भले ही अधिक है पीड़ित।पर देश है सर्वाधिक सुरक्षित : इरफान अहमद

 एक करोड़ के पार कोरोना बुखारः भारत का सशक्त प्रहार

 

नई दिल्ली(अमन इंडिया)।मार्च 2020 से भारत में शुरू हुआ कोरोनावायरस यानी कोविड-19 का प्रकोप अब 1 करोड़ को पार हो गया है और वैश्विक स्थिति में भारत दूसरे नम्बर पर हैं। लेकिन सबसे संतोष की बात यह है कि रिकवरी,भर्ती और मृत्यु के मापदंड में स्थिति संतोषजनक और बेहतर है। भारत में अब तक कुल रोगी 1 करोड़ से अधिक है, रिकवर्ड रोगी 96 लाख 50 हजार, सक्रिय रोगियों की संख्या 3 लाख 8 हजार और मृतकों की संख्या लगभग 1.50 लाख है। जबकि अमेरिका की स्थिति भारत के विपरीत है वहां कुल कोरोना-19 रोगियों की संख्या और सक्रिय रोगियों की संख्या में बङा अंतर नहीं हैं। भारत में राज्य अनुसार आंकड़ों की विवेचना के अनुसार महाराष्ट्र पहलें नम्बर पर 18 लाख के लगभग रोगियों के साथ है जबकि 17 लाख 88 हजार रिकवर हो गये हैं। दूसरे नम्बर पर कर्णाटक, तीसरे पर आंध्रप्रदेश, चौथे पर तमिलनाडु, पांचवें पर केरल और छठे नम्बर पर देहली हैं। लक्षद्वीप में एक भी व्यक्ति कोविड-19 से पीड़ित नहीं हैं। विश्व के पहले दस देशों में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और स्पेन का रिकवरी दर बहुत कम है और हालत दयनीय है। जबकि भारत, ब्राजील, रूस, तर्की, इटली और अर्जेंटीना की रिकवरी दर अपेक्षाकृत बेहतर हैं। भारत के लिए खुशखबर यह है कि इन देशों की अपेक्षा भारत की रिकवरी दर सबसे बेहतर है, तद्नुसार मृत्यु दर भी कम है। कुल मिलाकर भारत में स्थिति नियंत्रण में हैं और सर्वश्रेष्ठ है। ब्रिटेन की हालत बदतर है, कोरोनावायरस के नये वेरियंट के कारण क्रिसमस से पहले कङे प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन ने क्रिसमस बबल प्रोग्राम रद्द कर दिया है। 

चीन जिसे फसाद की जङ बताया जाता है, विश्व तालिका मे 76 नम्बर पर है, जहां के कुल रोगियों की संख्या 95 हजार है, 88 हजार रिकवर हुए है और मृतकों की संख्या 7 हजार है। विश्व के 70 देश ऐसे हैं जहां रोगियों की संख्या 10 हजार से लेकर मात्र 1 तक हैं। इनमें से अधिकांश ऐसे देश है जहां शासन-प्रशासन के साथ जिम्मेदार जनता ने सोशल डिस्टेंसिंग पूर्णतः अनुशासित होकर एक समर्पित स्वयंसेवक के रूप में पालन किया है, बहरहाल हम आस्थावादी लोग है, जो हुआ अच्छा हुआ पर भरोसा करने वाले। देर-आयद दुरुस्त-आयद, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 21 मार्च 2020 को कमान संभाली और जनता कर्फ्यू के आव्हान के साथ, देश के नागरिकों को आध्यात्मिक अंदाज में जाग्रत कर विधिवत तालियाँ थालियां बजाकर कोरोना से देश बचाओ अभियान का शुभारम्भ कर दिया। देश के नागरिकों ने भी उनके आव्हान को सकारात्मक रूप में लेकर यथासंभव सोशल डिस्टांसींग का पूर्णतः पालन करने का प्रयास किया।


