बनारस घराने की विदुषी सविता देवी के देहांत के साथ ठुमरी के मधुर स्वरों पर लगा विराम


गुरुग्राम(अमन इंडिया): जानी मानी भारतीय शास्त्रीय गायिका सविता देवी का आज सवेरे गुरुग्राम के फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट में निधन हो गया। श्रीमती सविता देवी ठुमरी गायिकी की दुनिया में जाना—माना नाम रही हैं।
श्रीमती सविता देवी के बेटे अजेय महाराज ने बताया कि वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं और उन्हें बृहस्पतिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अजेय ने बतााया  ''जब श्रीमती सविता देवी को अस्पताल लाया गया तब उनकी हालत काफी नाजुक थी। उन्हें आईसीयू में रखा गया और डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नज़र रख रहे थे। लेकिन डॉक्टरों की भरपूर कोशिशों के बावजूद आज सवेरे 10 बजकर 52 मिनट पर वे परलोक सिधार गईं।''
स्वर्गीय पद्मश्री श्रीमती सिद्धेश्वरी देवी की पुत्री और शिष्या सविता देवी ने अपनी अद्भुत गायकी के दम पर भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में अपना खास मुकाम बनाया था। अपनी मां की गायन परंपरा के अनुरूप उन्होंने भी बनारस घराने (पूरबअंग) की शास्त्रीय गायकी के विभिन्न अंगों जैसे ठुमरी, दादरा, चैती, कजरी और टप्पा आदि को न सिर्फ सीखा बल्कि अपनी प्रतिभा से उन्‍हें खूब संवारा भी था। 
वे भारत रत्न पंडित रवि शंकर जी की शिष्या रह चुकी हैं और उनसे उन्होंने सितार वादन की शिक्षा भी  ग्रहण की थी। लेकिन आगे चलकर उन्होंने सितार की बजाय गायकी को चुना और अपना पूरा जीवन अपनी मां की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित कर दिया। वह देश—विदेश में कई प्रतिष्ठित मंचों और संगीत कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। वह नियमित रूप से आकाशवाणी और दूरदर्शन पर भी कार्यक्रम दिया करती थीं। उनकी मधुर आवाज़ और आत्मा को छू देने वाली गायकी ने उन्हें दूर—दूर तक के श्रोताओं के बीच ख्याति दिलायी थी। उन्हे कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। 
विदुषी सविता देवी ने अपनी माता का जीवनवृत्त — मां.... सिद्धेश्वरी लिख चुकी हैं और साथ ही युवाओं के बीच ठुमरी की धरोहर तथा गुरु—शिष्य परंपरा को बढ़ावा देने के लिए भी हमेशा सजग और प्रयासरत रहीं। वह अपने शिष्यों के बीच ठुमरी गायकी की परंपरा को शिद्दत से सींचती रही थीं और उनके जरिए हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की इस समृद्ध परंपरा को अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने को लेकर उन्‍होंने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। श्रीमती सविता देवी दिल्ली विश्वविद्यालय में दौलत राम कॉलेज के संगीत विभाग की कई वर्षों तक प्रमुख रही थीं। उन्होंने सिद्धेश्वरी देवी एकेडमी ऑफ इंडियन म्युज़िक की स्थापना की थी और अपने कई शिष्यों को भी वर्षों तक शिक्षा देकर तैयार किया जिन पर अब श्रीमती सविता देवी की गायन परंपरा को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी है।


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