गले में खराश टॉन्सिल आवाज बैठ जाने की शिकायत ज्यादा: डॉ गौरव

नोएडा (अमन इंडिया) । टॉन्सिल ने गले को जकड़ा गले में हो रहा दर्द बदलते हुए मौसम का प्रभाव सेहत पर पड़ रहा है। गले में खराश, टॉन्सिल, आवाज बैठ जाने की शिकायत लेकर मरीज अस्पताल पहुंचे रहे हैं। फेलिक्स अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ गौरव कुमार  का कहना है कि गला खराब होने का मतलब अकसर गले में दर्द होना या खुजली जैसा होना, गले में कफ जम जाना और गले की आवाज बदल जाना माना जाता है। इसलिए इसके शुरुआती समय में ही इसपर ध्यान देना चाहिए।

ईएनटी विशेषज्ञ ने बताया कि गले के पीछे की तरफ दो ओवल शेप टिशू के पैड्स होते हैं। अगर इनमें कोई बैक्टीरिया जम जाए या किसी तरह का वायरस हमला कर दे तो 'टॉन्सिल्स' की स्थिति बन जाती है। सर्दी की शुरुआत या जाती हुई सर्दी में टॉन्सिल कई कारणों से होते है। इनमें ठंडी चीजों का सेवन करना, कफ-कोल्ड होना, इम्यूनिटी कमजोर होना या ठंड लगना शामिल है। टॉन्सिल सर्दी गले में पनपने वाली बीमारी है जो बैक्टीरिया और वायरस के कारण होती है। इस बीमारी की वजह से गले में सूजन, दर्द और खराश हो जाती है जिससे कुछ भी खाने-पीने में काफी तकलीफ होती है। अगर शुरुआत में टॉन्सिल को ठीक न किया जाए तो परेशानी बढ़ सकती हैं, जिसके कारण कई बार आवाज भी नहीं निकलती और अगर मुंह से कोई शब्द निकल भी जाए तो गले का दर्द बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है। सर्दी के मौसम में गले में दर्द होना एक आम समस्या है। कभी ठंडी हवा के कारण तो कभी कुछ ठंडा खा लेने के कारण गला चोक हो जाता है। ऐसे में बोलने या कुछ खाने में भी दिक्कत होने लगती है। आमतौर पर लोग गला खराब होने पर गर्म पानी पीना शुरू कर देते हैं। इससे आराम तो मिलता है लेकिन इसके अधिक सेवन से मुंह में सूखापन आने की समस्या भी होने लगती है। इस दौरान तेज गर्म पानी पीने की जगह गुनगुने पानी का सेवन करें। गर्म पानी में नमक डालकर इस पानी से गरारे करे, भाप भी ले सकते हैं अदरक और तुलसी की चाय का सेवन करे

-तनाव से दूर रहें

-स्वस्थ वजन बनाए रखे

-अच्छी तरह से हाथ और मुंह धोएं 

-साफ-सफाई का खास ध्यान रखें

-नियमित रूप से व्यायाम करें

-जब बच्चा बीमार हो तो उसे घर पर रखें

-नशीली चीजें जैसे कि शराब, सिगरेट और गुटखा का सेवन न करें 

-खानपान की चीजें, बोतल या बर्तन दूसरों के साथ साझा करने से बचें

-जांच में टॉन्सिल की पुष्टि होने के बाद टूथब्रश को बदल दें


-बच्चे को जब भी खांसी या छींक आए तो उसके मुंह पर रूमाल लगाएं

-बच्चे को खांसने या छींकने के बाद हाथ धोने की हिदायत दें

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