ग्लोबल हेल्थकेयर कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और फिटनेस प्रेमी कपिल देव के साथ ‘ब्रेक द पार्टनरशिप” कैंपेन लॉन्च किया

 नोवो नॉर्डिक्स इंडिया ने शुरू किया कपिल देव के साथ “ब्रेक द पार्टनरशिप” कैंपेन, डायबिटीज में वजन नियंत्रण के लिए इलाज के नए विकल्पों पर जोर 


भारत में टाइप-2 डायबिटीज वाले 67% लोग मोटापे के भी शिकार हैं। इस कैंपेन में डायबिटीज के रोगियों, उनके परिचारकों और डॉक्टरों को टाइप-2 डायबिटीज में वजन नियंत्रण का महत्त्व बताया जाएगा



पूरे भारत में शैक्षणिक सभाओं के जरिए हेल्थ केयर प्रोफेशनल को जोड़ा जाएगा और रोगनिदान, चिकित्सीय परामर्श एवं जागरूकता वार्ताओं के साथ रोगी शिविर लगाए जाएंगे। 



नई दिल्ली (अमन इंडिया) ।   भारत में प्रमुख


ग्लोबल हेल्थकेयर कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और फिटनेस प्रेमी कपिल देव के साथ ‘ब्रेक द पार्टनरशिप” कैंपेन लॉन्च करने के लिए साझेदारी की है। इस कैंपेन में डायबिटीज के रोगियों, उनकी देखभाल करने वालों और डॉक्टरों को टाइप-2 डायबिटीज में वजन बढ़ने के गहरे प्रभाव के बारे में बताया जाएगा। यह कैंपेन डायबिटीज के रोगियों को इलाज के नए विकल्पों पर डॉक्टरों से सलाह लेने के लिए मरीजों को प्रोत्साहित करता है, जिससे उन्हें टाइप-2 डायबिटीज में ब्लड ग्लूकोज के साथ वजन को भी नियंत्रित करने में मदद की जाएगी।


एक अध्ययन से पता चलता है कि भारत में टाइप-2 डायबिटीज के 67% रोगी मोटापे का भी शिकार हैं।1 वजन में एक किलो की कटौती भी एचबीए1सी को 0.1% कम करने में मदद करेगी, जिससे दिल, गुर्दे और हड्डियों से संबंधित बीमारियों का खतरा कम रहेगा और रोगियों की सेहत पर मिश्रित सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अमेरिकन डायबिटीज असोसिएशन (एडीए) की ओर से 2022 में जारी सर्वसम्मत दिशा-निर्देशों में टाइप-2 डायबिटीज के मैनेजमेंट में वजन न बढ़ने देने को महत्वपूर्ण तत्व माना था। इसके अलावा एंडोएक्राइन सोसाइटी ऑफ इंडिया ने यह सिफारिश की है कि जिन लोगों में डायबिटीज के साथ मोटापा भी है, उनके इलाज में उस थेरेपी को शामिल करना चाहिए, जिससे वजन कम करने के साथ ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिले। इसलिए यह जरूरी है कि लोग वजन और डायबिटीज के बीच साझेदारी तोड़ने की अहमियत को समझें और अपने डॉक्टरों से इसके लिए उन्हें नए मेडिकल सोल्यूशन प्रदान करने के लिए बातचीत करें।1-7    


दुनिया भर में डायबिटीज  का हर सातवाँ रोगी भारतीय है। भारत में हर साल डायबिटीज से छह लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है (चीन के बाद दूसरे नंबर पर)।8 हालात उस समय और बिगड़ जाती हैं, जब डायबिटीज के रोगियों का वजन बढ़ जाता है। डायबिटीज के ज्यादा वजन वाले रोगियों में हाईब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रोल बढ़ने का खतरा होता है। उसके साथ ही उन्हें तरह-तरह की दूसरी बीमारियाँ होने का खतरा ज्यादा रहता है, जिसमें कैंसर, हड्डी के रोग, दिल, गुर्दे ओर यकृत से जुड़ी बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है।10-16   


इस बहुआयामी कैंपेन का मकसद प्रमुख हितधारकों में जागरूकता फैलाना है और डायबिटीज में वजन के प्रबंधन के लिए नए और प्रगतिशील मोडिकल सोल्यूशन की खोज को बढ़ावा देना है। आगामी छह महीनों में नोवो नॉर्डिस्क की टीम और उनके सहयोगी डायबिटीज में वजन के प्रबंधन के मुद्दे पर कई शहरों में होने वाले जागरूकता कार्यक्रमों और वैज्ञानिक बैठकों में हेल्थकेयर प्रोफेशनल को शामिल करेंगे। इसके अलावा अपने लक्ष्य पर केंद्रित शिविरों का आयोजन मरीजों के लिए किया जाएगा, जिसमें मरीज अपनी जांच करा सकेंगे और डॉक्टरों से सलाह ले सकेंगे। कैंपों में मरीजों को डायबिटीज और वजन बढ़ने के संबंध के बारे में जागरूक भी किया जाएगा।   


पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी और नोवो नॉर्डिस्क अंडिया के ब्रैंड एंबेसेडर, कपिल देव ने कैंपेन की लॉन्चिंग की घोषणा करते हुए कहा, “डायबटीज के खिलाफ जंग में नोवो नॉर्डिस्क से जुड़कर मैं बेहद प्रसन्न हूँ। ब्रेक द पार्टनरशिप, #वेट इन डाय़बिटीज कैंपेन  का फोकस, डायबिटीज और वजन के हानिकारक गठबंधन के प्रति जागरूकता फैलाने पर है, जिसे प्रभावी तरीके से मैनेज किया जाना चाहिए। क्रिकेट में दो बल्लेबाजों के बीच होने वाली पार्टनरशिप विपक्षी टीम के लिए हानिकारक हो सकती है। एक गेंदबाज हमेशा इस साझेदारी को जल्द से जल्द  तोड़ने की फिराक में रहता है। इसी तरह डायबिटीज और वजन की यह साझेदारी मरीजों के लिए काफी हानिकारक हो सकती है। इसे समय रहते मैनेज करना चाहिए। अपनी सभी परेशानियों और दिक्कतों को बोल्ड करना बहुत जरूरी है, ताकि वह आपको स्टंप आउट न कर सके। आज विज्ञान के क्षेत्र में हुई प्रगति ने टाइप-2 डायबिटीज में प्रभावी इलाज की इजाजत दी है, जिससे ब्लड शुगर के साथ ही अपने वजन को नियंत्रण में रखने की इजाजत मिलती है। मुझे टाइप-2 डायबिटीज है। मैं जानता हूं कि अगर हम समय पर कदम उठाएं और सही इलाज कराएं तो इसे प्रभावी ढंग से मैनेज किया जा सकता है। मैं मरीजों को टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए उपलब्ध नए और प्रगतिशील विकल्पों के प्रयोग पर डॉक्टरों से बातचीत करने का सुझाव देता हूँ और इसकी पुरजोर सिफारिश करता हूँ।“


नोवो नॉर्डिस्क के कॉरपोरेट वाईस प्रेसिडेंट और प्रबंध निदेशक, विक्रांत श्रोत्रिय ने लॉन्चिंग इवेंट में कहा, “नोवो नॉर्डिस्क में हम सारे काम मरीजों को ध्यान में रखकर करते हैं। डायबिटीज और मोटापा दोनों एक साथ हो सकते हैं। आमतौर पर इस साझेदारी का डॉक्टरों या क्लिनिक में ठीक ढंग से इलाज नहीं किया जाता। यह काम्बिनेशन टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में कई गंभीर परेशानियों को जन्म दे सकता है।10-16 डायबिटीज मैनेजमेंट का फलक कई मेडिकल थेरेपी के साथ काफी विकसित हुआ है। ये मेडिकल थेरेपी ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के साथ वजन में भी कटौती करती है। हमारी ओर से लॉन्च की गई नई ब्रेक द पार्टनशिप, वेट इन डायबिटीज कैंपेन लोगों को डायबिटीज में वजन बढ़ने के प्रभावों के बारे में जागरूक करता है। हम मरीजों को अपने डॉक्टरों से डायबिटीज के इलाज के नए विकल्पों का प्रयोग करने पर चर्चा के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जिससे न केवल ब्लड शुगर बल्कि वजन भी नियंत्रित रहता है। इससे दूसरी बीमारियों के बढ़ने का खतरा नहीं होता। हमें आशा है कि इस पहल से देश में टाइप-2 डायबिटीज के खिलाफ सख्त कारवाई करने में प्रोत्साहन और मदद मिलेगी।“ 


गुरुग्राम में  मैक्स अस्पताल और साकेत में मैक्स सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी और डायबिटीज विभाग के हेड डॉ. अंबरीश मित्तल ने इस कैंपेन की लॉन्चिंग पर कहा, “टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में अतिरिक्त वजन का कई गंभीर रोगों से सीधा सम्बन्ध होता है, इसलिए इसे मैनेज करना बहुत जरूरी है। एक स्टडी में यह सामने आया कि भारत में टाइप-2 डायबिटीज के 67% मरीजों में मोटापा भी है।1 डायबिटीज से शिकार ज्यादा वजन के लोग अगर अपने वजन में कटौती करते हैं तो उन्हें दिल, किडनी ओर हड्डी के रोग होने का खतरा कम होता है।10-15 टाइप-2 डायबिटीडज के मैनेजमेंट के सिद्धांतों में कई प्रमुख बदलाव हुए हैं।  टाइप-2 डाय़बिटीज से पीड़ित मरीजों का इलाज करने के लिए नई ड्रग थेरेपी पर जरूर विचार करना चाहिए, जिससे ग्लूकोज पर तो कंट्रोल होता ही है, वजन में भी बहुत कटौती होती है।19 ब्रेक द पार्टनरशिप वेट इन डायबिटीज टाइप-2 डायबिटीज के अधिक वजन के मरीजों के इलाज का प्रभावी और प्रगतिशाल तरीका अपनाने में मदद करेगी।” 


भारतीयों के शरीर का आकार थिन फैट फीनोटाइप (बॉडी टाइप) होता है, जिसमें पूरे शरीर का वजन करीब-करीब साधारण होता है, लेकिन उनके शरीर में फैट का प्रतिशत ज्यादा रहता है।19,20  74.3 मिलियन से ज्यादा भारतीयों को डायबिटीज है और एक स्टडी से पता चलता है कि टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित 67% लोगों को मोटापे की समस्या भी है। उनका औसत बीएमआई 25.6 किलो/एम2 होता है, जो 24.9 किलो/एम2 की औसत ऊपरी लिमिट से कहीं ज्यादा है। रिसर्च से यह पता चला है कि 50 साल से कम उम्र के लोगों की अपेक्षाकृत युवा आबादी में डायबिटीज के साथ मोटापा बढ़ रहा है। इसलिए डायबिटीज से पीड़ित लोगों को थेरेपी के उन विकल्पों को आजमाना चाहिए, जिससे ब्लड शुगर के कंट्रोल के साथ वजन में भी कमी आए।.