भारत जैसे विशाल देश में जहां 1.30 अरब के लगभग लोग रहते है, कोविड महामारी पर नियंत्रण का काम कोई आसान नहीं था। जनसंख्या के मान से विश्व के अन्य देशों की तुलना मे भारत मे रोगियों का औसत 1 प्रतिशत से भी कम है और मृतकों की संख्या दशमलव प्रतिशत से भी नीचे हैं। आप मेरी बात को विशुद्ध समीक्षक की नजर से देखेगे तो इस बात को मानना पङेगा कि इस बेहतरी के लिए नेतृत्व को श्रेय जाता है। इस मामले में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के स्व:अनुशासन की सराहना करना होगी। अमेरिका सहित विश्व के अनेक देशों के प्रमुख कोरोना महामारी की चपेट में आ गये लेकिन मोदी जी ने अपने आपको अछूता रखकर एक आदर्श स्थापित किया। सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए वो एक तरह से विश्व के सिरमौर साबित हुए रोल मॉडल बनें। हम अगर उन महान वैश्विक नेता सर्वश्री डोनाल्ड ट्रंप, जस्टिन ट्रूडो, इमेनुअल मैक्रौ आदि की परिस्थितियों का अध्ययन करें तो उनकी स्वयं की लापरवाही और अनुशासनहीता सामने आएगी। अनेक देशों के प्रधानमंत्री मास्क नहीं पहनने की वजह से दंडित भी हुए। इस मामले मे अमेरिका की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सोशल डिस्टेंसिंग के सबसे खराब उदाहरण के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा। जब तक दवाई नहीं तब तक ढिलाई नहीं का प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का नारा भारत के जनमानस के रग-रग में बस गया है। जिसका पालन न केवल स्वयं मोदी जी कर रहे है अपितु सारा देश उनका अनुसरण कर रहा है। प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा ने हाल ही में एक अंतर्राष्ट्रीय मंच पर महामारी से निपटने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी की सराहना की है। कुल मिलाकर भारत उनके नेतृत्व में पूर्ण विजय की ओर अग्रसर हैं।


सोशल मीडिया के आगमन के बाद से ये वरदान और अभिशाप दोनो साबित हुआ है। पहले समाचारों के लिए अखबार दूसरे दिन सवेरे हाथ में आने तक की प्रतीक्षा करना पङती थी, इस धीरज के अधिकांशतः सकारात्मक परिणाम आते थे। अब तो हर नागरिक मिडिया है, आंव देखा न ताव बस बिना सोच विचारे बिना संपादित किये जो मर्जी आया पेल दिया। अगर सोशल मीडिया पर नियंत्रण होता तो कुछ और स्थिति बेहतर हो सकती थी या शून्य भी हो सकती थी। महामारी के काल में जहाँ मोदी जी जैसे वैश्विक नेता अपनी जिम्मेदारी और परिश्रम का परिचय दे रहे हैं!

संपूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था को इस महामारी ने चकनाचूर कर दिया है। विश्व के 122 देश इसके चपेट में हैं, 1918 के स्पेनिश फ्लू के कारण अकेले भारत में मरने वालों की संख्या 18 लाख के लगभग थी। ऐसे में महामारी के प्रकोप को संभाल कर देश के जरूरतमंद लोगों को आर्थिक साधन मुहैया कराना कोई आसान काम नहीं था। 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के साथ वोकल फॉर लोकल का मंत्र देकर देश की जनता प्रोत्साहित करने का कार्य भी सरकार ने किया। लॉकडाउन की घोषणा में तत्काल प्रभाव से काम शुरू करने की वजह से प्रारंभ में महानगरों से प्रवासी मजदूरों के पैदल पलायन के कारण जरूर अव्यवस्था हुई, लेकिन भामाशाह और अज़ीम प्रेमजी के देश में सेवा करने के लिए अभिनेता सोनू सूद का नाम उभरा और उन्होंने एकला चलते हुए इस समस्या का समाधान करने मे मदद की। महामारी के आक्रमण से युद्ध करने में देश के लाखों कोरोना वीरों को भी हमेशा याद किया जाएगा, जो रोगी रिकवर हुए है वो भी कोरोना वीरों में शामिल हैं । पिछले 9 महिने से जिस वैक्सीन की प्रतिक्षा थी, अब उसके आने का समय भी नजदीक है, उम्मीद है कि भारत इसमें भी अग्रणी व सिरमौर साबित होगा। भारत सरकार उसके भंडारण और वितरण की योजना बनाने में जुट गयीं हैं, उम्मीद है 2021 से वैक्सीनेशन का काम शुरू हो जाएगा। वैक्सीन की सफलता के लिए जरूरी है कि छुट पुट साइड इफेक्ट को कोर्ट में घसीटने से बचा जाए, शासन इनके लिए प्रावधान व कानून बनाएं। देश के विभिन्न राज्यों में प्रशिक्षण शिविर प्रारम्भ हो गये हैं। कोविड-19 महामारी ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सहित कईं आसमां निगल लिए। कुल डेढ़ लाख लोग काल के गाल में समा गए, ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए लिए प्रार्थना करें। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार को धैर्य।

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