डेंगू के बाद स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ा:डॉ गुप्ता


  

नोएडा(अमन इंडिया)। कोरोना संक्रमण की रफ्तार धीमी होने से भले ही लोग राहत महसूस कर रहे हो, लेकिन बढ़ती ठंड के कारण इन दिन फ्लू ने चिंता बढ़ा दी है। अस्पतालों में अचानक फ्लू से पीड़ित मरीज काफी संख्या में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं।

फेलिक्स अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ डीके गुप्ता ने बताया कि मौसम बदलने के साथ फ्लू के मामले बढ़ जाते हैं। फ्लू का वायरस भी छींकने या खांसने से एक से दूसरे तक पहुंचता है। देखने में आया है कि जब घर में किसी बच्चे को खांसी, जुकाम या बुखार होता है तो अभिभावक इसे हल्के में लेकर उसे स्कूल भेज देते हैं। उस बच्चे से फ्लू का वायरस आगे से आगे दूसरों तक पहुंच जाता है। ऐसे में हम अभिभावकों को यह सलाह दे रहे हैं कि अगर उनके बच्चे को फ्लू के के लक्षण है तो उसे घर के बाहर न लेकर जाएं। लक्षण सामने आते ही विशेषज्ञ से जांच करवाएं। चूंकि पिछले साल बच्चे घरों से बाहर नहीं निकले, इसलिए फ्लू के मामले बेहद कम रहे थे। इस बार इमरजेंसी, ओपीडी में रोजाना कई बच्चे फ्लू की शिकायत के साथ आ रहे हैं। इन्हें खांसी, जुकाम व बुखार की शिकायत होती है। हालांकि राहत की बात यह है कि इन बच्चों का कोविड टेस्ट नेगेटिव आ रहा है। ये बच्चे पांच से छह दिन के सामान्य इलाज से ही ठीक हो रहे हैं। दूसरी तरफ चिंता की बात यह है कि फ्लू से पीड़ित छह महीने तक के बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है।


मास्क जरूर पहने-

डीके गुप्ता ने बताया कि कोरोना कम होते ही लोगों ने मास्क पहनना बंद कर दिया है। जबकि मास्क हमें कोरोना के साथ दूसरी संक्रामक बीमारियों से बचाता है। ऐसे में ध्यान रखना होगा कि जब भी बाहर जाएं तो मास्क पहनकर जाएं। स्वाइन फ्लू का वायरस इसके पॉजीटिव मरीज से दूसरों में तेजी से फैलता है। इसलिए भीड़भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचना चाहिए। यदि जाना जरूरी हो ताे मास्क का उपयोग करें। सावधानी और सतर्कता बरतें। संदिग्ध मरीज दिखने पर अविलंब अस्पताल में दाखिल कराएं।


फ्लू वैक्सीन अवश्य लें

6 महीने से अधिक उम्र के बच्चों के फ्लू वैक्सीन उपलब्ध है , इसलिए वैक्सीन अवश्य लें | वैक्सीन आपके बच्चों की इम्युनिटी अच्छी रहेगी जिससे उनके बार-2 बीमार होने का खतरा कम हो जाता है |


इन्हें रहता है अधिक खतरा-

-5 साल से कम उम्र के बच्चे

-65 साल से अधिक आयु के वयस्क

-कॉम्प्राइज्ड इम्यून सिस्टम वाले लोग यानि एड्स जैसी बीमारी के कारण

-युवा वयस्क और 19 वर्ष से कम उम्र के बच्चे जो लंबे समय तक एस्पिरिन बफरिन थेरेपी ले रहे हैं

-प्रेग्नेंट महिलाएं, अस्थमा, हृदय रोग, डायबिटीज या न्यूरोमस्कुलर रोग जैसी पुरानी बीमारियों 

स्वाइन फ्लू के कारण-

ठंड लगना, बुखार, खांसी, गले में खराश, बहती या भरी हुई नाक, शरीर में दर्द, थकान, दस्त, मतली और उल्टी आदि स्वाइन फ्लूु के लक्षण है।


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