JNU में NFYM का आइडिया ऑफ इंडिया पर संवाद


JNU में NFYM का ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ पर संवाद, समानता, संवैधानिक मूल्यों और समावेशी लोकतंत्र पर ज़ोर


नई दिल्ली (अमन इंडिया) । नेशनल फेडरेशन ऑफ यूथ मूवमेंट्स (NFYM) ने 18 अगस्त को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली में आइडिया ऑफ इंडिया विषय पर एक संवाद आयोजित किया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, राजनीतिक प्रतिनिधियों, पत्रकारों, छात्रों और युवा नेताओं ने भाग लिया तथा भारत के लोकतांत्रिक, संवैधानिक और बहुलतावादी स्वरूप पर चर्चा की।


JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज स्थित कमेटी रूम-1 में आयोजित इस कार्यक्रम ने लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, संवैधानिक मूल्यों, विविधता, राजनीतिक भागीदारी और भारत के भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर विभिन्न दृष्टिकोणों को साझा करने का मंच प्रदान किया। चर्चा में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि लोकतांत्रिक भागीदारी को मज़बूत करने के लिए वैचारिक, सामाजिक और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद आवश्यक है।


जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. अजय गुडावर्ती ने विभिन्न वैचारिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को एक मंच पर लाने की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संवाद के लिए राजनीतिक या वैचारिक समूहों के बारे में बनी पूर्वधारणाओं से आगे बढ़ना और गंभीर मतभेदों के बावजूद सार्थक बातचीत के अवसर पैदा करना ज़रूरी है।


प्रो. गुडावर्ती ने कहा कि आइडिया ऑफ इंडिया की शक्ति विभिन्नताओं के बीच संवाद को स्वीकार करने और उसे बनाए रखने की क्षमता में निहित है। उन्होंने समुदायों, राजनीतिक समूहों और विभिन्न वैचारिक धाराओं के बीच संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया तथा देशभर में ऐसे और संवाद आयोजित किए जाने का आह्वान किया।


दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. जितेंद्र मीणा ने आइडिया ऑफ इंडिया में आदिवासी समुदायों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों ने भारत की परंपराओं, मूल्यों और सामाजिक जीवन की भावना को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और देश के अतीत, वर्तमान और भविष्य को समझने में उनके योगदान को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।


वरिष्ठ पत्रकार बुशरा खानम ने भारत की साझा सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत में मुसलमानों के योगदान पर प्रकाश डाला और मुसलमानों को निशाना बनाए जाने तथा हाशिए पर धकेले जाने को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आइडिया ऑफ इंडिया की रक्षा और मजबूती में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए जिम्मेदार पत्रकारिता, तथ्यपरक रिपोर्टिंग और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत के संवैधानिक और बहुलतावादी चरित्र की रक्षा के लिए स्वतंत्र और जिम्मेदार मीडिया आवश्यक है।


शहनवाज आलम सचिव भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने कहा कि आइडिया ऑफ इंडिया को समझने के लिए देश की विविध सामाजिक, धार्मिक और वैचारिक संरचना को समझना जरूरी है। उन्होंने विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोगों को एक साथ लाने तथा उन्हें एक-दूसरे के विचार सुनने और समझने के अवसर प्रदान करने की आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि समुदायों और विभिन्न वैचारिक समूहों के बीच संवाद आइडिया ऑफ इंडिया को जीवंत बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उनके अनुसार, ऐसे मंच आपसी समझ को बढ़ाने और देश में लोकतांत्रिक संस्कृति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

NFYM के चेयरमैन मसीहुज्ज़मा अंसारी ने कहा कि आइडिया ऑफ इंडिया की बुनियाद समानता, समान अधिकार और समान भागीदारी पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों और वैचारिक पृष्ठभूमि से आने वाले नागरिकों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए और उनकी पहचान के आधार पर उनके साथ भेदभाव या उन्हें निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि समावेशी आइडिया ऑफ इंडिया वह है, जिसमें हर समुदाय और हर वैध वैचारिक दृष्टिकोण को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में समान रूप से भाग लेने का अवसर मिले तथा प्रत्येक नागरिक को गरिमा, न्याय और संवैधानिक संरक्षण प्राप्त हो। 

कार्यक्रम में छात्रों और युवा नेताओं की भी सक्रिय भागीदारी रही। उन्होंने “यंग इंडिया, न्यू इंडिया और आइडिया ऑफ इंडिया” पर अपने विचार साझा किए। प्रतिभागियों ने ऐसे भारत की कल्पना प्रस्तुत की जो लोकतांत्रिक, समावेशी, सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण और विभिन्नताओं के बीच संवाद के लिए खुला हो। उनकी भागीदारी ने भारत के वर्तमान और भविष्य से जुड़े सवालों पर युवाओं के लिए अधिक संवादात्मक और लोकतांत्रिक स्थान उपलब्ध कराने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि ऐसे मंच बनाए जाने चाहिए, जहां युवा विभिन्न दृष्टिकोणों को सुन सकें, सवाल कर सकें, असहमति व्यक्त कर सकें और रचनात्मक तरीके से संवाद कर सकें।कार्यक्रम का संचालन सैयद अहमद अली, राष्ट्रीय सचिव, NFYM ने किया। 

कार्यक्रम में विभिन्न छात्र एवं युवा संगठनों से जुड़े छात्रों और युवा प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें मोहम्मद कैफ (छात्र नेता), अरुण (NSUI), दाऊद सादिक (AISA), मुजीब (PSA), जाहिद अफजल (Solidarity Youth Movement, Delhi), रजत (Collective), सौरव (PDSU) और क्रांति कुमार (BAPSA) ।