बच्चों के लिए सुरक्षित है टीका घबराएं नहीं टीका लगवाए : डॉ डीके गुप्ता



नोएडा (अमन इंडिया)।


बच्‍चों को कोरोना वैक्सीन का टीका लगवाने में कुछ अभिभावकों को हिचक महसूस हो रही होगी। उन्‍हें यह समझ नहीं आ रहा कि टीका लगवायें अथवा कुछ समय इन्तज़ार करें। इसपर फेलिक्स अस्पताल के चेयरमैन व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ डीके गुप्ता ने वैक्सीन को पूरी तरह से सुरक्षित बताया है। उनका कहना है कि फिलहाल बच्‍चों को कोविड जैसी संक्रामक बीमारी से बचाने का सबसे सही तरीका कोरोना की वैक्‍सीन ही है। विश्‍व स्‍तर पर देखें तो इस इंफेक्‍शन के खतरे को कम करने का एकमात्र रास्‍ता वैक्‍सीनेशन है। वैक्‍सीन कोविड बीमारी की गम्भीरता को कम करती है, कोविड से होने वाले कॉम्प्लिकेशन से बचाती है। इसके अतिरिक्त कोविड वैक्सीन लगाने के बाद मृत्यु से लगभग सौ फीसदि बचाव है। 

ड्रग्‍स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थाओ के द्वारा प्रमाणित करने के बाद ही बच्‍चों के लिए वैक्‍सीन को मंजूरी मिली है। इसलिए आपको इसकी प्रभावशीलता और जटिलताओं को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है। डीजीसीआई ने देश में बच्‍चों के लिए दो वैक्‍सीन को मंजूरी दी थी। लेकिन अभी 15 से 18 की आयु के बच्चों को कोवैक्‍सीन ही लगेगी। वैक्‍सीन से कोई गंभीर साइड इफेक्‍ट नहीं होंगे। बुखार, इंजेक्‍शन वाली जगह पर दर्द, लालीपन, सुस्‍ती, बदन दर्द, बुख़ारऔर थकान जैसे कुछ हल्‍के लक्षण दिख सकते हैं। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। यह लक्षण मामूली दवा के सेवन से ठीक हो जाते है। व्यस्कों के बाद बच्चों को कम से कम एक साल के बाद टीका मिल रहा है और अब शायद वो भी वयस्‍कों की तरह कोरोना से इम्‍यून हो पाएंगे। कई पश्चिमी और यूरोपीय देशों में पहले से ही बच्‍चों के लिए टीकाकरण शुरू हो चुका है। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वह वैक्सीन के लिए बच्चों को प्रेरित करे।

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इन बातों का रखे ध्यान-

-वैक्सीनेशन के दौरान डॉक्टर से मेडिकल हिस्ट्री पर चर्चा जरूर करें। क्योंकि किसी दवा से अगर एलर्जी होती तो वैक्सीनेशन से भी थोड़ी दिक्कत आ सकती है। अगर बच्चों को डायबिटीज, ब्‍लड प्रेशर, अस्थमा, ऐलर्जी, दिल की बीमारी अथवा कोई अन्य बीमारी है तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

-वैक्‍सीनेशन से पहले अच्छी तरह से खाना खाकर और भरपूर नींद लेना जरूरी है। टीका लगने के बाद भी जितना संभव हो उतना आराम करने की कोशिश करें। 

-अगर बच्चा कोरोना संक्रमित हो चुके है और तो कम से कम वैक्सीन के लिए एक माह का अंतर रखें।

-बच्चे को पहले से सांस संंबंंधी, अस्थमा, किडनी, थाइराइड, एचआईवी, अर्थराइटिस, पोलियो, टीबी, कैंसर, लीवर संबंधी बीमारी है तो भी घबराने की जरूरत है। डॉक्टर की सलाह पर बच्चों को वैक्सीन लगवाए।

-वैक्सीन लगने के बाद भी बच्चों को मास्क पहनने और शारीरिक दूरी का पालन करने और हाथों को बार-बार धोने के लिए प्रेरित करें।

फ़ीलिक्स हॉस्पिटल २४*७ वैक्सिनेशन सुविधा प्रदान कर रहा है, इसके अतिरिक्त फ़ीलिक्स हॉस्पिटल सोसाययटीज़ एवं आरडबल्यूए में बच्चों एवं बड़ों के लिए डोर स्टेप वैक्सिनेशन कैम्प लगा रहा है।