिए मार्गदर्शन प्राप्त होगा।”


‘सृजन - एक सोच’ के सीईओ, श्री विकास कुमार तिवारी ने कहा कि, “हम आज के आयोजन को सफल बनाने में बारपेटा के लोगों और गाँवों के नेताओं के शानदार सहयोग के लिए आभारी हैं। इस प्रोग्राम के लिए चुने गये स्टूडेंट्स असम और इसके बाहर के लोगों के लिए रोल मॉडल्स बनेंगे और दूसरों को भी बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करेंगे। आज लोगों के चेहरों पर जो खुशी दिखाई दे रही है वह क्विक हील फाउंडेशन और गाँवों के नेताओं के सामूहिक प्रभाव का प्रमाण है। क्विक हील फाउंडेशन ने सृजन की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और साइबर शिक्षा फॉर साइबर सुरक्षा तथा आरोग्य यान वैन्स जैसे कार्यक्रमों में सहयोग किया है। हम क्विक हील और विशेषकर अनुपमा मैडम तथा अजय सर की दूरदर्शी पहल के आभारी है, जिन्होंने हमें वास्तविक बदलाव लाने का अतुलनीय अवसर प्रदान किया है। समाज के प्रति क्विक हील का समर्पण और सामाजिक पहलों में उनके योगदान से हम सभी को प्रेरणा मिलती है। एक साथ मिलकर हम इस प्रोग्राम को उत्कृष्टता के साथ कार्यान्वित करने और दूसरों के लिए एक प्रतिस्पर्धी मानदंड स्थापित करने के प्रति वचनबद्ध हैं।”