क्लीन टू ग्रीन ने मेइटी के तत्वावधान में मनाया तीसरा अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस


 


दिल्ली/एन सी आर(अमन इंडिया): इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी) के तत्वावधान में, क्लीन टू ग्रीन ने 14 अक्टूबर 2020 को जिम्मेदार ई-कचरा निपटान के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए तीसरा अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस (2020) मनाया ।


तीसरे अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस पर क्लीन टू ग्रीन ने डिजिटल इंडिया और स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप, गैर-जिम्मेदार और अनुचित ई-कचरा निपटान के कारण होने वाले प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने और इ-कचरे के जिम्मेदार निपटान और पुनर्चक्रण द्वारा पर्यावरण और स्वास्थ्य के खतरों को कम करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।


इस अवसर पर, आरएलजी इंडिया की प्रबंध निदेशक सुश्री राधिका कालिया ने कहा, “इस वर्ष, अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस समारोह 9 से 16 अक्टूबर 2020 तक आयोजित किया गया था। यह 8 दिन का कार्यक्रम - #कनेक्टएनकलेक्ट (#ConnectNCollect) एकीकृत ऑनलाइन और ऑफलाइन अभियान - मुख्य रूप से ई-कचरा निपटान की गैर-खतरनाक प्रणालियों के बारे में जागरूकता पैदा करने , इ कचरा कलेक्शन बढ़ाने और विभिन्न हितधारकों को शिक्षित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था । कार्यक्रम के अंतर्गत कलेक्शन चैलेंज, # स्पॉटदछोटाहाथी (#SpottheChotaHathi) कांटेस्ट और स्कूल वेबिनार सहित सोशल मीडिया पर विभिन्न गतिविधियों को शानदार प्रतिक्रिया मिली, जिससे 14 अक्टूबर को मुख्य कार्यक्रम में साकेत के सेलेक्ट सिटी मॉल में उपस्थिति और भागीदारी बढ़ गई। हम यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि अंतर्निहित संदेश व्यक्तियों, परिवारों, शिक्षकों और समुदायों सहित यथासंभव कई हितधारकों तक प्रेषित किया जा सके। हमें विश्वास है कि इस तरह के आयोजनों से स्टेकहोल्डर्स की आदतों पर काफी असर पड़ेगा। 


संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक ई-कचरा मॉनिटर (2020) के अनुसार, 2019 में दुनिया भर में 7.3 किलोग्राम प्रति व्यक्ति की औसत से कुल 53.6 मिलियन मीट्रिक टन ई-कचरे का उत्पादन किया गया था । 2014 के बाद से वैश्विक ई-कचरे के उत्पादन में 9.2 मिलियन मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है, और विश्व स्तर पर उत्पन्न ई- कचरा 2030 तक दोगुना होने की उम्मीद है, जो जो बढ़ कर 74.7 मिलियन मीट्रिक टन हो जायेगा। ई-कचरे में यह वृद्धि इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग उत्पादों की उच्च खपत दरों [औसतन, वैश्विक ईईई खपत का कुल वजन (फोटोवोल्टिक पैनल को छोड़कर) 2.5 मिलियन मीट्रिक टन], कम जीवन चक्र, और सीमित मरम्मत विकल्पों से बढ़ जाती है।


इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना मंत्रालय के निदेशक / वैज्ञानिक ‘एफ ’ डॉ। संदीप चटर्जी ने ई-कचरे में मौजूद विषाक्त धातुओं के खतरों पर जोर देते हुए कहा,“ अंतर्राष्ट्रीय ई-कचरा दिवस पर हमें जिम्मेदार नागरिकों के रूप में ई-कचरे के गैर-जिम्मेदार निपटान के खतरों के बारे में शिक्षित होने का संकल्प लेना चाहिए । इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में सोना, चांदी, तांबा, पैलेडियम, आदि जैसे धातु के साथ-साथ सीसा, पारा, कैडमियम, क्रोमियम और ब्रोमिनेटेड प्लास्टिक्स होते हैं जो बेहद विषैले होते हैं ”। उन्होंने कहा, “बढ़ती सर्कुलर इकॉनमी की उपलब्धि के लिए ध्वनि सशक्त इ-कचरा प्रबंधन प्रथाएं आवश्यक हैं, लेकिन इसके लिए भारत में प्रतिबद्धता और कड़ी मेहनत की आवश्यकता होगी क्योंकि करीब 95 प्रतिशत इ कचरा अभी भी देश में अनौपचारिक और असंगठित रूप से ट्रीट होता है जो बहुत हानिकारक है। ऐसी विधियाँ और प्रथाएँ पर्यावरण और संचालकों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। लोगों को जिम्मेदार ई-कचरा निपटान के बारे में शिक्षित करने और ई-कचरा प्रबंधन क्षेत्र को व्यवस्थित करने की दिशा में, क्लीन टू ग्रीन का प्रयास सराहनीय है ”।


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