फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा सभी प्रकार के रोगियों के लिए तैयार गैर संक्रामक बीमारियों पर ध्यान देने का समय

फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा का मीडिया ब्रीफिंग सत्र


 


अस्पताल सुरक्षित हैं और अब सभी प्रकार के रोगियों के लिए तैयार भी: अब गैर-संक्रामक बीमारियों पर ध्यान देने का समय


 


डॉ. परनेश अरोड़ा, एडिशनल डायरेक्टर, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा


डॉ. विनीत भाटिया, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा


डॉ. वैभव मिश्रा, डायरेक्टर व एचओडी, अडल्ट सीटीवीएस, फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा


 


नोएडा(अमन इंडिया)।कोरोना वायरस या कोविड-19 ने मेडिकल स्टाफ पर जो दबाव डाला है वह पहले कभी नहीं देखा गया। एक ओर जहां महामारी के प्रबंधन और अधिक से अधिक संख्या में रोगियों को ठीक करने की मांग है वहीं इस ओर पूरा ध्यान होने के कारण गैर-कोविड इलाज अप्रत्याशित रूप से प्रभावित हुए हैं। ये रोगी संक्रमण होने की आशंका के कारण स्वास्थ्य संबंधी जांच, डॉक्टरों से सलाह व इलाज कराने के लिए अस्पताल व स्वास्थ्य केंद्रों तक जाने में झिझक रहे हैं। इससे अन्य बीमारियों के इलाज के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं। इससे देश में पहले से ही अत्यधिक दबाव झेल रहे हेल्थकेयर सिस्टम पर और बोझ बढ़ सकता है क्योंकि मोटापा, डायबिटीज़, कार्डियक संबंधी, हाइपरटेंशन ऐसी बीमारियां हैं जिनकी नियमित निगरानी की आवश्यकता होती है। एक उद्योग के तौर पर बहुत आवश्यक है कि हम दो सबसे महत्वपूर्ण तथ्य सभी के सामने रख सकते हैं। पहला यह कि हेल्थकेयर सर्विसेज़ सुरक्षित हैं और दूसरा ​यह कि जीवनशैली संबंधी बीमारियों की जांच और इलाज में देरी बहुत महंगी साबित होगी।


लोग अब सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतों के लिए भी डॉक्टरों के पास जाने से घबरा रहे हैं क्योंकि उन्हें कोविड-19 संक्रमण होने का खतरा है। कई लोगों को ऐसे लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हुई हैं जैसे हार्ट अटैक। हम अब यह भी जानते हैं कि कोविड के कारण कोरोनरी थ्रोम्बोसिस और पल्मोनरी थ्रोम्बोसिस का जोखिम भी बढ़ जाता है और इसलिए अगर कोविड संबंधी बीमारी के कारण सीने में दर्द हो रहा है तो तुरंत मेडिकल सहायता लेना आवश्यक हो गया है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां रोगी को लॉकडाउन की अवधि के दौरान असहज महसूस हुआ और उन्होंने उसे नज़रअंदाज़ किया गया जो थोड़े दिन में ठीक भी हो गया लेकिन धीरे-धीरे उसने गंभीर लक्षण का रूप ले लिया जैसे हार्ट फेल्यर। मामलों की समीक्षा करने पर सामने आया कि शख्स को हार्ट अटैक आया था लेकिन वे हॉस्पिटल नहीं गए जिससे उन्हें कोई इलाज भी नहीं मिला। अब उस लापरवाही का परिणाम दिखता है क्योंकि मांसपेशियां पूरी तरह खराब हो चुकी हैं जिससे हार्ट फेल्यर की स्थिति आ गई है और उसे पलटने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है। ऐसा ही स्ट्रोक जैसी बीमारियों के लिए भी कहा जा सकता है जो मृत्यु नहीं तो जीवनभर की विकलांगता की वजह बन सकती हैं।


इसलिए, हम यह कह सकते हैं कि कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से पीड़ित लोगों पर कोविड बीमारी का अधिक प्रभाव कुछ इस तरह पड़ा है कि कुछ को बचाया नहीं जा सका जबकि कुछ को जीवनभर की विकलांगता मिली है या फिर डर के कारण हार्ट अटैक/स्ट्रोक्स को नज़रअंदाज़ करने से उनके बचने की संभावना कम हो गई है। चूंकि, अभी निकट भविष्य में यह महामारी समाप्त होती नहीं दिख रही है और संभावना है कि यह कुछ समय तक रहेगी तो यह आवश्यक है कि लोग डायबिटीज़, ब्लड प्रेशर और कई ऐसे लक्षण जिनकी वजह बताना मुश्किल है विशेष तौर पर सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, दम घुटना, स्ट्रोक जैसी कमज़ोरी इत्यादि के लिए तुरंत मेडिकल सहायता लेना आवश्यक है। समय पर उठाया गया कदम जीवन और जीवनभर की विकलांगता से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


सत्र में मौजूद सीनियर क्लिनिशियंस ने कहा: 


फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के एडिशनल डायरेक्टर डॉ परनेश अरोड़ा ने कहा, ''कोविड बीमारी एक स्थानीय बीमारी बनने वाली है। ऐसे में गंभीर लक्षणों व आपात स्थिति को नज़रअंदाज़ नहीं करना हमारे हित में है। ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ जैसे नियमित जोखिमों पर भी नज़र रखने की आवश्यकता है।''


फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ विनीत भाटिया ने कहा, ''फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा में हम हमारे सभी रोगियों व स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी सावधानियां बरत रहे हैं। कोविड और गैर-कोविड रोगियों के लिए अलग-अलग इमारतें हैं और ये दोनों मिले नहीं इसके लिए अलग-अलग प्रोटोकॉल व प्रक्रियाएं भी अपनाई जा रही हैं। पीपीई किट्स के साथ ही सभी वैश्विक सावधानियां जैसे सुरक्षा अब सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं।''


फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा में अडल्ट सीटीवीएस के डायरेक्टर व एचओडी डॉ वैभव मिश्रा ने कहा, ''सर्जरी टालने या उसमें देरी करने से हृदय व अन्य अंगों की गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है जो जानलेवा साबित हो सकता है। आपात स्थिति में या फिर शारीरिक गतिविधियों के प्रभावित होने पर की गई सामान्य सर्जरी भी जोखिम भरी साबित हो सकती है। फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा में हमने मार्च से लेकर अभी तक 70 से अधि​क हार्ट सर्जरी की हैं और उनके शानदार परिणाम मिले हैं व किसी को भी कोविड संक्रमण नहीं हुआ।''


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